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कुलसचिव से मिले गणेश गोदियाल; बोले- छह परिवारों के पुनर्वास की जिम्मेदारी ले संस्थान

18 जुलाई की भयावह बारिश के बाद बेघर होने के डर में जी रहे हैं रतूड़ा मोहल्ले के परिवार

श्रीनगर गढ़वाल स्थित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) के समीप बसे रतूड़ा मोहल्ला के आपदा प्रभावित परिवारों का मंगलवार को सब्र टूट गया।

18 जुलाई की रात हुई मूसलाधार बारिश के दौरान कथित तौर पर NIT के निर्माण कार्य के कारण पानी की निकासी

बाधित होने से पानी और मलबा रिहायशी इलाके में घुस गया, जिससे पूरे मोहल्ले में अफरा-तफरी मच गई।

हालात इतने भयावह थे कि सात परिवारों को आधी रात अपने घर छोड़कर जान बचाने के लिए बाहर भागना पड़ा।

घटना के कई दिन बाद भी स्थायी समाधान नहीं मिलने से नाराज प्रभावित परिवारों और स्थानीय लोगों ने

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में NIT के मुख्य गेट पर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया।

प्रदर्शन के दौरान NIT प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की मांग उठाई गई।

‘अब डर के साये में नहीं जी सकते’

धरने पर बैठे लोगों का कहना है कि 18 जुलाई की घटना ने उनकी जिंदगी बदल दी है।

बरसात का मौसम अभी जारी है और हर बारिश के साथ उन्हें दोबारा वही भयावह मंजर देखने का डर सताने लगता है।

उनका कहना है कि प्रशासन से कई बार गुहार लगाने के बावजूद अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।

धरना स्थल पहुंचे NIT के कुलसचिव, गणेश गोदियाल ने रखी ये मांग

धरने के दौरान NIT के कुलसचिव एच.एम. आज़ाद प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल समेत आपदा प्रभावित परिवारों से बातचीत की।

इस दौरान गणेश गोदियाल ने स्पष्ट कहा कि रतूड़ा मोहल्ले में रहने वाले प्रभावित परिवारों के लिए NIT को अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

उन्होंने मांग की कि संस्थान या तो प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए जमीन उपलब्ध कराए या फिर मौजूदा स्थान को सुरक्षित बनाकर (अपलिफ्ट कर) वहां उनके लिए नए मकानों का निर्माण कराया जाए।

साथ ही उन्होंने कहा कि आपदा से हुए नुकसान की भरपाई भी NIT प्रशासन को करनी चाहिए।

गोदियाल ने कहा कि जिन परिवारों ने अपनी जान जोखिम में डालकर उस रात किसी तरह खुद को बचाया, उन्हें अब दोबारा असुरक्षा के माहौल में नहीं छोड़ा जा सकता।

प्रभावित लोगों को स्थायी समाधान मिलना ही चाहिए।

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें

  • आपदा प्रभावित परिवारों का तत्काल सुरक्षित स्थान पर विस्थापन।
  • मकानों और अन्य संपत्ति को हुए नुकसान का उचित मुआवजा।
  • स्थायी एवं सुरक्षित आवास की व्यवस्था।
  • NIT निर्माण क्षेत्र में प्रभावी जल निकासी व्यवस्था विकसित की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
https://regionalreporter.in/ratuda-disaster-victims-protest-nit-srinagar-ganesh-godiyal-dharna/
https://youtu.be/UT6fvGg6OrQ?si=IqDzvuPl7FL7h6Yn
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