उत्तराखंड की लंबे समय से अटकी किशाऊ बांध परियोजना का रास्ता अब साफ हो गया है।
15 सितंबर को छह राज्यों के बीच एमओयू साइन होने के बाद परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
टौंस नदी पर बनने वाली इस परियोजना की कवायद करीब 86 साल पहले शुरू हुई थी।
पानी के बंटवारे, लागत और तकनीकी अड़चनों के चलते यह योजना दशकों तक फाइलों में अटकी रही।
अब उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा के बीच सहमति बनी है।
इसके बाद परियोजना को अंतिम मंजूरी के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल के सामने रखा जाएगा।
टौंस नदी पर बनेगा 232 मीटर ऊंचा बांध
किशाऊ बांध उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर टौंस नदी पर बनाया जाएगा।
इसकी ऊंचाई करीब 232.6 मीटर होगी।
परियोजना से 422 मेगावाट बिजली पैदा होने का अनुमान है। इसमें उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश को 211-211 मेगावाट बिजली मिलेगी।
इसके अलावा करीब 97 हजार हेक्टेयर जमीन को सिंचाई का लाभ मिलने की उम्मीद है। परियोजना से छह राज्यों को पानी का भी फायदा मिलेगा।
उत्तराखंड को कितना खर्च करना होगा?
किशाऊ परियोजना की अनुमानित लागत करीब 15,624 करोड़ रुपये है। इसमें करीब 90 प्रतिशत वित्तीय भार केंद्र सरकार उठाएगी।
बाकी राशि राज्यों को अपने हिस्से के मुताबिक देनी होगी। उत्तराखंड का हिस्सा करीब 38.19 करोड़ रुपये बताया गया है।
हालांकि, राज्य के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ पैसा नहीं है। परियोजना के लिए वन भूमि और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था भी करनी होगी।
17 गांव होंगे प्रभावित
बांध बनने से उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के 17 गांव प्रभावित होंगे। इनमें उत्तराखंड के नौ गांव शामिल हैं।
दोनों राज्यों में करीब 5,500 लोगों के विस्थापन और पुनर्वास का अनुमान है। उत्तराखंड में करीब 3,400 लोग प्रभावित होंगे।
परियोजना के लिए उत्तराखंड की करीब 2,500 हेक्टेयर वन भूमि भी प्रभावित होने की बात सामने आई है।
टिहरी से लिया जाएगा पुनर्वास का सबक
किशाऊ परियोजना में टिहरी बांध के पुनर्वास अनुभव को ध्यान में रखने की बात कही जा रही है।
प्रभावित परिवारों के लिए निर्माण से पहले पुनर्वास पर जोर दिया जाएगा।
प्रस्तावित व्यवस्था में जमीन के बदले जमीन, मुआवजा, आवास और आजीविका से जुड़ी सुविधाएं शामिल हैं।
प्रभावित परिवारों को पुनर्वास स्थल पर जरूरी बुनियादी सुविधाएं देने की भी व्यवस्था रहेगी।
महिलाओं और अन्य प्रभावित वर्गों के अधिकारों को लेकर भी विशेष प्रावधान किए जाने की बात सामने आई है।
उत्तराखंड के लिए फायदा भी, चुनौती भी
किशाऊ बांध से उत्तराखंड को 211 मेगावाट बिजली का लाभ मिलेगा। सिंचाई और जल संसाधन के लिहाज से भी परियोजना अहम मानी जा रही है।
लेकिन दूसरी तरफ नौ गांवों के विस्थापन और हजारों लोगों के पुनर्वास की चुनौती रहेगी।
वन भूमि की भरपाई के लिए जमीन जुटाना भी राज्य के लिए आसान नहीं होगा।
यानी 86 साल बाद किशाऊ परियोजना का रास्ता जरूर खुल गया है, लेकिन अब असली चुनौती इसे प्रभावित परिवारों के हितों के साथ जमीन पर उतारने की होगी।















Leave a Reply