अल्ट्रासाउंड से विशेषज्ञ डॉक्टर तक की मांग
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी का मुद्दा एक बार फिर सामने आया है।
चमोली जिले के नारायणबगड़ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार की मांग को लेकर
जनप्रतिनिधियों ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है।
आंदोलनकारियों का कहना है कि पर्याप्त संसाधनों के अभाव में क्षेत्र की हजारों की आबादी को उपचार के लिए दूसरे अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
क्षेत्र पंचायत सदस्य डागतोली नीरज नेगी, क्षेत्र पंचायत सदस्य बिपिन परिहार और ग्राम प्रधान बेडुला उर्मिला कंडारी स्वास्थ्य केंद्र के बाहर धरने पर बैठे हैं।
आंदोलन को स्थानीय ग्रामीणों और विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों का समर्थन भी मिल रहा है।
35 हजार से अधिक आबादी के इलाज का सवाल
धरनारत जनप्रतिनिधियों के मुताबिक, नारायणबगड़ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र की 35 हजार से अधिक आबादी के लिए महत्वपूर्ण है।
इसके बावजूद यहां पर्याप्त जगह, आवश्यक जांच सुविधाओं और चिकित्सा संसाधनों की कमी बनी हुई है।
क्षेत्र पंचायत सदस्यों नीरज नेगी और बिपिन परिहार का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र में ऐसी सुविधाएं विकसित की जानी चाहिए,
जिससे मरीजों को सामान्य जांच और जरूरी उपचार के लिए दूरदराज के अस्पतालों में न जाना पड़े।
उनका कहना है कि अस्पताल केवल मरीजों को हायर सेंटर रेफर करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए।
ग्राम प्रधान बेडुला उर्मिला कंडारी ने अल्ट्रासाउंड सुविधा की कमी का मुद्दा उठाया।
उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं को जांच के लिए दूसरे अस्पतालों का रुख करना पड़ता है।
इससे उन्हें अतिरिक्त दूरी तय करने के साथ ही समय और पैसे की परेशानी भी उठानी पड़ती है।
आंदोलनकारियों की पांच प्रमुख मांगें
धरना दे रहे जनप्रतिनिधियों ने नारायणबगड़ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए पांच प्रमुख मांगें रखी हैं।
- अल्ट्रासाउंड सुविधा: स्वास्थ्य केंद्र में अल्ट्रासाउंड मशीन की व्यवस्था की जाए।
- एक्स-रे सुविधा: मरीजों की आवश्यक जांच के लिए एक्स-रे मशीन उपलब्ध कराई जाए।
- महिला रोग विशेषज्ञ: महिलाओं को स्त्री रोग संबंधी उपचार उपलब्ध कराने के लिए विशेषज्ञ चिकित्सक की तैनाती हो।
- डॉक्टर, स्टाफ और भवन: पर्याप्त चिकित्सकों एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की नियुक्ति के साथ अतिरिक्त भवन का निर्माण कराया जाए।
- स्वास्थ्य केंद्र का उच्चीकरण: क्षेत्र की जरूरतों और आबादी के अनुरूप स्वास्थ्य केंद्र का उच्चीकरण किया जाए।
मांगों पर कार्रवाई तक जारी रहेगा धरना
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि मांगों पर ठोस कार्रवाई होने तक उनका अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा।
ग्राम प्रधान उर्मिला कंडारी सहित स्थानीय ग्रामीणों और स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों ने स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की मांग का समर्थन किया है।
पहाड़ में इलाज के लिए दूरी बनी बड़ी चुनौती
नारायणबगड़ का मामला पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता से जुड़े व्यापक सवाल भी उठाता है।
दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण ग्रामीणों के लिए समय पर अस्पताल पहुंचना कई बार मुश्किल हो जाता है।
स्थानीय स्तर पर जांच और विशेषज्ञ उपचार की सुविधा नहीं मिलने पर मरीजों को दूसरे शहरों में जाना पड़ता है।
आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए वाहन, एंबुलेंस और इलाज का खर्च अतिरिक्त बोझ बन सकता है।
गर्भवती महिलाओं, गंभीर मरीजों और आपातकालीन स्थिति में उपचार की जरूरत वाले लोगों के लिए समय पर चिकित्सा सुविधा मिलना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
ऐसे में चुनौती केवल अस्पताल भवनों के निर्माण तक सीमित नहीं है।
नियमित चिकित्सकों की तैनाती, आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता, प्रशिक्षित स्टाफ और जांच सुविधाओं का संचालन भी जरूरी है।
नारायणबगड़ में शुरू हुआ आंदोलन अब इस सवाल पर केंद्रित है कि क्षेत्र की आबादी को जरूरी स्वास्थ्य सुविधाएं स्थानीय स्तर पर कब मिलेंगी।
फिलहाल, आंदोलनकारियों ने मांगों पर कार्रवाई होने तक धरना जारी रखने का ऐलान किया है।















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