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नगर निगम श्रीनगर के वार्ड 29 में विकास कार्य पर सवाल

एस्टिमेट कॉपी नहीं मिलने पर उठाई आवाज

नगर निगम श्रीनगर के वार्ड 29 में चल रहे विकास कार्य को लेकर पार्षद पूजा किमोठी ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

उन्होंने संबंधित कार्य का एस्टिमेट उपलब्ध नहीं कराने पर आपत्ति जताई है।

पार्षद का कहना है कि बोर्ड बैठक में दुर्गेश बर्तवाल के घर से भैरव मंदिर और दोबाल क्षेत्र तक विकास कार्य का प्रस्ताव पारित हुआ था।

इसके बाद नगर निगम की ओर से कार्यादेश भी जारी किया गया।

हालांकि, उनके अनुसार कार्यादेश में प्रस्ताव में शामिल टाइल्स सहित कुछ कार्यों का स्पष्ट उल्लेख नहीं है।

ऐसे में उन्होंने नगर निगम से संबंधित कार्य की मूल एस्टिमेट कॉपी उपलब्ध कराने की मांग की है।

एस्टिमेट से तय होती है काम की गुणवत्ता

पार्षद पूजा किमोठी के मुताबिक, एस्टिमेट में निर्माण कार्य से जुड़ी सभी जरूरी जानकारी दर्ज होती है।

इसमें टाइल्स की गुणवत्ता और मोटाई, पाइप का आकार और अन्य निर्माण सामग्री का विवरण शामिल रहता है।

इसके अलावा एस्टिमेट में बजरी और दूसरी सामग्री की मात्रा तथा बनाए जाने वाले चैंबरों की संख्या भी स्पष्ट होती है।

उनका कहना है कि इन्हीं मानकों के आधार पर मौके पर काम की गुणवत्ता जांची जा सकती है।

पार्षद ने कहा कि जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी केवल विकास कार्य का प्रस्ताव रखने तक सीमित नहीं है।

क्षेत्र में होने वाले निर्माण कार्य की गुणवत्ता और सरकारी धन के इस्तेमाल की निगरानी करना भी उनका दायित्व है।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब नगर निगम और संबंधित ठेकेदार के पास कार्य से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध हैं, तो पार्षद को एस्टिमेट की प्रति देने में आपत्ति क्यों है।

पुराने मामले में भी कार्रवाई की जानकारी मांगी

पार्षद ने आरोप लगाया कि उनके द्वारा उठाए गए मामलों पर नगर निगम की ओर से स्पष्ट लिखित जवाब नहीं दिया जाता।

इससे पूर्व भी 2025 में लैन वन से संबंधित दस्तावेज देकर सीसी मार्ग से जुड़े गड्ढों और निर्माण कार्य के संबंध में कार्रवाई की मांग का भी जिक्र किया।

पार्षद के मुताबिक, इस मामले में ठेकेदार को नोटिस जारी किए जाने की जानकारी दी गई थी।

लेकिन करीब एक साल बाद भी उन्हें कार्रवाई की स्थिति को लेकर स्पष्ट लिखित जानकारी नहीं मिली है।

पूजा किमोठी ने कहा कि यदि जनप्रतिनिधि को एस्टिमेट और संबंधित दस्तावेज ही उपलब्ध नहीं होंगे,

तो मौके पर स्वीकृत मानकों के अनुसार काम हो रहा है या नहीं, इसकी निगरानी मुश्किल होगी।

उन्होंने नगर निगम से संबंधित कार्य की एस्टिमेट कॉपी उपलब्ध कराने के साथ लंबित मामलों में कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

पार्षद ने कहा कि विकास कार्यों में पारदर्शिता और सरकारी धन के सही इस्तेमाल को सुनिश्चित करना जरूरी है।

https://regionalreporter.in/yuva-sangam-phase-7-uttarakhand-west-bengal/
https://youtu.be/a3bQYGDBUrw?si=J4rVl3VvzcMwxq3Y
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