उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ मंदिर के कपाट 17 अक्टूबर को शीतकाल के लिए बंद हो गए।
शनिवार को धार्मिक अनुष्ठानों और विशेष पूजा-अर्चना के बीच कपाट बंद किए गए।
इस दौरान सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे और मंदिर परिसर हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज उठा।
भगवान रुद्रनाथ के मुखारविंद की पूजा के लिए प्रसिद्ध इस धाम में अब अगले छह महीने श्रद्धालु गोपेश्वर स्थित गोपीनाथ मंदिर में दर्शन कर सकेंगे।
कपाट बंद होने के बाद भगवान की उत्सव डोली की शीतकालीन यात्रा शुरू हुई।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, डोली 18 अक्टूबर को देवलधार स्थित ज्वाला मंदिर में रात्रि विश्राम करेगी और 19 अक्टूबर को गोपेश्वर पहुंचेगी।
विजयदशमी पर तय होंगी बदरीनाथ, तुंगनाथ और मद्महेश्वर के कपाट बंद होने की तिथियां
रुद्रनाथ के कपाट बंद होने के बाद अब उत्तराखंड के अन्य प्रमुख हिमालयी धामों के कपाट बंद होने की तैयारियां भी तेज हो गई हैं।
बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने की तिथि 20 अक्टूबर को विजयदशमी के अवसर पर पंचांग गणना के बाद घोषित की जाएगी।
इसी दिन द्वितीय केदार मद्महेश्वर और तृतीय केदार तुंगनाथ के कपाट बंद होने की तिथियां भी निर्धारित की जानी हैं।
नवंबर में बंद होंगे चारधाम के कपाट
चारधाम यात्रा के चार प्रमुख मंदिरों-बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री-के कपाट
सर्दियों में भारी बर्फबारी और अत्यधिक ठंड के कारण बंद किए जाते हैं।
18 अक्टूबर तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 2026 में इन धामों के कपाट बंद होने की सभी तिथियों की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है।
बदरीनाथ की तिथि 20 अक्टूबर को तय होगी, जबकि अन्य धामों की तिथियों की पुष्टि संबंधित मंदिर समितियों से होनी है।
कपाट बंद होने के बाद श्रद्धालु शीतकालीन गद्दीस्थलों पर पूजा-अर्चना कर सकेंगे।
केदारनाथ की पूजा ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर, गंगोत्री की मुखबा और यमुनोत्री की खरसाली में होती है।
बदरीनाथ से जुड़ी शीतकालीन धार्मिक परंपराएं भी निचले क्षेत्रों में जारी रहती हैं।
पंचकेदार में कलपेश्वर धाम के खुले रहते हैं कपाट
पंचकेदार में रुद्रनाथ, केदारनाथ, तुंगनाथ और मद्महेश्वर के कपाट शीतकाल में बंद होते हैं।
वहीं, चमोली जिले की उर्गम घाटी में स्थित कल्पेश्वर मंदिर सालभर श्रद्धालुओं के लिए खुला रहता है।
इस तरह रुद्रनाथ धाम के कपाट बंद होने के साथ ही हिमालयी मंदिरों की शीतकालीन परंपराओं का सिलसिला शुरू हो गया है।
आने वाले दिनों में अन्य धामों की कपाट बंद होने की तिथियां घोषित होने के बाद
श्रद्धालुओं को दर्शन की अंतिम तारीखों की स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी।

















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