शेमफोर्ड फ्यूचरिस्टिक स्कूल में ह्यूमैनिटीज क्लब प्रदर्शनी 2026-27 के दौरान विद्यार्थियों ने मॉडल
और प्रोजेक्ट के माध्यम से भारतीय संविधान, लोकतंत्र, ऐतिहासिक घटनाओं और आधुनिक विकास के विभिन्न पहलुओं को प्रस्तुत किया।
प्रदर्शनी में किताबी ज्ञान को व्यावहारिक समझ से जोड़ने के साथ विद्यार्थियों को सामाजिक और राजनीतिक विषयों पर विचार रखने का अवसर मिला।
कार्यक्रम में हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रोफेसर एम.एम. सेमवाल अतिथि के रूप में पहुंचे।
उन्होंने विद्यार्थियों के मॉडलों का अवलोकन किया और उनसे संवाद कर प्रस्तुत विषयों की जानकारी ली।
इस दौरान संविधान, लोकतांत्रिक संस्थाओं और सामाजिक व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।
इस मौके पर प्रो. एमएम सेमवाल की ओर से बच्चों के लिए एक सत्र का आयोजन किया गया जिसमें कि उन्होंने विद्यार्थियों को नशीलें एवं मादक पदार्थों के उपयोग से होने वाली हानियों, स्वास्थ्य समस्याओं तथा उत्तराखण्ड में मानव तस्करी को लेकर जागरूक किया।
संविधान और समानता के अधिकार पर चर्चा
प्रोफेसर सेमवाल ने भारतीय संविधान को देश का सर्वोच्च मूल कानून बताते हुए नागरिकों के अधिकारों की रक्षा में इसकी भूमिका समझाई।
उन्होंने मौलिक अधिकारों, कानून के समक्ष समानता, संसद की भूमिका और न्यायपालिका की जिम्मेदारियों पर प्रकाश डाला।
संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता के अधिकार को भी चर्चा में शामिल किया गया।
विद्यार्थियों के साथ राजशाही से लोकतांत्रिक व्यवस्था तक के सफर और सत्ता के पृथक्करण जैसे विषयों पर विचार साझा किए गए।
आरक्षण, जाति और वर्ग से जुड़े सामाजिक पहलुओं पर भी चर्चा हुई। इन विषयों के जरिए लोकतंत्र में समानता,
अधिकारों और संस्थागत जिम्मेदारियों के महत्व को समझने का अवसर मिला।
संसद और 1857 की क्रांति के मॉडल बने आकर्षण
प्रदर्शनी में कक्षा 11 की छात्रा कनिका पंवार ने 1857 की क्रांति पर आधारित लघु मॉडल प्रस्तुत किया।
वहीं, छात्रा खुशी ने भारतीय संसद का मॉडल बनाकर उसकी विधायी भूमिका को दर्शाया।
अन्य विद्यार्थियों ने भी विभिन्न मॉडलों के जरिए ऐतिहासिक घटनाओं और स्थलों से जुड़े विषयों को प्रस्तुत किया।
मॉडलों के माध्यम से विद्यार्थियों ने इतिहास और राजनीतिक व्यवस्था को दृश्य रूप में समझाने का प्रयास किया।
इस तरह की गतिविधियां विद्यार्थियों को तथ्यों को व्यवस्थित करने, विषयों की व्याख्या करने और अपनी समझ दूसरों तक पहुंचाने का अवसर देती हैं।
विकास, शहरीकरण और आधुनिक शिक्षा पर भी मंथन
कार्यक्रम के दौरान शहरीकरण, आधुनिकीकरण और नई शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में भी चर्चा हुई।
विद्यार्थियों को शिक्षा, बाजार की बदलती जरूरतों और सामाजिक आवश्यकताओं के बीच संतुलन के महत्व से अवगत कराया गया।
प्रोफेसर सेमवाल ने विकास को केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं मानने की बात कही।
उन्होंने शांति और खुशहाली को भी विकास के महत्वपूर्ण पहलुओं के रूप में रेखांकित किया।
यह दृष्टिकोण विद्यार्थियों को विकास की व्यापक अवधारणा समझने में मददगार रहा।
मॉडल आधारित शिक्षा से बढ़ेगी विषयों की समझ
ह्यूमैनिटीज क्लब की प्रदर्शनी ने इतिहास, राजनीति विज्ञान और सामाजिक विषयों को रचनात्मक तरीके से प्रस्तुत करने का मंच दिया।
विद्यार्थियों को अपने प्रोजेक्ट समझाने, सवालों के जवाब देने और विषयों पर संवाद करने का अवसर मिला।
प्रदर्शनी का महत्व इस बात में भी रहा कि विद्यार्थियों ने संविधान, संसद और ऐतिहासिक घटनाओं जैसे
विषयों को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित रखने के बजाय मॉडल के माध्यम से प्रस्तुत किया।
ऐसी गतिविधियां विषयों की समझ विकसित करने और विद्यार्थियों में अभिव्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ाने में उपयोगी हो सकती हैं।
















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