महीपाल नेगी
अभी 2 दिन पहले एसडीआरएफ और नेहरू पर्वतारोहण संस्थान की एक टीम खीर गंगा के उद्गम की ओर अध्ययन के लिए गई थी। इस टीम के किसी सदस्य ने यह वीडियोग्राफी की है।
इससे पता चल रहा है की खीर गंगा में पानी के साथ मलवा काफी ऊंचाई से आया है जो करीब 4800 मी ऊंचाई से बताया जा रहा है। यह श्रीकंठ पर्वत का बेस क्षेत्र है। यह पुराना ग्लेशियर क्षेत्र है। यहां ग्लेशियर डिपॉजिट – मोरेन हैं। तीन स्थानों से यह खिसककर नीचे की तरफ आया और तेजी से बहता हुआ धराली को बहा ले गया।
5 अगस्त की आपदा के बाद से मेरी विभिन्न पोस्ट (अभी दो घंटा पहले की भी ) में आप श्रीकंठ शिखर और खीर गंगा जल ग्रहण क्षेत्र के अध्ययन की आवश्यकता पर जोर दिए जाने की बातें पढ़ चुके हैं।
एक पोस्ट में मैंने लगभग 5000 मी ऊंचाई पर ग्लेशियर डिपॉजिट से खतरे की बात कही थी। मतलब कि इतनी ऊंचाई पर भारी वर्षा के बीच यह नाजुक क्षेत्र टूट गया।
बाकी इस भीषण आपदा के परिणाम से आप पहले ही अवगत हैं।
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