एक सप्ताह बाद दोबारा सौंपा ज्ञापन
नगर निगम श्रीनगर द्वारा संचालित गौशाला की बदहाल व्यवस्थाओं को लेकर स्थानीय महिलाओं और गौसेवकों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है।
28 जुलाई 2026 को भक्तियाणा क्षेत्र की 9-10 महिलाओं ने नगर निगम पहुंचकर गौशाला की स्थिति को लेकर ज्ञापन सौंपा था।
उनका आरोप था कि करीब 4.50 करोड़ रुपये की लागत से बनी गौशाला में निराश्रित गोवंश की उचित देखभाल नहीं हो रही है।
चारा, पीने के पानी और उपचार की व्यवस्था न होने के कारण गोवंश की मौत हो रही है।
एक सप्ताह बीतने के बाद भी स्थिति में सुधार नहीं होने का आरोप लगाते हुए गौसेवकों और स्थानीय लोगों ने नगर निगम को दोबारा ज्ञापन सौंपा है।
पहले दिए गए ज्ञापन पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप
ज्ञापन में कहा गया है कि 28 जुलाई को गौशाला की बदहाल स्थिति को लेकर नगर निगम को शिकायत दी गई थी,
लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। लोगों का कहना है कि गौशाला में हालात पहले जैसे ही बने हुए हैं।
चारा, पानी और इलाज की व्यवस्था नहीं
ज्ञापन के अनुसार गौशाला में गोवंश के लिए पर्याप्त चारा और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध नहीं है।
आरोप है कि भूख और प्यास के कारण गोवंश दम तोड़ रहे हैं,
जबकि बीमार पशुओं को समय पर चिकित्सा सुविधा भी नहीं मिल रही।
मृत गोवंश के निपटान पर भी उठाए सवाल
गौसेवकों ने आरोप लगाया कि गौशाला परिसर में गड्ढा खोदकर मृत गोवंश को एक-दूसरे के ऊपर डाल दिया जाता है।
उनका कहना है कि यह न केवल स्वच्छता के नियमों के खिलाफ है, बल्कि गोवंश के सम्मान के भी विपरीत है।

ज्ञापन में रखी गईं तीन प्रमुख मांगें
गौसेवकों और स्थानीय लोगों ने नगर निगम से मांग की है कि-
- गौशाला में तत्काल पर्याप्त चारा, स्वच्छ पेयजल और पशु चिकित्सकों की व्यवस्था की जाए।
- मृत गोवंश का सम्मानजनक और वैज्ञानिक तरीके से अंतिम संस्कार या भू-समाधि कराई जाए।
- गौशाला की नियमित निगरानी के लिए स्थानीय नागरिकों और पशु प्रेमियों की संयुक्त समिति बनाई जाए।
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि यदि जल्द प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो जिलाधिकारी कार्यालय
और पशु कल्याण बोर्ड (Animal Welfare Board) में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई जाएगी।
मेयर ने दिया एक सप्ताह में व्यवस्था सुधारने का आश्वासन
गौसेवक बर्त्वाल ने बताया कि नगर निगम की महापौर आरती भंडारी ने उन्हें आश्वासन दिया है कि एक सप्ताह के भीतर
गौशाला की व्यवस्थाओं में सुधार किया जाएगा और स्वयं निरीक्षण भी किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि महापौर ने यह भी कहा कि संबंधित गौशाला पौड़ी पशुपालन विभाग के अंतर्गत आती है।
इसके बावजूद नगर निगम अपनी ओर से हर संभव प्रयास करेगा, ताकि गौशाला में रह रहे निराश्रित गोवंश को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
अब स्थानीय लोग और गौसेवक प्रशासन द्वारा दिए गए आश्वासन पर नजर बनाए हुए हैं।
उनका कहना है कि यदि तय समय में सुधार नहीं हुआ तो वे मामले को उच्च अधिकारियों और संबंधित विभागों के समक्ष उठाएंगे।















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