सिलेंडर ब्लास्ट से मची अफरा-तफरी
पौड़ी गढ़वाल के श्रीनगर-बुघानी रोड स्थित एचएनबी गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय (एचएनबीयू) के महिला छात्रावास के समीप गुरुवार को एक कच्चे मकान में भीषण आग लग गई।
देखते ही देखते आग ने पूरे मकान को अपनी चपेट में ले लिया।
सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम दो दमकल वाहनों के साथ मौके पर पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन मकान पूरी तरह जल गया और उसमें रखा घरेलू सामान राख हो गया।
आग बुझाने के दौरान सिलेंडर में हुआ जोरदार धमाका
फायर ब्रिगेड के जवान सोनू सैनी ने बताया कि आग तेजी से फैलने के कारण मकान में रखा अधिकांश घरेलू सामान बचाया नहीं जा सका।
आग बुझाने के दौरान मकान के अंदर रखा एक गैस सिलेंडर अचानक तेज धमाके के साथ फट गया।
विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि ईंट-पत्थर दूर-दूर तक जा गिरे और घटनास्थल पर कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई।
राहत की बात यह रही कि सभी दमकल कर्मी समय रहते सुरक्षित स्थान पर पहुंच गए।
यदि सिलेंडर विस्फोट के समय कोई कर्मी उसके पास होता तो बड़ा हादसा हो सकता था।
दो दमकल वाहनों ने घंटों की मशक्कत के बाद पाया आग पर काबू
आग की गंभीरता को देखते हुए फायर सर्विस ने मौके पर दो दमकल वाहनों को लगाया।
दमकल कर्मियों ने लगातार प्रयास कर आग को पूरी तरह बुझाया और उसे आसपास के अन्य मकानों तक फैलने से रोक दिया।
इस राहत एवं बचाव अभियान में फायर ब्रिगेड के जवान सोनू सैनी, प्रमोद, रश्मि, वीरेंद्र रावत और कोमल सहित पूरी टीम ने सक्रिय भूमिका निभाई।
फिलहाल आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है।
मजदूरी कर जोड़ी जीवनभर की पूंजी, पलभर में हो गई राख
मकान मालिक अरविंद ने बताया कि घटना के समय वह घर पर मौजूद नहीं थे।
वह अपनी बेटी के ससुराल जा रहे थे, तभी एक परिचित ने उन्हें सूचना दी कि उनके घर में आग लग गई है।
जब तक वह मौके पर पहुंचे, तब तक पूरा मकान जलकर राख हो चुका था।
उन्होंने बताया कि घर में तीन गैस सिलेंडर रखे थे, जिनमें से एक सिलेंडर आग के दौरान फट गया।
आग इतनी भीषण थी कि पूरा मकान ध्वस्त हो गया।
अरविंद ने भावुक होकर कहा कि उन्होंने दिहाड़ी मजदूरी कर वर्षों की मेहनत से अपनी गृहस्थी बसाई थी।
घर में रखा राशन, कपड़े, बर्तन, फर्नीचर, किचन का सामान और परिवार की जरूरत का हर सामान आग में जल गया।
उन्होंने सरकार से आर्थिक सहायता, राहत और मकान के पुनर्निर्माण की मांग की है।
मूल रूप से रुद्रप्रयाग के रहने वाले हैं अरविंद
अरविंद मूल रूप से रुद्रप्रयाग जिले के गुप्तकाशी क्षेत्र के निवासी हैं। वह करीब 40 वर्षों से श्रीनगर में रह रहे हैं
और पिछले दो वर्षों से इसी मकान में परिवार के साथ रह रहे थे।
परिवार में उनकी पत्नी, चार बच्चे, स्वयं अरविंद तथा उनके बुजुर्ग माता-पिता सहित कुल सात सदस्य हैं।
बच्चों की पढ़ाई भी श्रीनगर में ही हुई है। इस अग्निकांड ने पूरे परिवार को बेघर कर दिया है।
मासूम आरुषि की आंखों में छलका दर्द, बोली- अब स्कूल कैसे जाएंगे?
रीजनल रिपोर्टर से बातचीत में अरविंद की पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाली बेटी आरुषि अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सकी।
रोते हुए उसने बताया कि आग में उसकी स्कूल की कॉपियां, किताबें, बैग और पढ़ाई का पूरा सामान जल गया।
भावुक आवाज में उसने कहा, “अब हम स्कूल कैसे जाएंगे? हमारी सारी किताबें और कॉपियां जल गई हैं।”
उसकी मासूम बात सुनकर मौके पर मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।
बड़ी बेटी मुस्कान ने बयां किया संघर्ष और दर्द
अरविंद की बड़ी विवाहित बेटी मुस्कान बताती हैं कि उनके पिता ने दिहाड़ी मजदूरी करके बच्चों को पढ़ाया-लिखाया और परिवार की जरूरतों को पूरा किया।
उन्होंने यह भी बताया कि उनकी दादी ने भी दूसरों के घरों में काम कर परिवार का साथ दिया और वर्षों की मेहनत से यह घर और गृहस्थी तैयार हुई थी।
आज एक ही घटना में परिवार की पूरी मेहनत राख में बदल गई।
मुस्कान ने भावुक होकर सरकार और प्रशासन से परिवार की मदद की अपील करते हुए कहा कि इस समय उनके परिवार के पास रहने और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी कुछ नहीं बचा है।















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