संविदा कर्मचारी की बर्खास्तगी पर विवाद गहराया
मनमोहन बर्त्वाल ने सेवा समाप्ति को बताया अनुबंध की शर्तों के विपरीत, 26 अक्टूबर से धरने और आमरण अनशन की चेतावनी
वीर चंद्र सिंह गढ़वाली आयुर्विज्ञान एवं शोध संस्थान, श्रीनगर में चार विद्यार्थियों के प्रवेश निरस्त किए जाने
और संविदा कर्मचारी मनमोहन बर्त्वाल की सेवा समाप्ति का मामला चर्चा में है।
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सीएमएस रावत ने दस्तावेजों में अनियमितता के चलते चार विद्यार्थियों के प्रवेश निरस्त करने की पुष्टि की।
वहीं, मनमोहन बर्त्वाल ने अपनी सेवा समाप्ति को अनुबंध की शर्तों के विपरीत और प्राकृतिक न्याय के खिलाफ
बताते हुए 26 अक्टूबर 2026 से धरना शुरू करने तथा आमरण अनशन तक संघर्ष जारी रखने की चेतावनी दी है।
दस्तावेजों में अनियमितता पर चार छात्रों के प्रवेश निरस्त
प्राचार्य डॉ. सीएमएस रावत के अनुसार, मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की कुल 150 सीटें हैं।
इनमें 26 सीटें ऑल इंडिया कोटे और 124 सीटें राज्य कोटे के अंतर्गत आती हैं।
काउंसलिंग के दौरान कुछ विद्यार्थियों के दस्तावेजों में अनियमितता सामने आने पर चार विद्यार्थियों के प्रवेश निरस्त किए गए।
प्राचार्य ने बताई नियमानुसार कार्रवाई
संविदा कर्मचारी मनमोहन बर्त्वाल की सेवा समाप्ति के संबंध में प्राचार्य ने कहा कि कुछ कर्मचारी तीन से छह वर्षों
तक न तो संस्थान में कार्यरत थे और न ही स्थानांतरण के बाद निर्धारित स्थान पर कार्यभार ग्रहण कर रहे थे।
उनके अनुसार, संबंधित कर्मचारियों को नोटिस भेजे गए और नियमानुसार कार्रवाई की गई।
हालांकि, बर्त्वाल की ओर से नोटिस नहीं मिलने की बात कहे जाने पर प्राचार्य ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है।
रिपोर्टर गंगा असनोड़ा ने प्राचार्य से सवाल किया कि यदि बर्त्वाल की नियुक्ति संविदा के आधार पर हुई थी
और अनुबंध में कार्यस्थल के रूप में राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर तथा उसके ग्रामीण और शहरी केंद्रों का उल्लेख था, तो उन्हें वर्ष 2022 में अल्मोड़ा संबद्ध करने का आधार क्या था।
इस पर प्राचार्य ने कहा कि सरकार और शासन आवश्यकतानुसार संविदा या आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवाएं अन्य स्थानों पर भी ले सकते हैं।
उन्होंने अन्य कर्मचारियों को भी अलग-अलग स्थानों पर तैनात किए जाने की बात कही।
बातचीत में अनुबंध के नवीनीकरण और संबंधित आदेशों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी।
बर्त्वाल का आरोप-बिना सहमति किया संबद्ध, नहीं हुई सुनवाई
मनमोहन बर्त्वाल का कहना है कि 6 अप्रैल 2022 को मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने अनुबंध की सेवा शर्तों के
विपरीत उनकी सेवाएं राजकीय मेडिकल कॉलेज अल्मोड़ा से संबद्ध कर दीं।
उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी सहमति के बिना और उनके निवेदनों पर कार्रवाई किए बगैर उन्हें मूल संस्थान से कार्यमुक्त कर दिया गया।
बर्त्वाल के मुताबिक, यह उनके अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन और प्राकृतिक न्याय के विरुद्ध था।
उन्होंने बताया कि 6 अप्रैल 2022 से सितंबर 2026 तक लगभग साढ़े चार वर्षों में उन्होंने शासन और मेडिकल
कॉलेज प्रशासन से कई बार संबद्धता का आदेश समाप्त कर मूल संस्थान में सेवा बहाल करने की मांग की।
उनका आरोप है कि किसी भी स्तर पर उनके निवेदनों पर संज्ञान नहीं लिया गया।
बर्त्वाल के अनुसार, 30 सितंबर 2026 को प्राचार्य ने उनके प्रार्थना पत्रों का जवाब दिए बिना,
कारण बताओ नोटिस जारी किए बिना और सेवा समाप्ति की चेतावनी दिए बिना सीधे सेवा समाप्ति का पत्र जारी कर दिया।
उन्होंने इसे दोषपूर्ण और असंवैधानिक कार्रवाई बताते हुए संबंधित अधिकारियों पर पद के दुरुपयोग तथा उत्पीड़न का आरोप लगाया है।
26 अक्टूबर से धरना, आमरण अनशन की चेतावनी
मनमोहन बर्त्वाल ने घोषणा की है कि उनके साथ हुए अन्याय के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ
अनुशासनात्मक कार्रवाई होने तक वह लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जारी रखेंगे।
इसी क्रम में उन्होंने 26 अक्टूबर 2026 से मेडिकल कॉलेज में धरने पर बैठने और आमरण अनशन तक संघर्ष जारी रखने की चेतावनी दी है।
फिलहाल, इस विवाद में बर्त्वाल के अनुबंध, 6 अप्रैल 2022 के संबद्धता आदेश, उनके प्रार्थना पत्रों,
सेवा समाप्ति पत्र और नोटिस संबंधी दस्तावेजों की स्वतंत्र पुष्टि महत्वपूर्ण है।
इन दस्तावेजों से ही कार्रवाई के आधार और अनुबंध की शर्तों के अनुपालन की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
















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