बैंक खाते के संचालन पर भी तय हुई व्यवस्था
श्रीनगर गढ़वाल। श्रीनगर व्यापार सभा में पिछले कुछ समय से चल रहे मतभेदों के बीच हुई बैठक में आय-व्यय के हिसाब और संगठन की आगामी कार्यप्रणाली पर चर्चा हुई।
बैठक में व्यापार सभा भवन की स्थिति सुधारने, पुराने आय-व्यय का हिसाब स्पष्ट करने
और बैंक खाते के संचालन को लेकर सहमति बनाने पर जोर दिया गया।
व्यापारियों ने संगठन की एकजुटता को जरूरी बताया।
अध्यक्ष अनुज जोशी ने बताया, तीनों पदाधिकारियों की सहमति से चलेगा बैंक खाता
व्यापार सभा अध्यक्ष अनुज जोशी ने कहा कि व्यापार सभा भवन में बुलाई गई बैठक सभी पदाधिकारियों की आम सहमति से हुई थी।
इससे पहले कुछ बैठकों की तारीखों को लेकर सभी की सहमति नहीं बन पाई थी।
उन्होंने कहा कि बैठक में व्यापार सभा भवन की बदहाल स्थिति का मुद्दा प्रमुखता से उठा।
भवन की स्थिति सुधारने के लिए काम करने पर सहमति बनी है।
अनुज जोशी ने बताया कि पिछली व्यापार सभा के करीब साढ़े चार साल के कार्यकाल से जुड़े आय-व्यय का हिसाब भी चर्चा में रहा।
बातचीत के दौरान कुछ गर्मागर्मी हुई, लेकिन अंत में वार्ता सकारात्मक रही।
उन्होंने कहा कि जिला अध्यक्ष की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी पर पदाधिकारियों ने सहमति जताई।
साथ ही सोमवार तक व्यापार सभा का बैंक खाता खोलने का निर्णय लिया गया है।
नए खाते से पैसे निकालने की अनुमति तीनों पदाधिकारियों के पास रहेगी। किसी भी निकासी के लिए तीनों की सहमति जरूरी होगी।
अनुज जोशी के अनुसार, इससे भविष्य में अनियमितता की संभावना को कम किया जा सकेगा।

स्वकर के मुद्दे पर 6 अक्टूबर को मंत्री से होगी बैठक
व्यापार सभा अध्यक्ष ने कहा कि उनके सामने व्यापारियों की सबसे बड़ी समस्या स्वकर की है।
नगर निगम की ओर से लगाए जा रहे स्वकर को लेकर व्यापारियों में चिंता है।
उन्होंने बताया कि 6 अक्टूबर को मंत्री श्रीनगर पहुंचेंगे। व्यापार सभा भवन में उनके साथ बैठक प्रस्तावित है।
इसमें व्यापार सभा के सदस्य एकजुट होकर स्वकर पर रोक लगाने की मांग रखेंगे।
अनुज जोशी ने कहा कि मंत्री पहले भी इस मुद्दे को शासन के सामने उठाने की बात कह चुके हैं।

जिलाध्यक्ष वासुदेव कंडारी ने रखा 4.35 लाख रुपये का हिसाब
प्रांतीय उद्योग प्रतिनिधि मंडल के जिलाध्यक्ष वासुदेव कंडारी ने कहा कि व्यापार सभा के 4 लाख 35 हजार 600 रुपये के सदस्यता शुल्क का हिसाब व्यापारियों के सामने रखा गया है।
उन्होंने बताया कि राशि में 10 प्रतिशत प्रदेश और 10 प्रतिशत जिला संगठन को जाता है।
इसके बाद करीब 87 हजार रुपये की कटौती हुई। लगभग 1 लाख 60 हजार रुपये संगठन के कार्यों में खर्च हुए और करीब 69 हजार रुपये चुनाव में खर्च किए गए।
कंडारी के अनुसार, शेष करीब 1 लाख 60 हजार रुपये बैंक में जमा कर दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि बैठक में हिसाब-किताब को लेकर पूरी चर्चा हुई और चल रहा मतभेद भी समाप्त हो गया है।
उन्होंने बताया कि नगर से प्राप्त राशि का एक हिस्सा प्रदेश और जिला संगठन के कार्यों में जाता है।
प्रदेश में 390 इकाइयां हैं और इन इकाइयों से प्राप्त राशि का उपयोग प्रदेश स्तरीय कार्यक्रमों और व्यापारी आंदोलनों में किया जाता है।
पूर्व कार्यकारिणी के संबंध में कंडारी ने कहा कि उनके समय का हिसाब अलग था। 2023 का लेखा-जोखा उनके पास था, जिसे बैठक में स्पष्ट किया गया।
श्रीनगर में विवाद अधिक दिखाई देने के सवाल पर उन्होंने कहा कि श्रीनगर को राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र माना जाता है।
उनके अनुसार अन्य व्यापारिक इकाइयों में ऐसी समस्या नहीं है और हिसाब स्पष्ट होने के बाद स्थिति सामान्य हो गई है।

महासचिव छवि अग्रवाल ने कहा, कुछ बिंदु अभी स्पष्ट होना बाकी
श्रीनगर गढ़वाल व्यापार सभा महासचिव छवि अग्रवाल ने कहा कि पिछले शुक्रवार की बैठक कल्याणेश्वर धर्मशाला में हुई थी।
इसमें व्यापारियों से जुड़े मुद्दों के साथ कॉमर्शियल टैक्स, GST और UPI से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई थी।
उन्होंने बताया कि UPI पर लगने वाले 0.4 प्रतिशत टैक्स का मुद्दा भी बैठक में रखा गया था।
हालांकि, आज की बैठक का मुख्य विषय पूर्व जिला कार्यकारिणी की ओर से प्रस्तुत आय-व्यय का हिसाब रहा।
छवि अग्रवाल ने कहा कि करीब 4 लाख 35 हजार 600 रुपये व्यापारियों से एकत्र हुए थे।
कुल आय-व्यय करीब साढ़े चार से पांच लाख रुपये का था। इसमें करीब 1 लाख 63 हजार रुपये बैंक खाते में जमा थे।
उन्होंने कहा कि इसी हिसाब को लेकर जिला अध्यक्ष से जानकारी मांगी गई थी।
कुछ पहलुओं पर जानकारी मिली है, लेकिन दो-चार बातें अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई हैं।
इन बिंदुओं के स्पष्ट होने के बाद स्थिति और साफ होगी।
शंकर मणि मिश्रा ने पारदर्शिता को बताया जरूरी
व्यापारी शंकर मणि मिश्रा ने कहा कि व्यापार सभा में एकजुटता सबसे जरूरी है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2007 से हिसाब-किताब और IMF को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पुराने विवाद खत्म कर नए सिरे से शुरुआत करना गलत नहीं है, लेकिन इसके लिए पारदर्शिता जरूरी है।
भुगतान चेक के माध्यम से हो और संगठन का पैसा बैंक खाते में रखा जाए, तो आरोपों की गुंजाइश कम होगी।
करीब 40 वर्षों के अनुभव का हवाला देते हुए शंकर मणि मिश्रा ने कहा कि तीनों लोग मिलकर
व्यापार सभा चलाएं और अच्छी कार्यकारिणी बनाएं, तो व्यापारी एकजुट हो सकते हैं।
उन्होंने उम्मीद जताई कि बैठक के बाद तीनों पक्षों के बीच विवाद खत्म होगा और व्यापार सभा व्यापारी हित में काम करेगी।
व्यक्तिगत हितों के संगठन पर हावी होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि पदाधिकारियों को
व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर पूरे व्यापारी वर्ग के हित को प्राथमिकता देनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि व्यापारी एकजुट रहेंगे, तभी टैक्स और अन्य मुद्दों पर सरकार के सामने सामूहिक रूप से अपनी बात मजबूती से रख पाएंगे।
एकजुट होकर काम करने पर जोर
छवि अग्रवाल ने कहा कि किसी भी संगठन की ताकत उसकी एकजुटता में होती है।
उन्होंने कहा कि बैठक में अध्यक्ष, कोषाध्यक्ष और वह स्वयं मौजूद रहे। विस्तारित कार्यकारिणी के सदस्य भी बैठक में शामिल हुए।
उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में पूरी कार्यकारिणी मिलकर काम करेगी। इससे व्यापारियों के हितों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाने में मदद मिलेगी।















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