रीजनल रिपोर्टर

सरोकारों से साक्षात्कार

गिर्दा के गीतों में गिर्दामय हुआ उत्तराखंड

चाहे हम नि ल्यै सकूँ चाहे तुम नि लै सकौ,मगर क्वे न क्वे तो ल्यालो उदिन यो दुनी में…..”गिर्दा” देहरादून,…

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जनकवि ‘गिर्दा’ की यादें-कुछ नई अनकही कहानी-किस्से नैनीताल से

रेशमा पंवार उत्तराखण्ड की सामाजिक, सांस्कृतिक पत्रिका ‘पहाड़’ का अंक 19 को पढ़ा था जिसे पढ़कर हमने गिर्दा को जाना।…

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