'Girda's' death anniversary organized at Press Club Bageshwar
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चाहे हम नि ल्यै सकूँ चाहे तुम नि लै सकौ,मगर क्वे न क्वे तो ल्यालो उदिन यो दुनी में…..”गिर्दा” देहरादून,…
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रेशमा पंवार उत्तराखण्ड की सामाजिक, सांस्कृतिक पत्रिका ‘पहाड़’ का अंक 19 को पढ़ा था जिसे पढ़कर हमने गिर्दा को जाना।…
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अरुण कुकसाल लगता है, अपनी रोशनी विहीन मां से दव्रित होकर ‘गिर्दा’ ने अपने आस-पास के मानवीय समाज को अन्तःमन…
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