मोदी कैबिनेट ने शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव को दी मंजूरी
केंद्र सरकार ने उच्च शिक्षा प्रणाली में ऐतिहासिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया (HECI) बिल को मंजूरी दे दी है,
जिसका नाम बदलकर अब ‘विकसित भारत शिक्षा अधीक्षण विधेयक’ कर दिया गया है।
यह विधेयक संसद के मौजूदा शीतकालीन सत्र में पेश किया जाएगा।
इसके कानून बनने के बाद देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
क्या होगा बड़ा बदलाव
विधेयक के पारित होने के बाद उच्च शिक्षा से जुड़ी मौजूदा संस्थाएं UGC, AICTE और NCTE समाप्त हो जाएंगी।
इनके स्थान पर एक सिंगल यूनिफाइड रेगुलेटर बनाया जाएगा,
जो पूरे देश में कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के लिए नियम तय करेगा।
क्यों जरूरी बताया गया यह फैसला
यह फैसला राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की सिफारिशों के अनुरूप है।
नीति में कहा गया था कि अलग-अलग नियामक संस्थाओं के कारण नियम जटिल हो गए हैं,
जिससे शिक्षा संस्थानों पर अनावश्यक दबाव पड़ता है। एक ही संस्था होने से प्रक्रिया सरल और पारदर्शी होगी।
नई संस्था क्या करेगी
नई संस्था कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के लिए
- शैक्षणिक मानक तय करेगी
- मान्यता (Accreditation) देगी
- पढ़ाई और गुणवत्ता से जुड़े नियम बनाएगी
हालांकि, मेडिकल और लॉ कॉलेज इसके दायरे में नहीं आएंगे।
क्या नहीं बदलेगा
सरकार ने साफ किया है कि नई संस्था के पास फंड देने या आर्थिक सहायता देने का अधिकार नहीं होगा।
फंडिंग से जुड़े फैसले पहले की तरह संबंधित मंत्रालय ही लेंगे।
अब तक कैसे चलती थी व्यवस्था
- UGC: सामान्य (गैर-तकनीकी) उच्च शिक्षा
- AICTE: इंजीनियरिंग और तकनीकी शिक्षा
- NCTE: शिक्षक प्रशिक्षण और शिक्षा
नई व्यवस्था में इन सभी जिम्मेदारियों को एक ही संस्था के तहत लाया जाएगा।
विपक्ष की आपत्ति
विपक्षी दलों ने इस विधेयक पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इससे निजीकरण को बढ़ावा मिल सकता है
और ग्रामीण क्षेत्रों के छोटे शिक्षण संस्थानों पर दबाव बढ़ सकता है।
सरकार का दावा है कि यह सुधार शिक्षा की गुणवत्ता, जवाबदेही और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को मजबूत करेगा।

















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