18 दायित्वधारियों की भूमिका पर कांग्रेस ने उठाए सवाल
उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच भाजपा ने प्रदेश की सभी 70 विधानसभा सीटों पर प्रभारियों की नियुक्ति कर दी है।
इन नियुक्तियों के बाद अब सरकार और पार्टी संगठन की जिम्मेदारियों को लेकर राजनीतिक बहस शुरू हो गई है।
भाजपा के विधानसभा प्रभारियों में 18 ऐसे नेता शामिल हैं, जिन्हें राज्य सरकार में दायित्वधारी मंत्री का दर्जा मिला हुआ है।
कांग्रेस ने इस पर सवाल उठाते हुए दायित्वधारियों को सरकारी पदों से हटाने की मांग की है।
कांग्रेस का सवाल है कि सरकार से गाड़ी, मानदेय और अन्य सुविधाएं प्राप्त करने वाले नेता
यदि पार्टी के चुनावी कार्यक्रमों और संगठनात्मक गतिविधियों में भी जिम्मेदारी निभाते हैं,
तो सरकारी संसाधनों और पार्टी के कामकाज के बीच अंतर कैसे सुनिश्चित किया जाएगा।
भाजपा के 18 दायित्वधारी नेताओं को मिली विधानसभा प्रभारी की जिम्मेदारी
भाजपा ने प्रदेश की सभी 70 विधानसभा सीटों पर संगठनात्मक गतिविधियों को गति देने के लिए प्रभारियों की नियुक्ति की है।
इनमें सरकार में दायित्वधारी मंत्री का दर्जा प्राप्त 18 नेताओं को भी जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इन नेताओं में जगत सिंह चौहान, रामचंद्र गौड़, ऋषि प्रसाद सती, जोत सिंह बिष्ट, बच्चन सिंह पवार, मधु भट्ट,
अभिषेक शाही, भुवन विक्रम डबराल, अनुराधा वालिया, शोभाराम प्रजापति, नितिन गौतम, विशाल गुप्ता,
जयपाल चौहान, श्यामवीर सैनी, विजय कपरवान, श्याम नारायण पांडे, सुभाष बगौली और दीपक मेहरा शामिल हैं।
इन नियुक्तियों के बाद सवाल उठ रहे हैं कि सरकारी जिम्मेदारियों के साथ पार्टी संगठन के कामकाज में उनकी भूमिका किस तरह तय होगी।
साथ ही, सरकारी सुविधाओं के इस्तेमाल और संगठनात्मक गतिविधियों के खर्च की व्यवस्था को लेकर भी स्पष्टता की जरूरत बताई जा रही है।
भाजपा ने कहा- सरकार के कामों को आगे बढ़ाना भी जिम्मेदारी
भाजपा ने दायित्वधारियों को संगठन में जिम्मेदारी दिए जाने का बचाव किया है।
पार्टी के प्रदेश प्रभारी मनवीर सिंह चौहान के मुताबिक, दायित्वधारी नेता संगठन से ही जुड़े हैं और उनका काम सरकार के बेहतर कार्यों को आगे बढ़ाना भी है।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार से जुड़े नेताओं को संगठन की ओर से भी कोई जिम्मेदारी दी जाती है,
तो इसमें परेशानी नहीं होनी चाहिए।
भाजपा के इस पक्ष के बीच बहस का प्रमुख मुद्दा यह है कि सरकारी पद पर रहते हुए निर्धारित जिम्मेदारियों और पार्टी के चुनावी कार्यों के बीच व्यावहारिक अंतर कैसे बनाए रखा जाएगा।
कांग्रेस ने की दायित्वधारियों को पद से हटाने की मांग
भाजपा की नियुक्तियों पर कांग्रेस ने सरकारी धन और सुविधाओं के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए हैं।
कांग्रेस का कहना है कि सरकार से गाड़ी, मानदेय और अन्य सुविधाएं प्राप्त करने वाले दायित्वधारियों को पार्टी के संगठनात्मक और चुनावी कामों में लगाने से जवाबदेही का सवाल खड़ा होता है।
कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता अमरेंद्र बिष्ट ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकारी संसाधनों का उपयोग संगठन के कामों में करवा रही है।
उन्होंने कहा कि यदि इन दायित्वधारियों से पार्टी संगठन का काम लिया जाना है, तो उन्हें सरकारी पदों से हटा देना चाहिए।
कांग्रेस की मांग है कि सरकारी पदों पर बने रहने के दौरान नेताओं की जिम्मेदारियां स्पष्ट की जाएं
और यह सुनिश्चित किया जाए कि सरकारी सुविधाओं का इस्तेमाल राजनीतिक गतिविधियों के लिए न हो।
सरकारी सुविधाओं और पार्टी के कामकाज के बीच अंतर पर बहस
इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल सरकारी जिम्मेदारियों और पार्टी संगठन के कामकाज के बीच स्पष्ट अंतर का है।
दायित्वधारियों को सरकार की ओर से मिलने वाली सुविधाओं का उद्देश्य उनकी निर्धारित सरकारी जिम्मेदारियों के निर्वहन से जुड़ा है।
हालांकि, केवल विधानसभा प्रभारी बनाए जाने से सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि नहीं होती।
इसके लिए यह देखना जरूरी होगा कि सरकारी वाहनों, कर्मचारियों, धन और अन्य सुविधाओं का वास्तविक इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा है।
फिलहाल भाजपा की नियुक्तियों को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं, जबकि भाजपा ने संगठनात्मक जिम्मेदारी सौंपने को उचित बताया है।
ऐसे में सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल और दायित्वधारियों की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।















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