आज खुलेगी पाताल भुवनेश्वर गुफा
उत्तराखंड में रविवार, 11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हो गई है।
देवभूमि के प्रसिद्ध देवी मंदिरों में इन नौ दिनों के दौरान श्रद्धालु पूजा-अर्चना और दर्शन के लिए पहुंचेंगे।
हरिद्वार की मनसा देवी और चंडी देवी से लेकर पौड़ी की ज्वाल्पा देवी,
श्रीनगर की धारी देवी और पिथौरागढ़ की हाट कालिका तक, प्रदेश में देवी उपासना की समृद्ध परंपरा है।
इसी बीच पिथौरागढ़ जिले में स्थित प्रसिद्ध पाताल भुवनेश्वर गुफा के भी करीब
दो महीने बाद श्रद्धालुओं के लिए फिर खुलने की तैयारी है।
मंदिर समिति के अनुसार, नवरात्रि के पहले दिन संभावित भीड़ को देखते हुए व्यवस्थाएं की गई हैं।
गुफा के भीतर ऑक्सीजन की कमी होने की स्थिति में ऑक्सीजन कंसंट्रेटर मशीन लगाने की भी बात कही गई है।
उत्तराखंड के प्रमुख देवी मंदिर, जहां नवरात्रि में पहुंचते हैं श्रद्धालु
गढ़वाल के प्रसिद्ध देवी धाम
- धारी देवी मंदिर, श्रीनगर गढ़वाल: पौड़ी और रुद्रप्रयाग के बीच अलकनंदा नदी के तट पर स्थित धारी देवी मंदिर गढ़वाल के प्रमुख आस्था स्थलों में शामिल है। चारधाम यात्रा मार्ग से जुड़े इस मंदिर में वर्षभर श्रद्धालु पहुंचते हैं।
- ज्वाल्पा देवी मंदिर, पौड़ी गढ़वाल: नयार नदी क्षेत्र में स्थित यह मंदिर मां ज्वाल्पा को समर्पित है। नवरात्रि के दौरान यहां पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालु पहुंचते हैं।
- चंद्रबदनी देवी मंदिर, टिहरी गढ़वाल: चंद्रकूट पर्वत पर स्थित यह मंदिर देवी उपासना का प्रमुख केंद्र है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह स्थान माता सती से जुड़ा शक्तिपीठ है।
- सुरकंडा देवी मंदिर, टिहरी गढ़वाल: धनोल्टी क्षेत्र के पास स्थित सुरकंडा देवी मंदिर अपनी पहाड़ी स्थिति और धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को पैदल मार्ग भी तय करना पड़ता है।
- कालीमठ मंदिर, रुद्रप्रयाग: केदारनाथ क्षेत्र के निकट स्थित कालीमठ मंदिर मां काली की उपासना के लिए प्रसिद्ध है। धार्मिक परंपरा में इस स्थान को विशेष महत्व दिया जाता है।
कुमाऊं के प्रसिद्ध देवी मंदिर
- हाट कालिका मंदिर, गंगोलीहाट: पिथौरागढ़ जिले में स्थित हाट कालिका मंदिर मां महाकाली को समर्पित है। यहां कुमाऊं और दूसरे क्षेत्रों से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
- पाताल भुवनेश्वर गुफा, गंगोलीहाट: चूना पत्थर से बनी प्राकृतिक गुफा धार्मिक आस्था और भूगर्भीय संरचनाओं के लिए प्रसिद्ध है। स्कंद पुराण के मानसखंड में भी इस क्षेत्र का धार्मिक महत्व बताया गया है। करीब दो महीने बंद रहने के बाद इसके दोबारा खुलने से श्रद्धालुओं और स्थानीय पर्यटन कारोबार को राहत मिलने की उम्मीद है।
- मां पूर्णागिरि मंदिर, चंपावत: टनकपुर के पास अन्नपूर्णा पर्वत क्षेत्र में स्थित पूर्णागिरि मंदिर उत्तराखंड के प्रमुख शक्तिधामों में गिना जाता है। यहां विशेष रूप से चैत्र नवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
- नंदा देवी मंदिर, अल्मोड़ा: अल्मोड़ा शहर में स्थित नंदा देवी मंदिर कुमाऊं की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा से गहराई से जुड़ा है। मां नंदा को क्षेत्र की आराध्य देवी के रूप में पूजा जाता है।
- नैना देवी मंदिर, नैनीताल: नैनी झील के उत्तरी किनारे पर स्थित यह मंदिर मां नैना देवी को समर्पित है। नैनीताल आने वाले पर्यटकों के साथ श्रद्धालुओं के लिए भी यह प्रमुख धार्मिक स्थल है।
- कसार देवी मंदिर, अल्मोड़ा: अल्मोड़ा के पास पहाड़ी पर स्थित कसार देवी मंदिर धार्मिक आस्था और शांत प्राकृतिक वातावरण के लिए जाना जाता है। यहां वर्षभर पर्यटकों और श्रद्धालुओं का आना-जाना रहता है।
- वाराही देवी मंदिर, देवीधुरा, चंपावत: देवीधुरा स्थित यह मंदिर मां वाराही को समर्पित है। मंदिर क्षेत्र में आयोजित होने वाला बग्वाल मेला भी अपनी विशिष्ट परंपरा के लिए प्रसिद्ध है।
- गर्जिया देवी मंदिर, रामनगर: नैनीताल जिले में कोसी नदी के बीच चट्टान पर स्थित गर्जिया देवी मंदिर कुमाऊं के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में शामिल है। यहां श्रद्धालु मंदिर तक पहुंचने के लिए पुल पार कर सीढ़ियां चढ़ते हैं।
हरिद्वार के प्रमुख शक्तिधाम
- मनसा देवी मंदिर: हरिद्वार के बिल्व पर्वत पर स्थित मनसा देवी मंदिर पंचतीर्थों में शामिल है। नवरात्रि में यहां दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ती है।
- चंडी देवी मंदिर: नील पर्वत पर स्थित चंडी देवी मंदिर हरिद्वार के प्रमुख देवी धामों में से एक है। मनसा देवी मंदिर के साथ इसे शहर के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में गिना जाता है।
- माया देवी मंदिर: हरिद्वार शहर में स्थित माया देवी मंदिर प्राचीन धार्मिक महत्व रखता है। इसे शक्तिपीठ परंपरा से जुड़ा प्रमुख मंदिर माना जाता है।
नवरात्रि में धार्मिक पर्यटन को मिलेगी गति
नवरात्रि के दौरान देवी मंदिरों में दर्शन के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालुओं से स्थानीय पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलता है।
होटल, होमस्टे, टैक्सी संचालक, दुकानदार और अन्य छोटे कारोबारी धार्मिक यात्राओं से जुड़े रहते हैं।
पाताल भुवनेश्वर गुफा के दोबारा खुलने से गंगोलीहाट और आसपास के क्षेत्रों में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने की उम्मीद है।
हालांकि, श्रद्धालुओं को यात्रा से पहले संबंधित मंदिर की खुलने की स्थिति, सड़क मार्ग और स्थानीय व्यवस्थाओं की जानकारी लेनी चाहिए।
उत्तराखंड के ये देवी धाम धार्मिक मान्यताओं के साथ प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन पहचान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों में इन मंदिरों में पूजा-अर्चना के साथ श्रद्धालुओं की आस्था और क्षेत्रीय परंपराओं की झलक देखने को मिलेगी।
















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