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सरोकारों से साक्षात्कार

देहरादून में SIR के विरोध में प्रदर्शन, पुलिस से भिड़ंत

ज्ञापन देने से पहले आंदोलनकारी हिरासत में

उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और प्री-SIR प्रक्रिया के विरोध में सोमवार, 12 अक्टूबर को देहरादून में नागरिक मार्च निकाला गया।

वर्ष 2026 की SIR प्रक्रिया रद्द करने और मतदाता सूची से हटाए गए नामों को बहाल करने की मांग को लेकर

विभिन्न सामाजिक, महिला, छात्र और जन संगठनों के प्रतिनिधि सड़कों पर उतरे।

मार्च जब सचिवालय स्थित मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय की ओर बढ़ा, तो पुलिस ने उसे रोक दिया।

इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई।

पुलिस आंदोलनकारियों को हिरासत में लेकर बसों से ले गई। इसके चलते प्रदर्शनकारी मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन नहीं सौंप सके।

गांधी पार्क से सचिवालय तक मार्च, पुलिस ने रास्ते में रोका

नागरिक मार्च का आयोजन उत्तराखंड इंसानियत मंच और उत्तराखंड महिला मंच के नेतृत्व में किया गया।

इसमें अग्रगामी छात्र नौजवान सभा, स्त्री मुक्ति लीग संगठन, BGVS, जनवादी महिला संगठन, जन संवाद,

AIDSO, SFI, महिला एकता केंद्र, इप्टा सहित अन्य जन संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

विभिन्न चुनावी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि भी मार्च में शामिल हुए।

मार्च गांधी पार्क से शुरू होकर सचिवालय स्थित मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय की ओर बढ़ा।

सचिवालय के निकट भारी पुलिस बल ने प्रदर्शनकारियों को रोक दिया।

आयोजकों के अनुसार, इस दौरान पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच धक्का-मुक्की और हाथापाई हुई।

पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को बसों तक पहुंचाया और हिरासत में ले लिया।

हिरासत में लिए गए प्रमुख लोगों में कमला पंत, निर्मला बिष्ट और डॉ. रवि चोपड़ा शामिल थे।

आंदोलनकारियों का कहना है कि उन्हें ज्ञापन सौंपने तक का अवसर नहीं दिया गया।

17.05 लाख नाम हटाने पर उठाए सवाल

प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने पर चिंता जताई।

प्रस्तावित ज्ञापन में दावा किया गया कि उत्तराखंड में प्री-SIR और SIR प्रक्रिया के दौरान लगभग 17.05 लाख नाम हटाए गए, जबकि करीब 4.01 लाख नाम जोड़े गए।

संगठनों ने वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव की मतदाता सूची की तुलना में मतदाताओं की संख्या में आई कमी पर सवाल उठाए।

उन्होंने पूछा कि नाम हटाने से पहले मतदाताओं से संपर्क करने, उनकी पात्रता का सत्यापन करने और उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर देने के लिए क्या कदम उठाए गए।

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि मतदान का अधिकार लोकतंत्र की बुनियाद है।

मतदाता सूची में नाम दर्ज होना इस अधिकार के इस्तेमाल की पहली शर्त है।

ऐसे में पुनरीक्षण प्रक्रिया का उद्देश्य सूची को सटीक और पारदर्शी बनाना होना चाहिए, न कि पात्र नागरिकों को मतदान के अधिकार से वंचित करना।

SIR रद्द करने और हटाए गए नाम बहाल करने की मांग

आंदोलनकारियों ने वर्ष 2026 की SIR प्रक्रिया रद्द करने और वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में

इस्तेमाल की गई मतदाता सूची को आधार बनाकर नागरिकों के मताधिकार की रक्षा करने की मांग की।

उनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:

  • वर्ष 2026 की SIR प्रक्रिया रद्द की जाए।
  • प्री-SIR के दौरान हटाए गए नामों की स्वतंत्र जांच कराई जाए।
  • गलत तरीके से हटाए गए पात्र मतदाताओं के नाम बहाल किए जाएं।
  • नाम हटाने से पहले संबंधित मतदाताओं को सूचना और सुनवाई का अवसर दिया जाए।
  • सभी जिलों और विधानसभा क्षेत्रों में बूथ स्तर पर शिकायत निवारण शिविर लगाए जाएं।
  • मतदाता सूची का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए।
  • शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण हो और नागरिकों को अनावश्यक कार्यालयी प्रक्रियाओं से राहत मिले।

ज्ञापन सौंपे बिना हिरासत में लिए जाने पर नाराजगी

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अनुपस्थिति, स्थान परिवर्तन की आशंका या सत्यापन में कठिनाई मात्र के आधार पर

निर्धारित प्रक्रिया और उचित जांच के बिना किसी नागरिक का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जाना चाहिए।

संगठनों ने निर्वाचन अधिकारियों से मतदाता सूची में नाम हटाए जाने के मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की।

उनका कहना है कि नागरिकों के मताधिकार से जुड़े सवालों का जवाब दिया जाना चाहिए और शिकायतों के समाधान के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।

हालांकि, मार्च के दौरान प्रदर्शनकारी मुख्य निर्वाचन अधिकारी को अपना ज्ञापन नहीं सौंप सके।

पुलिस की कार्रवाई के बाद आंदोलनकारियों ने मताधिकार की रक्षा, हटाए गए नामों की बहाली और वर्ष 2026 की SIR प्रक्रिया रद्द करने की मांग दोहराई।

https://youtu.be/2GhRDtqQKaw?si=uRkBgAzrlaQU1XA1
https://regionalreporter.in/uttarakhand-e-challan-pending-fine-recovery/
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