15 जुलाई की दोपहर उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के थल क्षेत्र में एक भीषण सड़क हादसा हुआ। यात्रियों से भरा एक मैक्स वाहन मुवानी पुल के पास अनियंत्रित होकर करीब 150 फीट गहरी खाई में गिर गया।
इस हादसे में बोकटा गांव के 8 लोगों की मौत हो गई और 6 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे ने पूरे गांव को शोक में डुबो दिया।
हादसा उस वक्त हुआ जब गांव के लोग देवलथल के मुवानी क्षेत्र से वापस बोकटा लौट रहे थे। पहाड़ी मोड़ पर वाहन का संतुलन बिगड़ गया और वह सीधे नदी की ओर गहरी खाई में गिर गया। राहत व बचाव दल तुरंत मौके पर पहुंचे लेकिन तब तक कई लोगों ने दम तोड़ दिया था।
इस दर्दनाक दुर्घटना में तीन स्कूली छात्राओं की भी मौत हुई, जो रोज की तरह पढ़ाई के बाद घर लौट रही थीं। बाकी मृतकों में बुजुर्ग, महिलाएं और वाहन चालक शामिल हैं।
मृतकों की सूची
- सिमरन, पुत्री कुंदन सिंह (8 वर्ष)
- तनुजा, पुत्री चंद्र सिंह (15 वर्ष)
- विनीता, पुत्री चंद्र सिंह (14 वर्ष)
- नरेंद्र सिंह, पुत्र चंद्र सिंह (40 वर्ष) — वाहन चालक
- राजेंद्र सिंह, पुत्र किशन सिंह (60 वर्ष)
- होशियार सिंह, पुत्र भीम सिंह (65 वर्ष)
- शांति देवी, पुत्री केशर राम (50 वर्ष)
- दिकभा, पत्नी पंकज सिंह (28 वर्ष)
घायलों का इलाज जारी
छह घायल लोगों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। जिलाधिकारी विनोद गोस्वामी ने अस्पताल पहुंचकर घायलों से मुलाकात की और इलाज में कोई कमी न रहे, इसका निर्देश भी दिया।
घायलों की सूची
- योगेश कुमार (21 वर्ष)
- श्याम सिंह (50 वर्ष)
- कल्याण सिंह (55 वर्ष)
- सुमित सिंह (22 वर्ष)
- पूजा
- विनीता, पुत्री पूरन बहादुर (20 वर्ष)
(सभी निवासी: बोकटा, पिथौरागढ़)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हादसे पर गहरा दुख जताया और मृतकों के परिजनों को ₹2 लाख तथा घायलों को ₹30 हजार प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से देने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी राज्य सरकार की ओर से मृतकों को ₹2 लाख और घायलों को ₹50 हजार की मदद देने का ऐलान किया।
जिलाधिकारी ने हादसे की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही संबंधित विभागों को सुरक्षा संकेतक, चेतावनी बोर्ड और सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
बोकटा गांव में पसरा सन्नाटा
हर गली, हर घर इस हादसे से जुड़ा हुआ है। कोई बेटी खो चुका है, कोई पिता, कोई दादा। एक साथ आठ अर्थियां उठना किसी छोटे से गांव के लिए कितना बड़ा दर्द होता है — यह बोकटा आज महसूस कर रहा है। गांव की हर आंख नम है और हर दिल डरा हुआ।

















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