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चर्चा में है गढ़वाल विवि का मास कॉम विभाग

विभाग के निदेशक पर एसोसिएट प्रोफेसर ने लगाए उत्पीडन के आरोप

हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के मास कम्युनिकेशन विभाग इन दिनों चर्चा में है। इस विभाग के निदेशक डा.सुधांशु जायसवाल पर पद के दुरूपयोग तथा अन्य तरीकों से मानसिक उत्पीड़न का आरोप विभाग में तैनात एसोसिएट प्रोफेसर ने लगाए हैं।

अपनी शिकायत शिक्षिका डा.अमिता ने विवि अनुदान आयोग नई दिल्ली, राष्ट्रीय महिला आयोग, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, विवि के कुलपति प्रो.एमएस रौथाण समेत विवि की आंतरिक शिकायत समिति ;आईसीसीद्धसे भी की है।

हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विवि के मास काॅम विभाग में तैनात निदेशक डा.सुधांशु जायसवाल अक्सर अपने विद्यार्थियों के बीच चर्चा का विषय बने रहे हैं।

विद्यार्थियों की ओर से कथित रूप से उन पर कई तरह के आरोप फिजाओं में तैरते रहे हैं, लेकिन 32 वर्षों से गढ़वाल विवि में अपने पैर मजबूती से जमाए हुए एसोसिएट प्रोफेसर डा.सुधांशु जायसवाल की मनमानियों तथा उत्पीड़न के खिलाफ उन्हीं के विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डा.अमिता ने मोर्चा खोल लिया है।

ये हैं आरोप

13 सितंबर 2024 को नियुक्त हुई एसोसिएट प्रोफसर डा.अमिता ने आरोप लगाया है कि डा.सुधांशु जायसवाल उन्हें निरन्तर किसी न किसी तरह मानसिक प्रताड़ना दे रहे हैं।

उन्होंने अपनी लिखित शिकायत में कहा है कि मार्च माह में पांच दिन के अवकाश में जाने पर उनका 50 प्रतिशत से अधिक वेतन काट दिया गया। हालांकि उनकी लिखित शिकायत के बाद 16 मई को काटे गए वेतन का भुगतान उन्हें कर दिया गया है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि डा.सुधांशु जायसवाल उनके कार्यों में अनावश्यक दखल, अन्य शिक्षक साथियों तथा स्टाफ पर यह दबाव बनाना कि डा.अमिता को किसी तरह का सहयोग न किया जाए, लगातार पीछा करते हैं तथा जहां खाना खाने जाती हूं, वहां भी पूछताछ करते पाया गया।

इन आरोपों के संदर्भ में विभाग के निदेशक डा.सुधांशु का कहना है कि उन्होंने विवि की व्यवस्थाओं के अनुरूप एक सिस्टम से कार्य किया है। अन्य आरोपों पर उन्होंने कुछ भी कहने से इंकार किया।

इस तरह हो रहा संविदाकर्मियों का उत्पीड़न

मास काॅम विभाग में तैनात निदेशक की मनमानी का यह हाल है कि डा.अमिता को लिफ्ट देने पर वहां तैनात कैमरा संचालिका अरूणा रौथाण को नौकरी से हाथ धो देने की धमकी मिल गई है। अपनी इस धमकी को अमलीजामा पहनाने के लिए उन्होंने कुलपति तथा आउटसोर्स एजेंसी को अरुणा के खिलाफ शिकायती पत्र भेजे गए हैं।

पत्र में यह कहा गया है कि उनके विभाग को कैमरा संचालक अरुणा की आवश्यकता नहीं है। डिजिटल युग में पत्रकारिता एवं जन संचार जैसे विभाग में कैमरा संचालक की जरूरत न होने की बात विभाग के निदेशक द्वारा कहा जाना आश्चर्यचकित करता है।

यह घटना यह भी इशारा करती है कि 16 वर्षों से एक ही संस्थान में काम रहे कर्मी पर यदि विभाग का निदेशक का चाहे, तो एक पत्र लिखकर उसके रोजगार पर लात मार सकता है।

यह घटना विभाग के निदेशक की मनमानी की ओर भी इशारा करती है। यह कहा जा सकता है कि 16 वर्षों से पत्रकारिता एवं जन संचार विभाग में तैनात कर्मी अरुणा को बेवजह अपने अहं की संतुष्टि के लिए बलि का बकरा बनाया जा रहा है।

अरुणा ने असिस्टेंट प्रोफेसर डा.हर्षवर्धनी एवं केंद्र निदेशक डा.सुधांशु जायसवाल पर अभद्रता के आरोप लगाए हैं, जिसकी लिखित शिकायत उन्होंने कुलपति से की है।

असिस्टेंट प्रोफेसर डा.हर्षवर्धनी ने भी अरुणा पर अभद्रता के आरोप लगाए हैं, जबकि विभाग की ओर से अरुणा को समय-समय पर दिए गए चरित्र प्रमाण पत्रों में शालीन, शिष्ट तथा मेहनती कर्मी तथा उत्तम चरित्र की बताया गया है।

आंतरिक शिकायत समिति कर रही जांच

कुलपति प्रो.एम एस रौथाण ने कहा कि यह मामला उनके संज्ञान में है। डा.अमिता को उनके आवेदन पर अवकाश के लिए अप्रूवल दे दिया गया था। दोनों शिकायतों के मामले में आंतरिक शिकायत समिति जांच कर रही है। उनकी रिपोर्ट के आधार पर ही कार्रवाई की जाएगी।

सात वर्षों में आए छह मामले विवि सेक्सवल ह्रासमेट सेल की इंटरनल कंप्लेन कमेटी के पास बीते छह वर्षों में छह मामले दर्ज हुए हैं। जिसमें से वर्ष 2021 से 2024 तक कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है। हालांकि कोरोनाकाल यानि वर्ष 2020-21 में भी यहां एक शिकायत इंटरनल कंप्लेन कमेटी को मिली है।

इसके अलावा वर्ष 2017-18 में 02 मामले, वर्ष 2019-20 एवं 20-21 में एक-एक मामला तथा 2024-25 में अब तक दो मामले दर्ज हो चुके हैं। ये दोनों मामले पत्रकारिता एवं जन संचार केंद्र से जुड़े हुए हैं।

आंतरिक कमेटी ने किया तलब

आंतरिक कमेटी की अध्यक्ष प्रो.मोनिका गुप्ता ने कहा कि इस तरह का मामला आंतरिक कमेटी के पास पहली बार आया है, जिसमें एक ही विभाग के शिक्षक आपस में झगड़ रहे हों। उन्होंने कहा कि इस मामले में एक बार की सुनवाई हो गई है। सोमवार को पुनः इस मामले पर विभिन्न पक्षों की बात सुनी जाएगी।

90 दिन के भीतर यूजीसी को मामले की कार्रवाही के संदर्भ में जानकारी देनी होती है। अपनी कार्रवाही समर्थ पोर्टल से यूजीसी के लिए कमेटी नियत समय में भेज देगी।

https://regionalreporter.in/supreme-court-decision-on-recruitment-in-judicial-service/
https://youtu.be/jGaRHT7bFcw?si=RULxjptk3glKQfu7
Ganga Ansora
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