रीजनल रिपोर्टर

सरोकारों से साक्षात्कार

ISRO को बड़ा झटका: PSLV-C62 मिशन विफल

तीसरे चरण में रास्ता भटका रॉकेट

PSLV-C62 Mission Failure: तीसरे चरण में गड़बड़ी से सैटेलाइट कक्षा में स्थापित नहीं हो सके

भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को सोमवार को उस वक्त बड़ा झटका लगा,

जब भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का PSLV-C62 मिशन सफल नहीं हो सका।

12 जनवरी 2026 को लॉन्च किए गए इस मिशन में दूसरे चरण तक सब कुछ सामान्य रहा,

लेकिन तीसरे चरण में रॉकेट के रास्ता भटकने से सैटेलाइट निर्धारित कक्षा में स्थापित नहीं हो पाए।

प्रारंभिक आकलन में मिशन के तहत भेजे गए सभी 16 सैटेलाइट्स के नुकसान की आशंका जताई जा रही है।

तीसरे चरण में आई तकनीकी गड़बड़ी

ISRO की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, PSLV-C62 ने लॉन्च के बाद

तय कार्यक्रम के अनुसार कार्य किया, लेकिन PS3 (तीसरे चरण) के अंतिम हिस्से में रॉकेट ने अपनी दिशा बदल ली। इसके चलते सैटेलाइट सेपरेशन संभव नहीं हो सका।

ISRO प्रमुख डॉ. वी. नारायणन ने बयान जारी कर कहा कि मिशन से जुड़े सभी

टेलीमेट्री और फ्लाइट डाटा का गहन विश्लेषण किया जा रहा है और विस्तृत रिपोर्ट के बाद ही अंतिम निष्कर्ष साझा किया जाएगा।

कमांड सेंटर में थमा डेटा, बढ़ी चिंताएं

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जैसे ही रॉकेट ने दूसरा चरण पूरा किया, उसके बाद कमांड सेंटर में डाटा आना बंद हो गया।

कुछ ही क्षणों में मिशन कंट्रोल में चिंता का माहौल बन गया। बाद में पुष्टि हुई कि तीसरे चरण के अंत में तकनीकी असामान्यता सामने आई है।

ISRO ने शुरू की विस्तृत जांच

ISRO ने स्पष्ट किया है कि PSLV-C62 मिशन में PS3 स्टेज के अंत में आई गड़बड़ी

की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।

विशेषज्ञ यह जानने का प्रयास कर रहे हैं कि क्या यह समस्या प्रोपल्शन, गाइडेंस सिस्टम या कंट्रोल लॉजिक से जुड़ी थी।

यह रॉकेट आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सुबह 10:17 बजे लॉन्च किया गया था।

EOS-N1 (अन्वेषा) सैटेलाइट पर टिकी थीं उम्मीदें

इस मिशन की सबसे अहम पेलोड DRDO द्वारा विकसित EOS-N1 (अन्वेषा) सैटेलाइट थी।

इसे एक अत्याधुनिक हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग सैटेलाइट माना जा रहा था, जिसे ‘दिव्य दृष्टि’ भी कहा जाता है।

इस सैटेलाइट के जरिए:

  • किसी भी वस्तु की बेहद स्पष्ट तस्वीर
  • रंगों के साथ-साथ केमिकल फीचर्स का विश्लेषण
  • मिट्टी की नमी, फसल स्वास्थ्य (Crop Health) और पर्यावरणीय बदलावों का अध्ययन

संभव होना था। इसके अलावा मिशन में 15 अन्य घरेलू और अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के सैटेलाइट भी शामिल थे।

भारत की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं को झटका

PSLV को ISRO का सबसे भरोसेमंद लॉन्च व्हीकल माना जाता रहा है।

ऐसे में PSLV-C62 मिशन की असफलता को भारत की अंतरिक्ष योजनाओं और

वाणिज्यिक लॉन्च विश्वसनीयता के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि ISRO का ट्रैक रिकॉर्ड मजबूत रहा है

और इस असफलता से सीख लेकर भविष्य के मिशनों को और अधिक सुरक्षित बनाया जाएगा।

https://regionalreporter.in/kashipur-farmer-suicide-case/
https://youtu.be/3bBRMTMnN9E?si=Hv-NRkWaUvAV9lqF
Website |  + posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: