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उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोकगायक दीवान कनवाल का निधन

अल्मोड़ा में ली अंतिम सांस, अजय ढौंडियाल के साथ उनकी लोकप्रिय जोड़ी ‘अजय-दीवान’ ने लोकसंगीत को दिया नया स्वर

उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोकगायक दीवान कनवाल का निधन हो गया है।

उन्होंने बुधवार को अल्मोड़ा स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली।

बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले उनका हल्द्वानी में इलाज हुआ था और उपचार के बाद वे घर लौट आए थे।

उनके निधन की खबर फैलते ही उत्तराखंड के संगीत जगत और उनके प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई।

दीवान कनवाल अपने सुरीले स्वर और पारंपरिक लोकधुनों को नए अंदाज में प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते थे।

पहली बार फिल्म “मेघा आ” से पहचान

दीवान कनवाल की आवाज़ को कई लोगों ने पहली बार कुमाऊँनी फिल्म “मेघा आ” के एक युगल गीत में सुना था।

गीत की पंक्तियाँ —
यो डाना का पारा, देखीं च न्यारा न्यारा
जब तू ऐ जै छौ, ऐ जो छौ बहारा
या तेरो कुमाऊं, वा मेरो गढ़वाला
घोड़ी चढ़ी ऊंलो, लिजोलो दगाड़ा

इस गीत ने उन्हें लोकसंगीत प्रेमियों के बीच पहचान दिलाई। बाद में मंचीय कार्यक्रमों और विभिन्न माध्यमों के जरिए उनकी आवाज़ लगातार लोगों तक पहुंचती रही।

अजय ढौंडियाल के साथ बनी लोकप्रिय जोड़ी

सोशल मीडिया और यूट्यूब के दौर में दीवान कनवाल के कई गीत फिर से लोकप्रिय हुए। खास तौर पर

डॉ. अजय ढौंडियाल के साथ उनकी जोड़ी ने उत्तराखंड के लोकसंगीत में एक नया प्रयोग किया।

दोनों ने कई पुराने गीतों को नए अंदाज में गाया और यह जोड़ी “अजय-दीवान” के नाम से प्रसिद्ध हुई।

उनकी गायकी ने गढ़वाल और कुमाऊं के सांस्कृतिक अंतर को संगीत के माध्यम से जोड़ने का काम किया।

“दुई दीना का ड्यार शेरुवा” से मिली नई पहचान

हाल के वर्षों में उनका गाया गीत –

“दुई दीना का ड्यार शेरुवा ये दुनी में,
ना त्यार, ना म्यार शेरुवा ये दुनी में”

सोशल मीडिया और यूट्यूब पर काफी लोकप्रिय हुआ।

इस गीत में डॉ. अजय ढौंडियाल के साथ उनकी जुगलबंदी को संगीत प्रेमियों ने खूब सराहा।

कई लोकप्रिय गीतों को दी आवाज

दीवान कनवाल ने अपने लंबे संगीत सफर में कई प्रसिद्ध लोकगीत गाए।

उनके प्रमुख गीतों में शामिल हैं —

  • “ओ नंदा सुनंदा तू दैणी है जाए”
  • “आज कुछि मैत जा”
  • “के लेखूं अपणा हिया का हाल”
  • फिल्म बलि वेदना का गीत “हिमाले सुकीली काया”

इसके अलावा आकाशवाणी अल्मोड़ा में भी उनके कई गीत रिकॉर्ड हुए, जो समय-समय पर प्रसारित होते रहे।

संगीत प्रेमियों के लिए अपूरणीय क्षति

दीवान कनवाल का जाना उत्तराखंड के लोकसंगीत के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है।

उनकी सुरीली आवाज़ और लोकधुनों के प्रति समर्पण ने उन्हें संगीत प्रेमियों के दिलों में खास स्थान दिलाया।

उनके निधन से न केवल एक प्रतिभाशाली लोकगायक का अवसान हुआ है, बल्कि वह लोकप्रिय जोड़ी भी टूट गई जिसने उत्तराखंड के लोकसंगीत को नई ऊर्जा दी थी।

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