त्रिजुगीनारायण में ग्रामीणों और भेड़ पालकों से संवाद
हिमालयी बुग्यालों के संरक्षण और उनकी समस्याओं को समझने के लिए सीपी भट्ट पर्यावरण एवं विकास केंद्र,
गोपेश्वर की ओर से पांच दिवसीय जनजागरण एवं अध्ययन अभियान चलाया जा रहा है।
अभियान के तहत रुद्रप्रयाग जिले के त्रिजुगीनारायण गांव में बुग्यालों में रहने वाले भेड़ पालकों,
पशुचारकों और आसपास के ग्रामीणों के साथ संवाद किया गया।
इस दौरान बुग्यालों के संरक्षण, पर्यावरणीय बदलाव और स्थानीय लोगों की समस्याओं पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।
अभियान दल में सामाजिक कार्यकर्ता, वन विशेषज्ञ, पत्रकार और वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी शामिल रहे।
दल में केदारनाथ वन्यजीव वन प्रभाग, चमोली और टिहरी वन प्रभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी भी मौजूद रहे।
अभियान का नेतृत्व वरिष्ठ पत्रकार व्योमेश जुगरान ने किया।

बुग्यालों को प्लास्टिक मुक्त करने का संकल्प
क्षेत्र पंचायत सदस्य सुमन तिवारी की अध्यक्षता में आयोजित गोष्ठी में हिमालयी बुग्यालों को प्लास्टिक कचरे से मुक्त कराने का संकल्प लिया गया।
उन्होंने कहा कि अलग-अलग सरकारों का काम करने का नजरिया अलग हो सकता है,
लेकिन हिमालय के संरक्षण के लिए कई संस्थाओं ने सराहनीय प्रयास किए हैं।
गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि बुग्याल केवल प्राकृतिक सौंदर्य का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि हिमालयी पारिस्थितिकी और स्थानीय आजीविका से भी उनका सीधा संबंध है।
बुग्यालों से रोजगार जोड़ने पर जोर
सामाजिक कार्यकर्ता दर्शन लाल गैरोला ने कहा कि बुग्यालों का स्थानीय रोजगार के लिए पर्याप्त उपयोग नहीं हो पा रहा है।
जंगलों में भेड़-बकरियों की आवाजाही भी पहले की तुलना में कम हुई है।
उन्होंने कहा कि इसका असर बुग्यालों की स्थिति पर भी दिखाई दे रहा है।
गैरोला ने घुत्तू-पंवालीकांठा से त्रिजुगीनारायण तक करीब 36 किलोमीटर पैदल मार्ग के आसपास मोटर मार्ग विकसित करने का समर्थन किया।
उनके अनुसार, इससे क्षेत्र में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

बुग्यालों की बदलती स्थिति पर चिंता
महेंद्र प्रसाद सेमवाल ने कहा कि वर्तमान में बुग्यालों में न तो अत्यधिक पशु दबाव है और न ही लोगों की आवाजाही पहले जैसी है। इसके बावजूद बुग्याल धीरे-धीरे खत्म हो रहे हैं।
ग्रामीण मीनाक्षी प्रसाद घिल्ड़ियाल ने क्षेत्र के दर्शनीय स्थलों के विकास की कमी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कई खूबसूरत स्थल पर्यटकों की नजरों से अभी भी दूर हैं।
उन्होंने देवनी बुग्याल और कृष्ण सरोवर को विकसित करने पर जोर दिया, ताकि स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा मिल सके।
सिकुड़ती हिम रेखा को लेकर भी चिंता
भक्ति दर्शन सेमवाल ने हिम रेखा के सिकुड़ने पर चिंता जताई।
उन्होंने कहा कि इसका हिमालयी पर्यावरण और स्थानीय परिस्थितियों पर गंभीर असर पड़ सकता है।
उन्होंने क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पैदल ट्रैक विकसित करने की जरूरत बताई।
उनके अनुसार, इससे पर्यावरण के अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है।
पंवाली बुग्याल की स्थिति चिंताजनक
सीपी भट्ट पर्यावरण एवं विकास केंद्र के ट्रस्टी ओम प्रकाश भट्ट ने पंवाली बुग्याल की मौजूदा स्थिति को चिंताजनक बताया।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने वाली दीर्घकालिक नीतियां भी तैयार करनी होंगी।
वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पंत ने पर्यटकों से हिमालयी क्षेत्रों में प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि यात्रियों को अपने साथ कचरा रखने के लिए खाली बैग रखना चाहिए।
बुग्यालों में छोड़ा गया किसी भी तरह का कचरा इनके पर्यावरण के लिए नुकसानदायक है।
पंवालीकांठा की ओर रवाना हुआ अभियान दल
गोष्ठी का संचालन सर्वोदय कार्यकर्ता विनय सेमवाल ने किया। डिप्टी रेंजर गजेंद्र सिंह सजवान और सुशील भट्ट समेत अन्य लोगों ने भी अपने विचार रखे।
गोष्ठी के बाद पदयात्रा दल पंवालीकांठा बुग्याल की ओर रवाना हो गया।
अभियान के दौरान बुग्यालों की मौजूदा स्थिति, स्थानीय समस्याओं और संरक्षण की संभावनाओं का अध्ययन किया जा रहा है।
















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