गोल्ड मेडल से डिग्री तक-हर आवाज में झलकी मेहनत, संघर्ष और सपनों की कहानी
Hemvati Nandan Bahuguna Garhwal University में आयोजित दीक्षांत समारोह न केवल
शैक्षणिक उपलब्धियों का उत्सव रहा, बल्कि यह छात्रों, शोधार्थियों और अभिभावकों की भावनाओं का भी सजीव मंच बन गया।
डिग्री और गोल्ड मेडल प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों ने अपनी सफलता की यात्रा साझा की, जिसमें संघर्ष, समर्पण और परिवार के सहयोग की झलक साफ दिखाई दी।
“मेहनत करते रहिए, सफलता जरूर मिलेगी”
डिपार्टमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर के गुलाबचंद ने डिग्री मिलने पर खुशी जताते हुए कहा कि विश्वविद्यालय ने उन्हें एक बेहतर मंच दिया।
उन्होंने बताया कि वे मास्टर्स पूरा करने के बाद वर्तमान में पीएचडी कर रहे हैं।
उनका संदेश था कि निरंतर मेहनत ही सफलता की कुंजी है।

“डिग्री पाना गर्व का क्षण”
केमिस्ट्री विभाग की छात्रा आयशा ने कहा कि डिग्री प्राप्त करना उनके लिए बेहद गर्व का विषय है।
उन्होंने बताया कि पारंपरिक पहाड़ी परिधान में दीक्षांत समारोह में शामिल होना उनके लिए विशेष अनुभव रहा।
आयशा ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और शिक्षकों को दिया और बताया कि वे फिलहाल बी.एड. कर रही हैं तथा भविष्य में पीएचडी करना चाहती हैं।

“गोल्ड मेडल की उम्मीद नहीं थी”
पौड़ी गढ़वाल की अंजलि गुसाईं, जिन्होंने जियोग्राफी में मास्टर्स किया, ने बताया कि उनकी कक्षा में कड़ी प्रतिस्पर्धा थी।
जब उन्होंने गोल्ड मेडल सूची में अपना नाम देखा तो वे आश्चर्यचकित रह गईं।
उन्होंने पारंपरिक परिधान की थीम को सराहा, लेकिन साथ ही यह सुझाव भी दिया कि छात्रों को गाउन या पारंपरिक
परिधान में से चयन का विकल्प मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के दौर में समग्र विकास और आत्मविश्वास सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है।

“संस्कृति के साथ शिक्षा का संगम”
कंप्यूटर साइंस के छात्र सौरभ प्रधान ने दीक्षांत समारोह में गढ़वाली संस्कृति को शामिल करने की पहल को सराहनीय बताया।
वहीं जयकृत रौथान ने कहा कि छात्रों को अपने कार्य को ईमानदारी और समर्पण के साथ करना चाहिए,
तभी वे जीवन में ऊंचाइयों तक पहुंच सकते हैं।
“महिलाओं का सशक्तिकरण जरूरी”
होम साइंस विभाग की अंकिता बिष्ट ने कहा कि महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण तभी संभव है
जब उन्हें सामाजिक और वित्तीय रूप से जागरूक बनाया जाए।
उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार—दादा-दादी, माता-पिता, मित्रों और शिक्षकों को दिया।

“यह माता-पिता का सपना पूरा होने जैसा”
कॉमर्स विभाग की डॉ. राशिद ने कहा कि डिग्री प्राप्त करना उनके माता-पिता के सपने के साकार होने जैसा है।
उन्होंने बताया कि वे टिहरी परिसर से नामांकित थीं और 2024 में अपना वाइवा पूरा किया।
“वर्षों की मेहनत का परिणाम”
हाई एल्टीट्यूड प्लांट फिजियोलॉजी रिसर्च सेंटर के डॉ. सुमन ने इस उपलब्धि को अपने जीवन का गर्वपूर्ण क्षण बताया।
उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, पत्नी और शिक्षकों को दिया।
उनकी पत्नी ने भी कहा कि यह उपलब्धि वर्षों के संघर्ष और मेहनत का परिणाम है।

“गढ़वाल की संस्कृति ने किया प्रभावित”
उत्तर प्रदेश के बदायूं से आए छात्र जयंत, जिन्होंने कंप्यूटर साइंस में एमटेक की डिग्री प्राप्त की, ने कहा कि गढ़वाल का वातावरण और संस्कृति उन्हें बेहद पसंद आई।
उन्होंने पारंपरिक परिधान में दीक्षांत समारोह में भाग लेने को एक यादगार अनुभव बताया।
अभिभावकों की आंखों में गर्व और भावनाएं
समारोह में कई अभिभावक भावुक नजर आए। एक छात्रा की माता कुसुमलता ने कहा कि यह दिन उनके लिए बेहद सुखद है।
उन्होंने बच्चों से अपील की कि वे नशे जैसी बुरी आदतों से दूर रहें और मेहनत के दम पर आगे बढ़ें।
एक स्वर-मेहनत, परिवार और गुरु का साथ
समारोह में शामिल सभी छात्रों और अभिभावकों ने एक स्वर में कहा कि यह सफलता केवल व्यक्तिगत नहीं,
बल्कि परिवार के सहयोग, शिक्षकों के मार्गदर्शन और निरंतर मेहनत का परिणाम है।

















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