छात्रों का निःशुल्क डेंटल चेकअप भी कराया
श्रीनगर गढ़वाल के संस्कृत विद्यालय में परंपरा और आधुनिकता का संगम, करीब दो लाख रुपये की लागत से स्थापित हुई कंप्यूटर लैब
रोटरी क्लब श्रीनगर गढ़वाल ने जयदयाल संस्कृत विद्यालय में 10 कंप्यूटर भेंट कर छात्रों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा से जोड़ने की महत्वपूर्ण पहल की है।
इसी अवसर पर डॉ. के.के. गुप्ता के सहयोग से विद्यालय के छात्रों का निःशुल्क दंत परीक्षण शिविर भी आयोजित किया गया।
संस्कृत शिक्षा के साथ तकनीकी ज्ञान की नई शुरुआत
रोटरी क्लब द्वारा लगभग दो लाख रुपये की लागत से विद्यालय में कंप्यूटर उपलब्ध कराए गए हैं।
इस पहल का उद्देश्य संस्कृत शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्रों को आधुनिक तकनीक और डिजिटल ज्ञान से जोड़ना है,
ताकि वे परंपरागत ज्ञान के साथ समकालीन कौशल भी विकसित कर सकें।
कंप्यूटर लैब को देखकर छात्र अत्यंत उत्साहित नजर आए।
विद्यालय में छात्र समूहों में कंप्यूटर लैब पहुंचकर बुनियादी कंप्यूटर शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

हिमांशु अग्रवाल बोले- रोटरी क्लब आगे भी करेगा ऐसे प्रयास
हिमांशु अग्रवाल ने बताया कि रोटरी क्लब समय-समय पर शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा से जुड़े कार्यक्रम आयोजित करता रहता है।
उन्होंने कहा कि विद्यालय में लगभग दो लाख रुपये की लागत से कंप्यूटर उपलब्ध कराए गए हैं,
जिससे बच्चों को डिजिटल शिक्षा का लाभ मिलेगा और वे आधुनिक तकनीक से जुड़ सकेंगे।
डॉ. के.के. गुप्ता ने किया निःशुल्क डेंटल चेकअप
कार्यक्रम के दौरान डॉ. के.के. गुप्ता और उनकी टीम ने विद्यालय के छात्रों का निःशुल्क दंत परीक्षण किया।
शिविर में बच्चों के दांतों की जांच की गई और उन्हें मौखिक स्वच्छता तथा दंत स्वास्थ्य के बारे में उपयोगी जानकारी दी गई।
राजीव अग्रवाल बोले- परंपरा के साथ आधुनिकता भी जरूरी
विद्यालय के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल ने कहा कि बच्चे इस नई सुविधा से बेहद खुश हैं। वे दस-दस के समूह में कंप्यूटर लैब में जाकर कंप्यूटर का ज्ञान प्राप्त कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि संस्कृत और भारतीय संस्कृति से जुड़े रहना जितना आवश्यक है, उतना ही आधुनिक तकनीक से परिचित होना भी आज के समय की आवश्यकता है।
2002 से निःशुल्क शिक्षा, भोजन और वस्त्र की व्यवस्था
राजीव अग्रवाल ने बताया कि उनके पूर्वजों ने वर्ष 2002 में विद्यालय की स्थापना की थी।
तब से आज तक यहां छात्रों को निःशुल्क शिक्षा दी जा रही है।
इसके साथ ही बच्चों को निःशुल्क वस्त्र और भोजन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है।
उन्होंने कहा कि संस्थान के संचालन में अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है,
और सरकार की ओर से किसी प्रकार की आर्थिक सहायता प्राप्त नहीं होती।

सरकार से नियमों में व्यवहारिक दृष्टिकोण अपनाने की अपील
राजीव अग्रवाल ने सरकार से आग्रह किया कि यदि प्रत्यक्ष सहायता संभव न हो,
तब भी ऐसे नियमों का बोझ विद्यालयों पर न डाला जाए, जिनके कारण छोटे
और सेवा-आधारित संस्थानों का संचालन कठिन हो जाए।
उन्होंने विशेष रूप से बस, खेल मैदान और अन्य संरचनात्मक मानकों को लेकर व्यवहारिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता बताई।
उनका कहना था कि उत्तराखंड में नए संस्कृत विद्यालयों की स्थापना सीमित है,
इसलिए जो संस्थान समाज के सहयोग से शिक्षा दे रहे हैं, उन्हें प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।


















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