ग्रामीणों का ऐतिहासिक फैसला
वाण गांव में सर्वसम्मति से लिया गया निर्णय, अब केवल सात्विक पूजा-अर्चना होगी
देवाल विकासखंड के वाण गांव स्थित लाटू देवता मंदिर में पशु बलि प्रथा पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।
मंदिर समिति और ग्रामीणों की बैठक में सर्वसम्मति से यह बड़ा निर्णय लिया गया।
मंदिर परिसर में अब नहीं होगी पशु बलि
अब मंदिर परिसर में किसी भी प्रकार की पशु बलि नहीं दी जाएगी।
मनौती पूरी होने पर श्रद्धालु केवल सात्विक पूजा-अर्चना करेंगे। ग्रामीणों ने इस फैसले को सामाजिक सुधार की दिशा में अहम कदम बताया है।
आस्था के साथ सकारात्मक बदलाव
मंदिर समिति के अनुसार समय के साथ धार्मिक परंपराओं में बदलाव जरूरी है।
यह निर्णय आस्था को बनाए रखते हुए मानवीय मूल्यों को मजबूत करने के उद्देश्य से लिया गया है। अब सभी धार्मिक अनुष्ठान सात्विक पद्धति से होंगे।
ग्राम प्रधान ने दी पुष्टि
वाण गांव की ग्राम प्रधान नंदुली देवी ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस फैसले की जानकारी दी।
ग्रामीणों ने इस पहल का स्वागत किया और मंदिर परिसर की स्वच्छता व व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने का संकल्प भी लिया।
कौन हैं लाटू देवता?
लाटू देवता को नंदा देवी का धर्म भाई माना जाता है।
नंदा देवी राजजात यात्रा में लाटू देवता की विशेष भूमिका होती है और उनका निशान सबसे आगे चलता है।
अनोखी परंपरा
इस मंदिर में एक खास परंपरा है। कपाट खुलने पर मुख्य पुजारी आंखों और मुंह पर पट्टी बांधकर गर्भगृह में प्रवेश करते हैं।
आज तक श्रद्धालु सीधे दर्शन नहीं कर पाए हैं।

















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