उपभोक्ता परेशान-होटल और कारोबार पर भी असर
ऊखीमठ सहित आसपास के क्षेत्रों में इन दिनों घरेलू और व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की गंभीर किल्लत देखने को मिल रही है।
हालात ऐसे हैं कि गैस एजेंसियों पर सुबह से लंबी कतारें लग रही हैं, लेकिन पर्याप्त आपूर्ति न होने के कारण उपभोक्ताओं को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
इससे आम लोगों में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है।
घंटों लाइन में इंतजार, फिर भी नहीं मिल रहा सिलेंडर
स्थानीय उपभोक्ताओं का कहना है कि वे सुबह से ही गैस एजेंसी के बाहर लाइन में लग जाते हैं, लेकिन सीमित स्टॉक के चलते कई लोगों को सिलेंडर नहीं मिल पाता।
खासतौर पर महिलाएं, बुजुर्ग और दूरदराज के ग्रामीण इस समस्या से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
गैस की कमी के कारण लोगों की दैनिक दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
घरेलू संकट गहराया, विकल्पों पर बढ़ा खर्च
घरेलू गैस सिलेंडरों की कमी के चलते कई परिवारों को खाना बनाने के
लिए लकड़ी या अन्य वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है।
इससे न केवल समय और श्रम बढ़ रहा है, बल्कि अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी उठाना पड़ रहा है।
ग्रामीण इलाकों में स्थिति और अधिक चिंताजनक बनी हुई है।

व्यापारियों पर भी पड़ी मार, कारोबार ठप होने की कगार पर
व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की किल्लत का असर स्थानीय होटल, ढाबा और छोटे व्यापारियों पर भी साफ दिख रहा है।
पारियों का कहना है कि गैस उपलब्ध न होने के कारण उन्हें ग्राहकों को लौटाना पड़ रहा है,
जिससे उनकी आय पर सीधा असर पड़ रहा है और कारोबार ठप होने की स्थिति बन गई है।
आपूर्ति व्यवस्था पर उठे सवाल, प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग
स्थानीय लोगों ने गैस आपूर्ति व्यवस्था में लापरवाही का आरोप लगाया है।
उनका कहना है कि समय पर सिलेंडरों की सप्लाई नहीं हो रही, जिससे संकट लगातार गहराता जा रहा है।
उपभोक्ताओं और व्यापारियों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर आपूर्ति व्यवस्था को सुचारु करने की मांग की है।
गांववार वितरण की मांग, आंदोलन की चेतावनी
पूर्व छात्र नेता विराट सौरभ भट्ट ने कहा कि यदि गैस वितरण की तिथि गांववार तय की जाए तो समस्या का समाधान संभव है।
वहीं, सभासद प्रदीप धर्म्वाण ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आने वाले समय में यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।
लोगों ने साफ कहा है कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
एजेंसी प्रबंधन की चुप्पी
इस पूरे मामले में संबंधित गैस एजेंसी प्रबंधक से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया, जिससे उपभोक्ताओं में असंतोष और बढ़ गया है।















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