रीजनल रिपोर्टर

सरोकारों से साक्षात्कार

चंपावत की भंडारभोरा जिला पंचायत सीट का चुनाव निरस्त

146 अतिरिक्त मतों पर कोर्ट ने उठाए गंभीर सवाल

जिला जज चंपावत ने शैलेश चंद्र का निर्वाचन शून्य घोषित किया, कमल सिंह रावत की याचिका आंशिक रूप से स्वीकार

जिला न्यायालय चंपावत ने जिला पंचायत सदस्य के प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र-12 भंडारभोरा के चुनाव को निरस्त कर दिया है।

अदालत ने मतगणना में 146 अतिरिक्त मत पाए जाने को गंभीर अनियमितता मानते हुए निर्वाचित उम्मीदवार शैलेश जोशी का निर्वाचन शून्य घोषित कर दिया।

यह फैसला कमल सिंह रावत द्वारा दायर चुनाव याचिका संख्या 03/2025 पर अरुण कुमार संगल ने 12 मई 2026 को सुनाया।

146 अतिरिक्त मतों से उजागर हुई अनियमितता

अदालत के आदेश के अनुसार, 28 जुलाई 2025 को हुए मतदान में कुल 6,719 मत डाले गए थे,

जबकि मतगणना के एक अन्य अभिलेख (परिशिष्ट-8) में कुल मतों की संख्या 6,865 दर्शाई गई।

6865 – 6719 = 146

यानी मतगणना में 146 अतिरिक्त मतों की गणना की गई।

न्यायालय ने माना कि इस अंतर का संतोषजनक स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं किया गया और यह चुनाव परिणाम को प्रभावित करने वाली गंभीर त्रुटि है।

न्यायालय का आदेश क्या कहता है?

जिला जज ने अपने आदेश में निम्न प्रमुख निर्णय दिए:

  1. शैलेश चंद्र का निर्वाचन शून्य घोषित किया जाता है।
  2. कमल सिंह रावत को सीधे विजयी घोषित करने की मांग निरस्त की जाती है।
  3. आदेश की प्रति जिला निर्वाचन अधिकारी, चंपावत को आवश्यक कार्रवाई हेतु भेजी जाए।

इसका अर्थ है कि वर्तमान में सीट रिक्त मानी जाएगी और आगे की प्रक्रिया राज्य निर्वाचन आयोग के निर्णय पर निर्भर करेगी।

कमल सिंह रावत को विजयी घोषित नहीं किया गया

याचिकाकर्ता ने यह भी मांग की थी कि शैलेश चंद्र का निर्वाचन निरस्त होने के बाद उन्हें विजयी घोषित किया जाए।

हालांकि न्यायालय ने यह मांग स्वीकार नहीं की। अदालत ने केवल चुनाव प्रक्रिया को दोषपूर्ण मानते हुए परिणाम रद्द किया।

अब आगे क्या होगा

इस फैसले के बाद दो संभावनाएं प्रमुख हैं:

  • उत्तराखंड राज्य निर्वाचन आयोग इस सीट पर पुनर्मतदान या उपचुनाव की घोषणा कर सकता है।
  • शैलेश चंद्र इस आदेश को उत्तराखंड उच्च न्यायालय में चुनौती दे सकते हैं।

यदि उच्च न्यायालय से स्थगन आदेश नहीं मिलता, तो निर्वाचन आयोग नई चुनाव प्रक्रिया शुरू कर सकता है।

आदेश से उठे चुनावी पारदर्शिता पर सवाल

यह निर्णय स्थानीय चुनावों में मतगणना की पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही पर महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े करता है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि जब मतदान और मतगणना के आधिकारिक अभिलेखों में 146 मतों का अंतर हो

और उसका कोई उचित कारण न दिया जा सके, तो चुनाव परिणाम को वैध नहीं माना जा सकता।

https://regionalreporter.in/jaydayal-sanskrit-vidyalaya-srinagar-rotary-club-computer-donation-2026/
https://youtu.be/9Uh5mRbFCJk?si=T5brL72zfvOOrbdc
Website |  + posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *