सुनील नेगी
जंतर-मंतर पर NEET छात्रों का महासंग्राम: क्या अभिजीत दिपके की अगुवाई में बदलेगा इतिहास?
जंतर-मंतर पर भारी भीड़ उमड़ी है, हर मिनट इसकी संख्या बढ़ती जा रही है।
मानो इंसानों का सागर हो। सभी प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण और अनुशासित हैं।
तिरंगा और संविधान लेकर पहुंचे अभिजीत दिपके
जब मुख्य न्यायिक परिषद के प्रमुख अभिजीत दिपके अमेरिका से पालम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचे, तो उनके हाथ में राष्ट्रीय ध्वज था।
फिर हवाई अड्डे से बाहर निकलते समय उन्हें भारतीय संविधान की पुस्तक लहराते हुए देखा गया।
NEET, CBSE और CUET को लेकर बड़ा आंदोलन
उनके साथ सैकड़ों समर्थक थे, जिनकी संख्या हजारों में हो सकती थी, अगर उन्होंने उनसे आने से मना न किया होता।
अभिजीत दिपके ने जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने का संकल्प लिया,
जिसमें NEET परीक्षा के प्रश्न पत्रों के बड़े पैमाने पर लीक होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के
22 लाख छात्रों के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने और CBSE और CUET जैसे मुद्दों के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की गई।
संसद स्ट्रीट थाने से मिली प्रदर्शन की अनुमति
वे अनुमति लेने के लिए संसद स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पहुंचे
और आश्चर्यजनक रूप से उन्हें बिना किसी देरी और बिना किसी बाधा के अनुमति मिल गई।

किसान आंदोलन से तुलना क्यों?
यह दिलचस्प है क्योंकि आंदोलनकारी किसानों को कई दिनों और महीनों तक सीमाओं पर रोके रखा गया था,
जिसके परिणामस्वरूप कई दुर्भाग्यपूर्ण मौतें हुईं।
अन्ना आंदोलन की याद दिला रही भीड़
जंतर-मंतर पर अभिजीत दिपके के साथ उमड़ी भीड़, जो अखिल भारतीय स्तर पर लाखों छात्रों की उम्मीद है,
हमें 2014 से पहले के अन्ना हजारे आंदोलन की याद दिलाती है।
भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन कुछ ही दिनों में इतना लोकप्रिय हो गया था
कि अरविंद केजरीवाल को इसका फायदा उठाने और दिल्ली और उसके बाद पंजाब में सरकार को मजबूत करने का मौका मिल गया था।
क्या यह आंदोलन टिकेगा या बन जाएगा इतिहास का एक अध्याय?
आज सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या यह आंदोलन,
जिसने कुछ ही दिनों में इतना विशाल रूप ले लिया है
और जिसकी सदस्यता दो करोड़ से अधिक हो गई है, लंबे समय तक टिक पाएगा या पानी के बुलबुले की तरह गायब हो जाएगा?
या क्या इसका भी वही हश्र होगा जो अन्ना आंदोलन का हुआ था और अन्ना हजारे महाराष्ट्र के अपने गांव रालेगांव तक ही सीमित रह गए थे?
















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