केतन लाल हत्याकांड को लेकर पीड़ित परिवार से मुलाकात करने पहुंचे पत्रकार त्रिलोचन भट्ट ने रीजनल
रिपोर्टर से बातचीत में समाज में बढ़ रहे भेदभाव पर चिंता जताई।
उन्होंने कहा कि इस मामले को जातीय रंग दिया जा रहा है, जबकि यह इंसानियत और न्याय का मामला है।
त्रिलोचन भट्ट ने कहा, “यहां हिंदू-मुसलमान का मामला नहीं था, इसलिए इसे सवर्ण और दलित का रूप दे दिया गया।
समाज को बांटने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। यह किसी जाति का नहीं, बल्कि एक परिवार को न्याय दिलाने का मामला है।”
उन्होंने केतन लाल के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा,
“परिवार इस समय खुद को असहाय और असहज महसूस कर रहा है।
हम यहां इसलिए आए हैं ताकि उन्हें हिम्मत मिले और उन्हें यह महसूस हो कि वे अकेले नहीं हैं।
समाज का एक बड़ा वर्ग उनके साथ खड़ा है। ऐसा बिल्कुल नहीं है कि सभी सवर्ण एक तरफ हो गए हैं।”
त्रिलोचन भट्ट ने यह भी दावा किया कि “जब हम केतन के गाँव देवल पहुंचे तो किसी ने सीधे तौर पर बात नहीं की
और न ही घर का रास्ता बताया। हमें ऐसा महसूस हुआ कि लोग खुलकर बोलने से बच रहे हैं।”
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि “आरोपी पक्ष आर्थिक रूप से प्रभावशाली है, इसलिए पुलिस और प्रशासन पर
दबाव होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। साथ ही, पीड़ित परिवार से मिलने आने वाले लोगों को भी रोका जा रहा है, जो उचित नहीं है।”
उन्होंने अंत में कहा कि इस मामले में निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और पीड़ित परिवार को न्याय के साथ-साथ भयमुक्त माहौल भी मिलना चाहिए।
















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