1.07 लाख मतदाताओं को नोटिस, नाम बचाने के लिए देना होगा प्रमाण
उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) के दूसरे चरण की प्रक्रिया 13 अगस्त को पूरी हो गई है।
इस चरण में 14 जुलाई से 13 अगस्त के बीच प्रदेशभर से 2 लाख 83 हजार 890 दावे और आपत्तियां प्राप्त हुई हैं।
अब 14 अगस्त से SIR के तीसरे चरण की प्रक्रिया शुरू हो गई है, जिसमें आपत्तियों के घेरे में आए मतदाताओं को नोटिस भेजकर उनके दावों और दस्तावेजों की जांच की जाएगी।
दूसरे चरण में मिले 2.83 लाख दावे और आपत्तियां
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के मुताबिक SIR के दूसरे चरण के दौरान प्राप्त आवेदनों में फॉर्म-6 के 1.28 लाख,
फॉर्म-7 के 1.07 लाख और फॉर्म-8 के करीब 47 हजार आवेदन शामिल हैं।
इन दावों और आपत्तियों के निस्तारण के साथ अब प्रक्रिया अगले चरण में पहुंच गई है।
1.07 लाख मतदाताओं के नाम पर लगी आपत्ति
SIR के तीसरे चरण में सबसे अहम प्रक्रिया उन 1.07 लाख मतदाताओं को लेकर होगी, जिनके नाम पर आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं।
इन मतदाताओं के साथ-साथ आपत्ति दर्ज कराने वाले लोगों को भी नोटिस जारी किया जाएगा।
नोटिस ERO (Electoral Registration Officer) या AERO (Assistant Electoral Registration Officer) के स्तर से जारी होंगे।
मतदाता को नोटिस मिलने के बाद अपने नाम को मतदाता सूची में बनाए रखने के लिए संबंधित दस्तावेज और प्रमाण प्रस्तुत करने होंगे।
आपत्ति करने वाले को भी देना होगा सबूत
SIR के तहत सिर्फ मतदाता से ही जवाब नहीं मांगा जाएगा। जिस व्यक्ति ने किसी मतदाता के नाम पर आपत्ति दर्ज कराई है,
उसे भी सुनवाई के दौरान अपनी आपत्ति के समर्थन में प्रमाण देना होगा।
दरअसल, बड़ी संख्या में आपत्तियां इस आधार पर दर्ज की गई हैं कि संबंधित मतदाता उस स्थान से स्थायी रूप से जा चुका है या वहां का निवासी नहीं है।
ऐसे मामलों में आपत्तिकर्ता को अपने दावे का आधार साबित करना होगा, जबकि संबंधित मतदाता को अपने निवास और
मतदाता सूची में नाम बनाए रखने के लिए जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।
BLO से फॉर्म-10 का नोटिस मिले तो क्या करें?
अगर किसी मतदाता को BLO के माध्यम से फॉर्म-10 का नोटिस प्राप्त होता है, तो उसे इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
नोटिस में जिस कारण से उसके नाम पर आपत्ति दर्ज की गई है, उसी के आधार पर ERO
या AERO के सामने आवश्यक प्रमाण और दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।
यानी तीसरे चरण में मतदाताओं के लिए सबसे जरूरी है कि वे नोटिस में दर्ज आपत्ति के कारण को ध्यान से पढ़ें
और निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष रखें।
राजनीतिक दलों के साथ CEO ने की बैठक
SIR का तीसरा चरण शुरू होने के बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने
शुक्रवार को प्रदेश के मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की।
बैठक में दावे और आपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों को विस्तार से जानकारी दी गई।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम 1960
और मैनुअल ऑफ इलेक्टोरल रोल में दिए गए प्रावधानों की बिंदुवार जानकारी भी दी।
BLA की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील
CEO ने राजनीतिक दलों से अपील की कि दावे और आपत्तियों के निस्तारण के दौरान उनके बूथ लेवल एजेंट (BLA) सक्रिय रूप से प्रक्रिया में भाग लें।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल अपने स्तर से भी पूरी प्रक्रिया पर नजर रखें और अपने BLA की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें,
ताकि दावे और आपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया नियमों के अनुसार पूरी हो सके।
फॉर्म-6, 7 और 8 को किया जा रहा डिजिटाइज
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने राजनीतिक दलों को यह भी बताया कि वर्तमान में SIR के तहत प्राप्त
फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 को डिजिटाइज करने की प्रक्रिया चल रही है।
इसके बाद प्राप्त दावों और आपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया को निर्धारित नियमों के अनुसार आगे बढ़ाया जाएगा।
मतदाताओं के लिए तीसरा चरण क्यों है अहम
SIR का तीसरा चरण उन मतदाताओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, जिनके नाम पर आपत्तियां दर्ज की गई हैं।
करीब 1.07 लाख मतदाताओं को अब नोटिस मिलने हैं।
ऐसे में नोटिस प्राप्त होने पर निर्धारित समय और प्रक्रिया के भीतर अपना पक्ष रखना जरूरी होगा।
मतदाता सूची में नाम बरकरार रखने के लिए संबंधित मतदाता को अपनी पात्रता और निवास से जुड़े आवश्यक प्रमाण प्रस्तुत करने होंगे।
वहीं, नाम हटाने की मांग करने वाले आपत्तिकर्ता को भी अपनी आपत्ति के समर्थन में प्रमाण देना होगा।
इस तरह SIR का तीसरा चरण नोटिस, सुनवाई और प्रमाणों के आधार पर दावे-आपत्तियों के निस्तारण पर केंद्रित रहेगा।















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