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उत्तराखंड में मानसून मॉक ड्रिल: राज्यभर में आपदा प्रबंधन तंत्र का हुआ परीक्षण

भूस्खलन, बादल फटने और बाढ़ जैसे हालात का किया गया अभ्यास, आपदा तंत्र की तैयारियां परखी गईं

मानसून सीजन को देखते हुए उत्तराखंड में राज्य स्तरीय मानसून मॉक ड्रिल आयोजित की गई।

इस दौरान भूस्खलन, बादल फटने, नदी का जलस्तर बढ़ने और जलभराव जैसी काल्पनिक आपदा परिस्थितियां तैयार कर

विभिन्न विभागों की त्वरित प्रतिक्रिया, राहत एवं बचाव कार्यों तथा आपसी समन्वय का परीक्षण किया गया।

सतपुली और थलीसैंण में भूस्खलन व बादल फटने का अभ्यास

मॉक ड्रिल के तहत कंट्रोल रूम से सुबह 9:15 बजे सतपुली क्षेत्र में भूस्खलन होने और 20 से 25 लोगों के फंसे होने की सूचना

प्रसारित की गई। इसके बाद राहत एवं बचाव दल को तत्काल मौके पर भेजा गया। वहीं 9:20 बजे थलीसैंण क्षेत्र में बादल फटने

और 25 लोगों के फंसे होने का परिदृश्य तैयार किया गया, जहां जिला प्रशासन, एसडीआरएफ और पुलिस की टीमों ने संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान का अभ्यास किया।

कोटद्वार और धारी देवी क्षेत्र में बाढ़ जैसी स्थिति का अभ्यास

मॉक ड्रिल के दौरान कोटद्वार के सिंबलचौड़ में नदी का जलस्तर बढ़ने की सूचना जारी कर स्थानीय लोगों को सुरक्षित स्थानों

पर जाने की चेतावनी दी गई। वहीं फरासू में भूस्खलन और अलकनंदा नदी का जलस्तर बढ़ने से धारी देवी स्थित गोवा बीच के

पास राष्ट्रीय राजमार्ग के जलमग्न होने का परिदृश्य तैयार किया गया।

एसडीआरएफ और पुलिस ने किया सफल रेस्क्यू

अभ्यास के दौरान थलीसैंण में एसडीआरएफ और पुलिस टीम ने तीन लोगों का सफल रेस्क्यू किया।

घायलों को 108 एंबुलेंस की मदद से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजकर उपचार की प्रक्रिया का भी अभ्यास किया गया।

वहीं धारी देवी के पास गोवा बीच क्षेत्र से भी तीन लोगों को सुरक्षित निकालकर प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया गया।

टिहरी डैम से पानी छोड़े जाने की स्थिति का भी किया गया अभ्यास

मॉक ड्रिल के दौरान टीएचडीसी की ओर से टिहरी बांध से पानी छोड़े जाने का काल्पनिक परिदृश्य तैयार किया गया।

इसके तहत देवप्रयाग, मालाकुंड और लक्ष्मणझूला क्षेत्रों को अलर्ट जारी करने और संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित

करने की प्रक्रिया का परीक्षण किया गया।

चम्पावत में IRS सिस्टम किया गया सक्रिय

चम्पावत जिले में आयोजित मॉक ड्रिल के दौरान अतिवृष्टि से उत्पन्न आपदा की स्थिति का अभ्यास किया गया।

राष्ट्रीय राजमार्ग अवरुद्ध होने, पूर्णागिरि राज्य मार्ग क्षतिग्रस्त होने तथा टनकपुर और बनबसा क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति दर्शाई

गई। इसके बाद जिलाधिकारी मनीष कुमार ने जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अंतर्गत Incident Response System

(IRS) को सक्रिय करते हुए सभी विभागों के अधिकारियों को जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र (DEOC) में तत्काल उपस्थित होने के निर्देश दिए।

आपदा से निपटने की तैयारियों को परखना था उद्देश्य

प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक मॉक ड्रिल थी, जिसका उद्देश्य वास्तविक आपदा की स्थिति में विभिन्न विभागों की

त्वरित प्रतिक्रिया, राहत एवं बचाव व्यवस्था, संसाधनों की उपलब्धता और आपसी समन्वय का परीक्षण करना था,

ताकि मानसून के दौरान किसी भी आपदा से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।

https://regionalreporter.in/mock-drill-to-deal-with-possible-disaster-in-alaknanda-river/
https://youtu.be/B81DhrHydEs?si=ggt5k5SMgEempsV-
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