एनआईटी से आए पानी पर स्थानीयों का आरोप
लगातार बारिश से बिगड़े हालात, प्रभावित परिवारों ने प्रशासन से की स्थायी समाधान की मांग
श्रीनगर गढ़वाल में लगातार हो रही बारिश के बीच भक्तियाना क्षेत्र में जलभराव की गंभीर समस्या सामने आई है।
भारी मात्रा में पानी भरने से 3 से 4 मकानों में पानी घुस गया, जिससे प्रभावित परिवारों को पूरी रात कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।
घरों में पानी भरने से घरेलू सामान भी प्रभावित हुआ और लोगों में भय व चिंता का माहौल बना रहा।
प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग
युवा नेता शैलेश मलासी ने प्रशासन से जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों को शीघ्र राहत उपलब्ध कराई जाए और ऐसी व्यवस्था बनाई जाए
जिससे भविष्य में बारिश के दौरान लोगों को इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
13 साल से हर मानसून में दोहराती है त्रासदी
स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्ष 2013 की आपदा के बाद से उनके परिवार लगातार इस समस्या का सामना कर रहे हैं।
हर बरसात में पानी घरों में घुस जाता है, जिससे घरेलू सामान खराब हो जाता है और परिवारों को पूरी रात डर के साये में गुजारनी पड़ती है।
उनका कहना है कि बारिश शुरू होते ही बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता बन जाती है।
15 मिनट और बारिश होती तो बड़ा हादसा हो सकता था
प्रभावित महिलाओं ने बताया कि रात हालात बेहद भयावह हो गए थे।
उनका कहना है कि यदि 15 मिनट और तेज बारिश होती, तो पानी का स्तर और बढ़ जाता तथा किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता था।
कई परिवार रात करीब दो बजे अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने को मजबूर हो गए।
NIT निर्माण और जल निकासी पर उठे सवाल
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि NIT श्रीनगर के निर्माण कार्य के बाद क्षेत्र की जल निकासी व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई है।
दोनों ओर निर्माण होने के कारण बारिश का पानी सीधे रतूड़ी मोहल्ले की ओर आ रहा है।
लोगों का कहना है कि कई बार संबंधित अधिकारियों, प्रशासन और निर्माण एजेंसियों को शिकायत देने के बावजूद आज तक स्थायी समाधान नहीं किया गया।
जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से लगाई गुहार
पीड़ित परिवारों का कहना है कि उन्होंने कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से मदद की गुहार लगाई, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं।
उनका आरोप है कि अधिकारी मौके पर पहुंचकर निरीक्षण तो करते हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं होता। स्थानीय लोगों ने कहा कि अब उनकी उम्मीदें भी टूटती जा रही हैं।
2013 की आपदा के बाद से नहीं बदले हालात
क्षेत्र के बुजुर्गों का कहना है कि वर्ष 2013 की आपदा के बाद से यह समस्या लगातार बनी हुई है।
उन्होंने वर्षों की मेहनत से अपने घर बनाए थे, लेकिन अब हर बारिश उनके लिए नई मुसीबत लेकर आती है।
लोगों का कहना है कि जलभराव के कारण मकानों को भी नुकसान पहुंच रहा है और भविष्य में बड़ा खतरा पैदा हो सकता है।
विस्थापन या स्थायी समाधान की मांग
प्रभावित परिवारों ने सरकार से मांग की है कि यदि जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है,
तो उन्हें सुरक्षित स्थान पर विस्थापित किया जाए।
उनका कहना है कि हर साल जान जोखिम में डालकर जीवन बिताना अब संभव नहीं है।
लोगों ने प्रशासन और NIT प्रबंधन से जल्द प्रभावी कार्रवाई करने की अपील की है ताकि आने वाले मानसून में उन्हें इस परेशानी का सामना न करना पड़े।
















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