CBSE नॉर्थ जोन आर्चरी चैंपियनशिप में सनाया भंडारी का स्वर्णिम प्रदर्शन
अंडर-14 वर्ग में दो गोल्ड मेडल जीतकर उत्तराखंड का बढ़ाया मान, 600 खिलाड़ियों के बीच दिखाई शानदार प्रतिभा
श्रीनगर गढ़वाल की होनहार तीरंदाज सनाया (माही) भंडारी ने बिजनौर में आयोजित
CBSE नॉर्थ जोन आर्चरी चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए अंडर-14 वर्ग की
सिंगल और डबल स्पर्धा में दो स्वर्ण पदक जीतकर उत्तराखंड और अपने क्षेत्र का नाम रोशन किया है।
600 प्रतिभागियों के बीच जीते दो स्वर्ण पदक
प्रतियोगिता में करीब 600 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया।
सनाया ने इंडियन राउंड (70 मीटर एवं 30 मीटर) में बेहतरीन निशानेबाजी का प्रदर्शन करते हुए सिंगल और डबल दोनों स्पर्धाओं में गोल्ड मेडल अपने नाम किए।
उनकी इस उपलब्धि ने प्रतियोगिता में सभी का ध्यान आकर्षित किया।
कोच प्रतिभा धामी और कुलदीप बिष्ट का रहा अहम योगदान
सनाया की सफलता के पीछे उनके प्रशिक्षक प्रतिभा धामी और कुलदीप बिष्ट का विशेष योगदान रहा।
दोनों कोचों के मार्गदर्शन और निरंतर प्रशिक्षण से उन्होंने अपनी तकनीक को लगातार बेहतर बनाया और राष्ट्रीय स्तर तक अपनी मजबूत पहचान बनाई।
लगातार तीसरी बड़ी उपलब्धि
सनाया (माही) भंडारी लगातार शानदार प्रदर्शन कर रही हैं।
- मार्च 2025: आंध्र प्रदेश में आयोजित नेशनल आर्चरी चैंपियनशिप में उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व।
- जून 2025: नैनीताल में आयोजित 6वीं सब जूनियर एवं 8वीं सीनियर स्टेट आर्चरी चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल।
- नवंबर 2025: अरुणाचल प्रदेश में आयोजित नेशनल आर्चरी चैंपियनशिप में उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व।
- अब 2026: CBSE नॉर्थ जोन आर्चरी चैंपियनशिप में दो स्वर्ण पदक जीतकर नई उपलब्धि हासिल की।
परिवार और क्षेत्र के लिए गर्व का क्षण
सनाया (माही) भंडारी नगर निगम श्रीनगर की महापौर आरती भंडारी एवं पूर्व जिला पंचायत सदस्य लखपत सिंह भंडारी की पुत्री हैं।
उनकी लगातार मिल रही सफलताएं मेहनत, अनुशासन और खेल के प्रति समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करने का सपना
सनाया का लक्ष्य भविष्य में ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व कर देश के लिए पदक जीतना है।
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उन्हें लगातार बेहतर प्रशिक्षण और अवसर मिलते रहे तो वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत का नाम रोशन करेंगी।
उनकी यह उपलब्धि श्रीनगर गढ़वाल ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड के लिए गर्व का विषय है और युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है।















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