रुपकुंड, वेदनी बुग्याल समेत कई ट्रेकिंग स्थलों पर पर्यटकों को बड़ी राहत, पर्यटन कारोबार में लौटेगी रौनक
उत्तराखंड के प्रसिद्ध रुपकुंड, वेदनी बुग्याल और अन्य हिमालयी बुग्यालों में ट्रेकिंग करने वाले पर्यटकों के लिए बड़ी राहत की खबर है।
करीब आठ वर्षों से लागू नाइट स्टे (रात्रि प्रवास) पर लगा प्रतिबंध अब समाप्त हो गया है।
सुप्रीम कोर्ट के 20 जुलाई 2026 के निर्देश के बाद इस रोक को हटा दिया गया है।
इसके अनुपालन में बद्रीनाथ वन प्रभाग, चमोली के प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) ने 27 जुलाई को सभी
वन क्षेत्राधिकारियों को न्यायालय के आदेश का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए हैं।
2018 में हाईकोर्ट ने लगाया था प्रतिबंध
बुग्यालों में घटती हरियाली और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए ऑली-वेदनी बुग्याल संरक्षण समिति की याचिका पर
उत्तराखंड हाईकोर्ट, नैनीताल ने 21 अगस्त 2018 को बुग्यालों में पर्यटकों के रात्रि प्रवास पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था।
इस फैसले के बाद बुग्यालों में टेंट लगाने और रात बिताने पर रोक लग गई थी।
इसका सबसे अधिक असर रुपकुंड ट्रेक और उससे जुड़े पर्यटन कारोबार पर पड़ा।
नाइट स्टे बंद होने से बड़ी संख्या में पर्यटक रुपकुंड तक जाना बंद कर चुके थे।

स्थानीय पर्यटन और रोजगार पर पड़ा था बड़ा असर
रुपकुंड ट्रेक के बेस कैंप लोहाजंग से जुड़े वाण, दीदना, लोहाजंग, वांक, कुलिंग, मुंदोली सहित
कई गांवों में स्थानीय युवाओं ने होम स्टे, होटल और लॉज शुरू किए थे।
लेकिन बुग्यालों में नाइट स्टे पर रोक लगने के बाद कई होम स्टे और पर्यटन व्यवसाय बंद होने की कगार पर पहुंच गए।
रोक हटने के बाद अब ट्रेकिंग गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है।
इससे स्थानीय युवाओं, गाइड, पोर्टर, टूर ऑपरेटर, होटल संचालक, होम स्टे मालिक, दुकानदार और टैक्सी ऑपरेटरों को फिर से रोजगार मिलने की संभावना है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हटी रोक
20 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण आदेश में उत्तराखंड हाईकोर्ट के 2018 के फैसले को निरस्त करते हुए बुग्यालों में नाइट स्टे पर लगी रोक हटाने के निर्देश दिए।
इसके बाद 27 जुलाई 2026 को बद्रीनाथ वन प्रभाग के डीएफओ ने संबंधित वन क्षेत्राधिकारियों को आदेश जारी कर न्यायालय के निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा है।
जनप्रतिनिधियों और स्थानीय संगठनों ने जताई खुशी
नाइट स्टे पर लगी रोक हटने के फैसले का स्थानीय जनप्रतिनिधियों और पर्यटन से जुड़े संगठनों ने स्वागत किया है।
ब्लॉक प्रमुख तेजपाल रावत, जिला पंचायत सदस्य उर्मिला बिष्ट और बलवीर राम, रूपकुंड पर्यटन विकास संघर्ष समिति
के अध्यक्ष इंद्र सिंह राणा तथा ईको समिति वाण के अध्यक्ष त्रिलोक बिष्ट ने कहा कि इस फैसले से क्षेत्र के पर्यटन व्यवसाय को नई गति मिलेगी।
उनके अनुसार ट्रेकिंग गतिविधियां बढ़ेंगी, होटलों और होम स्टे का संचालन फिर से शुरू होगा तथा स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
डीएफओ ने जारी किए निर्देश
प्रभागीय वनाधिकारी, बद्रीनाथ वन प्रभाग चमोली, सर्वेश कुमार दुबे ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के 20 जुलाई 2026 के आदेश के बाद बुग्यालों में नाइट स्टे पर लगी रोक समाप्त हो गई है।
उन्होंने सभी संबंधित वन क्षेत्राधिकारियों को अपने-अपने रेंज में न्यायालय के निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के आदेश जारी कर दिए हैं।















Leave a Reply