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उत्तराखंड SIR में एक नाम से 156 आपत्तियां! टॉप-10 नामों पर 1124 शिकायतें

उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के बीच सामने आए आंकड़ों ने सियासी हलचल बढ़ा दी है।

वजह है आपत्तियों का पैटर्न। अब तक 12,209 वास्तविक आपत्ति आवेदन दर्ज हुए हैं, लेकिन इनमें कुछ नाम ऐसे हैं जिनके खिलाफ दर्जनों नहीं बल्कि 100 से ज्यादा आपत्तियां सामने आई हैं।

सबसे ज्यादा चौंकाने वाला आंकड़ा ‘नितिन’ नाम को लेकर है। इस एक नाम से 156 आपत्तियां दर्ज की गई हैं।

इसके बाद कई अन्य नामों के खिलाफ भी 100 से ज्यादा शिकायतें सामने आई हैं।

एक नाम के खिलाफ 156 तक आपत्तियां

उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, ‘नितिन’ नाम से कुल 156 आपत्तियां दर्ज हुई हैं।

ये मामले जसपुर और किच्छा विधानसभा क्षेत्रों से जुड़े हैं।

इसके बाद विनीत गिरि गोसाई के नाम से 126, कार्तिक घीक के नाम से 125, अशोक प्रसाद के नाम से 113 और अभिषेक तिवारी के नाम से 104 आपत्तियां दर्ज हुई हैं।

वहीं लतिका सिकदार के नाम से 93, विजय यादव के नाम से 90, जयमहाशक्ति मिश्रा के नाम से 76, गुरमेल सिंह के नाम से 75 और रामकुमार के नाम से 73 आपत्तियां सामने आई हैं।

टॉप-10 नामों के खिलाफ 1124 आपत्तियां

आंकड़ों को जोड़ें तो सिर्फ इन 10 नामों के खिलाफ 1,124 आपत्तियां दर्ज हुई हैं।

यह कुल 12,209 आपत्तियों का करीब 9.2 फीसदी है।

हालांकि किसी एक नाम के बार-बार आने का मतलब यह नहीं कि सभी आवेदन फर्जी हैं।

एक ही नाम के कई वास्तविक मतदाता भी हो सकते हैं। लेकिन एक ही नाम के खिलाफ इतनी बड़ी संख्या में आपत्तियां सामने आना निश्चित तौर पर सत्यापन और जांच का विषय है।

जसपुर में सबसे ज्यादा आपत्तियां

विधानसभा क्षेत्र के हिसाब से देखें तो जसपुर सबसे ऊपर है। यहां 3,896 आपत्तियां दर्ज हुई हैं।

इसके बाद किच्छा में 2,857, काशीपुर में 1,489, रुद्रपुर में 1,129 और रुड़की में 676 आपत्तियां सामने आई हैं।

इसके अलावा बाजपुर में 438, सितारगंज में 274, गदरपुर में 227, मंगलौर में 226 और हरिद्वार ग्रामीण में 127 आपत्तियां दर्ज हुई हैं।

10 सीटों में ही 93 फीसदी आपत्तियां

इन आंकड़ों को जिलेवार देखें तो तस्वीर और दिलचस्प हो जाती है।

उधम सिंह नगर की सात विधानसभा सीटों जसपुर, किच्छा, काशीपुर, रुद्रपुर, बाजपुर, सितारगंज और गदरपुर में कुल 10,310 आपत्तियां दर्ज हैं।

वहीं हरिद्वार की रुड़की, मंगलौर और हरिद्वार ग्रामीण सीटों को मिलाकर 1,029 आपत्तियां सामने आई हैं।

यानी इन 10 विधानसभा क्षेत्रों में कुल 11,339 आपत्तियां दर्ज हैं, जो कुल 12,209 आपत्तियों का करीब 93 फीसदी है।

सबसे ज्यादा आपत्तियां किस आधार पर?

आपत्तियों के कारणों पर नजर डालें तो सबसे ज्यादा 8,166 आपत्तियां Absent/Permanently Shifted यानी मतदाता के अनुपस्थित या स्थायी रूप से स्थानांतरित होने के आधार पर दर्ज हैं।

इसके बाद 2,872 आपत्तियां Already Enrolled यानी नाम पहले से दर्ज होने के आधार पर हैं।

इसके अलावा 730 आपत्तियां Permanently Shifted, 286 मृतक मतदाताओं,

110 कम उम्र के मतदाताओं और दो आपत्तियां ऐसे लोगों के खिलाफ हैं जिन्हें भारतीय नागरिक नहीं बताया गया है।

42 मामलों में आपत्ति का कारण स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं है।

अपने ही नाम के खिलाफ 879 आपत्तियां

SIR के आंकड़ों में एक और असामान्य पैटर्न सामने आया है।

879 ऐसे आवेदन हैं जिनमें आपत्ति दर्ज कराने वाले व्यक्ति का नाम और जिस मतदाता के नाम पर आपत्ति की गई है, दोनों एक ही हैं।

यह कुल 12,209 आपत्तियों का करीब 7.2 फीसदी है।

कांग्रेस ने उठाए सवाल

इन आंकड़ों को लेकर कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग और सरकार पर सवाल उठाए हैं।

पार्टी का आरोप है कि बड़ी संख्या में आपत्तियों के जरिए वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश हो सकती है।

कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता अमेंद्र बिष्ट ने इन आंकड़ों को संदेह पैदा करने वाला बताया और आरोप लगाया कि SIR के जरिए मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश की जा सकती है।

BJP का पलटवार

कांग्रेस के आरोपों पर BJP ने भी पलटवार किया है। भाजपा नेता जोत सिंह बिष्ट का कहना है कि कांग्रेस चुनाव से पहले ही हार मान चुकी है और अपनी संभावित हार को SIR से जोड़कर देख रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस खुद फर्जी आपत्तियां दर्ज कराकर इसका ठीकरा भाजपा पर फोड़ना चाहती है।

आपत्ति लगने का मतलब नाम कटना नहीं

हालांकि यहां सबसे जरूरी बात यह है कि किसी मतदाता के नाम पर आपत्ति दर्ज होना अपने आप में उसका नाम मतदाता सूची से हट जाना नहीं है।

आपत्ति के बाद संबंधित दावे, दस्तावेज और पात्रता का सत्यापन किया जाएगा।

इसके बाद ही मतदाता का नाम बनाए रखने या हटाने को लेकर फैसला होगा।

CEO Uttarakhand की आधिकारिक SIR व्यवस्था में ड्राफ्ट रोल, ASD यानी Absent, Shifted & Deceased Electors की सूची और SIR से जुड़े अन्य दस्तावेज उपलब्ध कराए गए हैं।

अब जांच और सत्यापन पर नजर

फिलहाल 12,209 आपत्तियों में एक नाम से 156 शिकायतें और सिर्फ 10 नामों से 1,124 आपत्तियां सामने आना जरूर सवाल खड़े करता है।

लेकिन इन आपत्तियों को फर्जी या सही बताने का अंतिम निष्कर्ष सत्यापन के बाद ही निकलेगा।

यही वजह है कि अब SIR की प्रक्रिया में आपत्तियों की जांच और अंतिम मतदाता सूची सबसे अहम पड़ाव होगा।

चुनावी साल में इन आंकड़ों ने उत्तराखंड की सियासत को जरूर गर्म कर दिया है।

https://regionalreporter.in/trai-1601-number-series-verified-service-calls/
https://youtu.be/vcFHhM6hn8M?si=GOyOoqOpeayqqd6x
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