बैंक खाते और अध्यक्ष की बैठकों में गैरमौजूदगी पर सवाल
श्रीनगर व्यापार सभा की नई कार्यकारिणी की दूसरी बैठक में पुराने हिसाब-किताब और बैंक खाते के संचालन को लेकर विवाद सामने आया है।
नई कार्यकारिणी की सचिव छवि अग्रवाल के अनुसार, जिला कार्यकारिणी की ओर से पूरा हिसाब-किताब उपलब्ध नहीं कराया गया है।
खाते में जमा रकम में करीब चार लाख रुपये के अंतर की बात भी सामने आई है।
बैठक में इस राशि का पूरा हिसाब मांगे जाने और जरूरत पड़ने पर संबंधित पक्ष को नोटिस देने की बात कही गई।
छवि अग्रवाल के अनुसार, व्यापार सभा के बैंक खाते के संचालन को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
महासचिव के मुताबिक पुराने बैंक प्रस्ताव में अध्यक्ष, महासचिव और कोषाध्यक्ष में से किसी भी दो के हस्ताक्षर से निकासी का प्रावधान है।
आरोप है कि अध्यक्ष की ओर से खाते के संचालन में अपने हस्ताक्षर को अनिवार्य बताया जा रहा है।
इसके चलते नई कार्यकारिणी फिलहाल खाते में उपलब्ध राशि का स्वतंत्र रूप से संचालन नहीं कर पा रही है।
₹4.35 लाख के हिसाब से शपथ ग्रहण के खर्च तक सवाल
बातचीत में कोषाध्यक्ष पंकज नेगी ने व्यापार सभा के करीब 1400 व्यापारियों से जुड़ी ₹4 लाख 35 हजार 303 रुपये की राशि के हिसाब पर सवाल उठाए।
उनके अनुसार, नई कार्यकारिणी को इस राशि का पूरा हिसाब नहीं मिला है और खर्चों का विवरण स्पष्ट होना चाहिए।
उन्होंने चुनाव से पहले हुए शपथ ग्रहण कार्यक्रम के खर्च को लेकर भी आपत्ति जताई।
पंकज नेगी के मुताबिक शपथ ग्रहण कार्यक्रम में अधिकतम 50 हजार रुपये खर्च करने का प्रस्ताव रखा गया था।
उनका दावा है कि बाद में जिला अध्यक्ष की ओर से करीब 1 लाख 24 हजार रुपये खर्च होने की जानकारी दी गई।
उन्होंने इस खर्च का पूरा विवरण और संबंधित हिसाब उपलब्ध कराने की मांग की है।
इन खर्चों और राशि में अंतर से जुड़े दावे फिलहाल संबंधित पदाधिकारियों के पक्ष पर आधारित हैं।

व्यापार सभा भवन के किराये और स्वकर टैक्स का मुद्दा
कोषाध्यक्ष पंकज नेगी ने व्यापार सभा भवन में किराये पर दी गई दुकानों के बकाये का मुद्दा भी उठाया।
उनके अनुसार भवन में करीब चार-पांच किरायेदार हैं और कुछ किरायेदारों पर लंबे समय से किराया बकाया था।
उन्होंने बताया कि नई कार्यकारिणी की बातचीत के बाद किराया वसूली शुरू होने की बात सामने आई है।
हालांकि बकाये की कुल राशि का स्पष्ट विवरण बातचीत में सामने नहीं आया।
इसके अलावा नगर निगम के स्वकर या सेल्फ असेसमेंट टैक्स को लेकर भी व्यापारियों के हित में चर्चा हुई।
पंकज नेगी के अनुसार व्यापारियों के एकजुट होकर नगर निगम पहुंचने के बाद फिलहाल इस प्रस्ताव को टाल दिया गया है।
उन्होंने कहा कि व्यापारियों से जुड़े आर्थिक और प्रशासनिक मामलों में संगठन की एकजुट भूमिका जरूरी है।
अध्यक्ष की बैठकों में गैरमौजूदगी पर भी सवाल
छवि अग्रवाल ने व्यापार सभा अध्यक्ष के साथ समन्वय को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की।
उनके अनुसार कार्यकारिणी की बैठकों और गतिविधियों की जानकारी अध्यक्ष तक पहुंचाई जाती रही है।
इसके बावजूद अध्यक्ष के लगातार दो बैठकों में शामिल नहीं होने पर कार्यकारिणी के पदाधिकारियों ने सवाल उठाए हैं।
उनका कहना है कि नई कार्यकारिणी के कामकाज के लिए सभी पदाधिकारियों के बीच समन्वय जरूरी है।
बैठक के स्थान को लेकर भी व्यापार सभा भवन की व्यवस्थाओं पर सवाल उठे। पदाधिकारियों के अनुसार भवन में साफ-सफाई, गर्मी और अन्य मूलभूत सुविधाओं की समस्या है।
इसी वजह से दूसरी बैठक कल्याणेश्वर धर्मशाला में आयोजित करने की बात कही गई।
पदाधिकारियों का यह भी कहना है कि बैंक खाते के संचालन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने से नई कार्यकारिणी के पास स्वतंत्र रूप से उपयोग करने के लिए राशि उपलब्ध नहीं है।
नई कार्यकारिणी की ओर से पुराने हिसाब-किताब और बैंक खाते से जुड़े मामलों को स्पष्ट करने की मांग की गई है।
पदाधिकारियों के अनुसार जरूरत पड़ने पर संबंधित पक्ष को नोटिस जारी कर जवाब मांगा जाएगा।
राशि का हिसाब स्पष्ट होने के बाद जरूरत पड़ने पर वसूली की कार्रवाई की बात भी कही गई है।















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