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Gen Z ने जंतर-मंतर पर दिखाया जलवा, अब Gen Alpha की बारी!

हमीरपुर में बच्चों ने 5 KM पैदल मार्च कर DM से मांगी सड़क

नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर Gen Z के युवाओं की आवाज ने देश का ध्यान खींचा,

तो अब उत्तर प्रदेश के हमीरपुर से Gen Alpha की आवाज सुनाई दे रही है।

फर्क सिर्फ इतना है कि यहां आंदोलन करने वाले हाथों में बड़े-बड़े पोस्टर नहीं, बल्कि तिरंगा लिए छोटे-छोटे बच्चे हैं।

मुद्दा भी कोई बड़ा राजनीतिक एजेंडा नहीं, बल्कि उनके स्कूल तक पहुंचने के लिए एक पक्की सड़क है।

5 किलोमीटर पैदल चले बच्चे, हाथ में था तिरंगा

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में चंदूपुर और आसपास के गांवों के स्कूली बच्चों ने सड़क की मांग को लेकर करीब 5 किलोमीटर पैदल मार्च किया।

बच्चे और ग्रामीण तिरंगा लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और स्कूल तक पक्की सड़क बनाने की मांग उठाई।

बच्चों की मांग बेहद सीधी थी-सड़क चाहिए, ताकि वे सुरक्षित तरीके से स्कूल जा सकें और पढ़ाई कर सकें।

रिपोर्टों के मुताबिक, आजादी के दशकों बाद भी इलाके की सड़क की स्थिति ऐसी है कि स्कूली बच्चों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ता है।

इसी समस्या को लेकर बच्चों ने प्रशासन के सामने अपनी बात रखने का फैसला किया।

‘सड़क दो, सुरक्षित भविष्य दो’

प्रदर्शन के दौरान बच्चों की आवाज में गुस्सा कम और अपने भविष्य की चिंता ज्यादा दिखाई दी।

उनका कहना था कि अगर स्कूल तक पहुंचने के लिए रास्ता ही ठीक नहीं होगा तो पढ़ाई कैसे होगी?

बच्चों का यह प्रदर्शन इसलिए भी चर्चा में आ गया क्योंकि उन्होंने अपनी समस्या को प्रशासन के सामने सीधे रखने का फैसला किया।

यही वजह है कि सोशल मीडिया और राष्ट्रीय मीडिया में इसे Gen Alpha Protest के तौर पर देखा जा रहा है।

Gen Z के बाद Gen Alpha ने उठाया सवाल

पिछले दिनों दिल्ली का जंतर-मंतर युवा विरोध प्रदर्शनों का बड़ा केंद्र बना था।

Gen Z से जुड़े प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा, रोजगार और दूसरे मुद्दों को लेकर अपनी आवाज बुलंद की थी।

अब हमीरपुर के छोटे बच्चों का प्रदर्शन एक अलग तस्वीर दिखा रहा है।

यहां अगली पीढ़ी के बच्चे किसी बड़े राजनीतिक मुद्दे के बजाय सड़क, स्कूल और अपने भविष्य जैसे बुनियादी सवालों को लेकर प्रशासन के सामने खड़े हैं।

यही वजह है कि सोशल मीडिया पर इसे Gen Z के बाद Gen Alpha की आवाज के रूप में देखा जा रहा है।

बच्चों ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर रखी मांग

रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदर्शनकारी बच्चे जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और सड़क निर्माण की मांग को लेकर अपनी बात रखी।

प्रदर्शन के दौरान कुछ समय तक कलेक्ट्रेट परिसर में स्थिति तनावपूर्ण भी हुई।

मामला अब सिर्फ एक सड़क का नहीं रह गया है। बच्चों का यह प्रदर्शन ग्रामीण इलाकों में शिक्षा तक पहुंच, बुनियादी ढांचे और प्रशासन की जवाबदेही पर भी सवाल खड़े करता है।

सवाल बड़ा है—बच्चों को आंदोलन क्यों करना पड़ा

जिस उम्र में बच्चों के हाथ में किताबें होनी चाहिए, उस उम्र में अगर वे अपनी मूलभूत सुविधाओं के लिए

जिलाधिकारी कार्यालय तक मार्च करने को मजबूर हों, तो सवाल उठना स्वाभाविक है।

क्या स्कूल तक सुरक्षित सड़क देना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी नहीं होनी चाहिए?

हमीरपुर के इन बच्चों ने कम से कम इतना तो दिखा दिया कि नई पीढ़ी अब सिर्फ शिकायत सुनने वाली नहीं, बल्कि अपने अधिकारों के लिए सवाल पूछने वाली भी है।

जंतर-मंतर पर Gen Z की आवाज के बाद हमीरपुर में Gen Alpha की दस्तक को इसी बदलाव की एक झलक माना जा रहा है।

बच्चों की मांग छोटी है—एक सड़क। लेकिन उस सड़क के दूसरी तरफ उनका पूरा भविष्य खड़ा है।

https://regionalreporter.in/18-month-old-girl-death-family-serious-allegations/
https://youtu.be/55Yhp1Wq6lU?si=KfzHH7NS9xafKyrJ
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