बोले- परिवार को निशाना बनाना स्वीकार नहीं
जिला मुख्यालय में हुए धरना-प्रदर्शन के दौरान कैबिनेट मंत्री भरत सिंह चौधरी के खिलाफ कथित अमर्यादित टिप्पणी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है।
मंत्री के पिता को कथित तौर पर अपशब्द कहे जाने से भी विवाद गहरा गया है।
बुधवार को सौंराखाल में आयोजित कार्यक्रम में भरत सिंह चौधरी ने पहली बार इस मामले पर खुलकर नाराजगी जताई।
उन्होंने कहा कि राजनीति में विरोध और आलोचना स्वाभाविक है। लेकिन किसी के माता-पिता और परिवार को निशाना बनाना स्वीकार नहीं किया जा सकता।
महिला की कथित टिप्पणी से शुरू हुआ विवाद
बताया जा रहा है कि जिला कार्यालय में आयोजित धरना-प्रदर्शन के दौरान एक महिला ने मंत्री भरत सिंह चौधरी के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।
आरोप है कि इस दौरान मंत्री के पिता के लिए भी अपशब्दों का इस्तेमाल किया गया।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में महिला द्वारा इस्तेमाल किए गए सटीक शब्द सार्वजनिक तौर पर स्पष्ट नहीं हैं।
बोले- राजनीतिक लड़ाई मुद्दों पर होनी चाहिए
सौंराखाल में मंत्री का इस मुद्दे पर गुस्सा साफ नजर आया।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोधियों को उनके काम, नीतियों और फैसलों पर सवाल उठाने का पूरा अधिकार है।
लेकिन राजनीतिक लड़ाई में परिवार और माता-पिता को घसीटना सही नहीं है।
भरत सिंह चौधरी ने आरोप लगाया कि विरोधी राजनीति में महिलाओं को आगे करके उन पर व्यक्तिगत हमले करवा रहे हैं।
‘जाता तो वो हैं, मैं तो कभी यहां से गया ही नहीं’
मंत्री ने अपने राजनीतिक विरोधियों पर भी निशाना साधा।
उन्होंने कहा, “जाता तो वो हैं जो आता है, मैं तो कभी यहां से गया ही नहीं। उनसे पूछे उनके कार्यालय रुद्रप्रयाग में कहां है।”
उनके इस बयान के बाद कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच राजनीतिक चर्चा तेज हो गई।
‘हारा हूं या जीता हूं, जनता के बीच रहा हूं’
भरत सिंह चौधरी ने अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए कहा कि चुनावी नतीजे उनकी जनता से दूरी तय नहीं करते।
उन्होंने कहा, “हारा हूं या जीता हूं, जनता के बीच रहा हूं।”
मंत्री ने दावा किया कि उन्होंने राजनीति को केवल पोस्टर और प्रचार तक सीमित नहीं रखा।
उनके मुताबिक जनता के सुख-दुख में शामिल रहना और क्षेत्र की समस्याओं को उठाना उनकी प्राथमिकता रही है।
कांग्रेस पर भी साधा निशाना
कार्यक्रम में मंत्री ने कांग्रेस को लेकर भी बड़ा राजनीतिक दावा किया।
उन्होंने कहा, “मैं विधायक रहूं या न रहूं, 25 साल तक कांग्रेस आने वाली नहीं।”
उनके इस बयान को रुद्रप्रयाग की राजनीति में सीधे राजनीतिक चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है।
आगामी चुनावों को लेकर दोनों प्रमुख दलों के बीच सियासी खींचतान के बीच मंत्री का यह बयान चर्चा में आ गया है।
‘फूल-माला पहनने का हक है तो जूते खाने का हक भी मुझे ही है’
भरत सिंह चौधरी ने जनप्रतिनिधि और जनता के रिश्ते को लेकर भी अपनी बात रखी।
उन्होंने कहा, “फूल-माला पहनने का हक है तो जूते खाने का हक भी मुझे ही है।”
साथ ही उन्होंने कहा कि अगर वह गलत काम करते हैं तो जनता को उनके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए।
मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि जनप्रतिनिधियों की आलोचना लोकतंत्र का हिस्सा है।
परिवार पर टिप्पणी को लेकर सख्त संदेश
मंत्री ने कहा कि उनके काम को लेकर कोई भी सवाल उठाया जा सकता है।
विकास कार्यों और जनहित के मुद्दों पर उनसे जवाब मांगा जा सकता है।
लेकिन माता-पिता या परिवार को राजनीतिक विवाद में घसीटना उचित नहीं है।
उन्होंने विरोधियों को संदेश दिया कि राजनीतिक लड़ाई व्यक्तिगत हमलों के बजाय मुद्दों पर लड़ी जानी चाहिए।
इस पूरे विवाद के बीच अब यह मामला स्थानीय राजनीति में नया सियासी मुद्दा बनता दिखाई दे रहा है।















Leave a Reply