नेपाल-तिब्बत सीमा के पास भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचा दी है।
नेपाल में मृतकों की संख्या बढ़कर 162 हो गई है, जबकि 403 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
ग्लेशियर से आए हिमस्खलन के बाद टूटा पानी का कहर
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर से बर्फ और चट्टानों का बड़ा हिस्सा खिसकने के बाद यह आपदा आई।
आइस-रॉक एवलांच ने ल्हेन्डे खोला नदी के प्रवाह को रोक दिया था। इसके बाद जमा पानी अचानक नीचे की ओर तेज रफ्तार से बह निकला।
बताया जा रहा है कि बाढ़ का पानी नेपाल-चीन सीमा के पास रसुवागढ़ी और तिमुरे क्षेत्र में सबसे पहले पहुंचा।
अचानक आए सैलाब ने लोगों को संभलने का मौका तक नहीं दिया।
गांव, सड़कें और पुल बहे, कई परियोजनाएं ठप
भोटेकोशी और आसपास के नदी क्षेत्रों में आए सैलाब से कई बस्तियों को भारी नुकसान पहुंचा है।
सड़कें और पुल बहने से कई इलाकों का संपर्क प्रभावित हुआ है। बाढ़ का असर जलविद्युत परियोजनाओं और अन्य महत्वपूर्ण ढांचे पर भी पड़ा है।
दुर्गम क्षेत्रों में संचार व्यवस्था बाधित होने के कारण राहत और बचाव अभियान में मुश्किलें आ रही हैं।

विदेशी पर्यटक और सुरक्षाकर्मी भी लापता
नेपाल में लापता लोगों में विदेशी पर्यटक और सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं।
कई लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा और आसपास के पर्यटन मार्गों पर थे। अलग-अलग देशों के नागरिकों के लापता होने के बाद उनके परिजनों की चिंता बढ़ गई है।
नेपाल पुलिस और अन्य बचाव एजेंसियां लगातार लापता लोगों की तलाश में जुटी हुई हैं।
नेपाल में 162 मौतें, राहत अभियान जारी
नेपाल पुलिस के अनुसार, विनाशकारी बाढ़ में अब तक 162 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है।
अलग-अलग जिलों से शव बरामद किए जा रहे हैं और कई घायलों का अस्पतालों में इलाज चल रहा है।
आपदा की भयावहता को देखते हुए नेपाल में बड़े स्तर पर सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
भारत ने भेजी 10 टन राहत सामग्री
नेपाल में आई आपदा के बाद भारत ने मदद का हाथ बढ़ाया है।
भारत ने 10 टन मानवीय और आपदा राहत सामग्री नेपाल भेजी है।
राहत सामग्री में अस्थायी आश्रय, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप और जरूरी दवाएं शामिल हैं।
भारत और नेपाल की एजेंसियां राहत और बचाव कार्यों को लेकर समन्वय कर रही हैं।
आपदा के बाद भी खतरा बरकरार
विशेषज्ञों और अधिकारियों की चिंता यह है कि प्रभावित नदी क्षेत्र में स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है।
ऊपरी इलाकों में बने अवरोध और जमा पानी के कारण आगे भी खतरे की आशंका बनी हुई है।
प्रशासन ने नदी किनारे और प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।















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