कोटद्वार के जिम संचालक दीपक कुमार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज FIR के
मामले में आगे होने वाली कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी है। साथ ही नैनीताल हाई कोर्ट के उस आदेश पर भी रोक लगाई
गई है, जिसमें दीपक कुमार को मामले से संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट या वीडियो साझा करने से रोका गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिवादियों को जारी किया नोटिस
मामले की सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने की। दीपक कुमार की ओर से नैनीताल हाई
कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसमें FIR रद्द करने से इनकार किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया और अंतरिम आदेश देते हुए FIR के आधार पर आगे की कार्रवाई पर रोक लगा दी।
अभिषेक मनु सिंघवी ने रखी दीपक की ओर से दलील
सुप्रीम कोर्ट में दीपक कुमार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि
दीपक ने पूरे विवाद में हस्तक्षेप तब किया था, जब बजरंग दल के कुछ सदस्यों ने एक मुस्लिम दुकानदार की दुकान के नाम को लेकर आपत्ति जताई थी।
दलील के दौरान घटना से जुड़े वीडियो और अन्य सामग्री का भी हवाला दिया गया। सिंघवी ने कहा कि दीपक ने खुद घटना को
लेकर शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन उनके खिलाफ FIR दर्ज कर दी गई।
‘मोहम्मद दीपक’ बताने के बाद विवाद में आए थे सुर्खियों में
मामला इस साल 26 जनवरी को कोटद्वार में हुए विवाद से जुड़ा है। एक मुस्लिम दुकानदार की दुकान के नाम में ‘बाबा’ शब्द
को लेकर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने आपत्ति जताई थी।
इसी दौरान दीपक कुमार मौके पर पहुंचे और उन्होंने कार्यकर्ताओं का विरोध किया। जब भीड़ की ओर से उनका नाम पूछा
गया तो उन्होंने खुद को ‘मोहम्मद दीपक’ बताया। इसके बाद घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और मामला चर्चा में आ गया।
दुकान के नाम को लेकर हुआ था विवाद
बताया गया कि दुकानदार वकील अहमद की दुकान का नाम ‘बाबा स्कूल ड्रेस एंड मैचिंग सेंटर’ था। दुकान के नाम में ‘बाबा’ शब्द को लेकर आपत्ति जताई गई थी।
विवाद के दौरान दीपक कुमार ने दुकानदार का पक्ष लेते हुए सवाल उठाया था कि यदि कोई मुस्लिम व्यक्ति अपनी दुकान के
नाम में ‘बाबा’ शब्द का इस्तेमाल करता है तो इसमें आपत्ति क्यों है। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच बहस और धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी थी।
हाई कोर्ट के आदेश को भी दी गई थी चुनौती
दीपक कुमार ने FIR रद्द करने से इनकार करने वाले नैनीताल हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
इसके अलावा हाई कोर्ट द्वारा सोशल मीडिया पर मामले से संबंधित पोस्ट और वीडियो साझा करने पर लगाई गई रोक को भी चुनौती दी गई।
सुप्रीम कोर्ट के ताजा अंतरिम आदेश के बाद फिलहाल दीपक कुमार को इस मामले में राहत मिली है।
मामले में आगे की सुनवाई और प्रतिवादियों के जवाब के बाद तस्वीर और स्पष्ट होगी।















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