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उत्तराखंड में अनुपूरक बजट की तैयारी तेज

विभागों से 18 सितंबर तक मांगे प्रस्ताव

उत्तराखंड सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के अनुपूरक बजट की तैयारी शुरू कर दी है।

वित्त विभाग ने सभी विभागों से बजट प्रस्ताव मांगे हैं।

विभागों को अपने चल रहे विकास कार्यों और आगामी योजनाओं के लिए अतिरिक्त बजट की आवश्यकता का आकलन कर प्रस्ताव भेजने को कहा गया है।

इसके लिए 18 सितंबर 2026 तक की समयसीमा तय की गई है।

5500 करोड़ के आसपास हो सकता है अनुपूरक बजट

वित्त विभाग इन प्रस्तावों की जांच के बाद अनुपूरक बजट का प्रारूप तैयार करेगा।

इस बार अनुपूरक बजट का आकार करीब 5500 करोड़ रुपये रहने की संभावना जताई जा रही है।

वित्त सचिव दिलीप जावलकर के अनुसार, सभी विभागों से 18 सितंबर तक प्रस्ताव मांगे गए हैं।

प्राप्त प्रस्तावों का परीक्षण करने के बाद अनुपूरक बजट तैयार किया जाएगा।

गौरतलब है कि पिछले वित्तीय वर्ष में सरकार ने करीब 5,315 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पेश किया था।

इस बार भी इसका आकार इसके आसपास या थोड़ा अधिक रहने की संभावना है।

मानसून सत्र में पेश हो सकता है बजट

सरकार आगामी उत्तराखंड विधानसभा के मानसून सत्र में अनुपूरक बजट पेश करने की तैयारी कर रही है।

हालांकि विधानसभा सत्र की तारीख और स्थान को लेकर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।

माना जा रहा है कि विधानसभा का मानसून सत्र सितंबर के अंतिम सप्ताह या अक्तूबर के पहले सप्ताह में आयोजित हो सकता है। सत्र की आधिकारिक तारीख सरकार की ओर से बाद में घोषित की जाएगी।

मौजूदा सरकार के कार्यकाल का अंतिम सत्र

राजनीतिक लिहाज से भी आगामी विधानसभा सत्र महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मौजूदा धामी सरकार के कार्यकाल में यह अंतिम विधानसभा सत्र होगा।

ऐसे में सरकार अनुपूरक बजट के जरिए विभिन्न विभागों के लंबित विकास कार्यों, योजनाओं और जरूरी वित्तीय जरूरतों के लिए अतिरिक्त धनराशि का प्रावधान कर सकती है।

पहले शीतकालीन सत्र में आता था अनुपूरक बजट

आमतौर पर उत्तराखंड सरकार अनुपूरक बजट को शीतकालीन विधानसभा सत्र में पेश करती रही है।

हालांकि इस बार सरकार इसे मानसून सत्र में ही सदन के पटल पर रखने की तैयारी कर रही है।

वित्त विभाग ने इसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए सभी विभागों को पत्र भेजकर उनकी अतिरिक्त वित्तीय जरूरतों का ब्योरा मांगा है।

क्या है अनुपूरक बजट?

अनुपूरक बजट वह अतिरिक्त वित्तीय प्रावधान होता है, जिसकी जरूरत मूल बजट में स्वीकृत राशि से अधिक खर्च या नई जरूरत सामने आने पर पड़ती है। इसे विधानसभा की मंजूरी के बाद सरकार खर्च कर सकती है।

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