पूर्व आईएएस विनोद रतूड़ी के नेतृत्व में पहुंची यात्रा, विभिन्न दलों और संगठनों ने किया समर्थन
उत्तराखंड की स्थायी राजधानी गैरसैंण बनाए जाने की मांग को लेकर पूर्व आईएएस अधिकारी विनोद रतूड़ी के
नेतृत्व में निकली ‘गैरसैंण स्थायी राजधानी बनाओ’ पैदल यात्रा सोमवार को गैरसैंण पहुंची।
यात्रा के माध्यम से स्थायी राजधानी के मुद्दे पर जनसमर्थन जुटाने और सरकार का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया गया।
गैरसैंण पहुंचने के बाद विनोद रतूड़ी ने एसडीएम कर्णप्रयाग अखिलेश नौडियाल के माध्यम से प्रधानमंत्री के नाम प्रार्थना पत्र भेजा।
पत्र में उत्तराखंड की स्थायी राजधानी गैरसैंण घोषित किए जाने की मांग की गई।

विभिन्न दलों और विचारधाराओं के लोगों ने दिया समर्थन
यात्रा के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और अलग-अलग विचारधाराओं से जुड़े लोगों ने भी समर्थन दिया।
रतूड़ी ने कहा कि गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाए जाने की मांग लंबे समय से उठती रही है।
उन्होंने कहा कि पैदल यात्रा का उद्देश्य इस मुद्दे को आम जनता तक पहुंचाने के साथ सरकार का ध्यान आकर्षित करना है।
गैरसैंण उत्तराखंड की पर्वतीय भावनाओं और राज्य आंदोलन की अवधारणा से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थान है।
राज्य गठन के बाद भी अनसुलझा है स्थायी राजधानी का मुद्दा
रतूड़ी ने कहा कि उत्तराखंड का गठन 9 नवंबर 2000 को उत्तर प्रदेश से अलग होकर हुआ था।
अलग राज्य की मांग के लिए चले ऐतिहासिक आंदोलन में कई आंदोलनकारियों ने अपने प्राणों की आहुति दी।
उन्होंने कहा कि राज्य गठन के बाद देहरादून अस्थायी राजधानी के रूप में कार्य कर रहा है।
वहीं, पर्वतीय क्षेत्रों के लोगों की ओर से लंबे समय से गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित करने की मांग की जाती रही है।
रतूड़ी के अनुसार, राज्य गठन के दो दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद स्थायी राजधानी का मुद्दा अभी तक अनसुलझा है।
जनता समय-समय पर सरकार को गैरसैंण से जुड़ी अपनी आकांक्षाओं की याद दिलाती रही है।
जंतर-मंतर से शुरू हुई थी यात्रा
विनोद रतूड़ी ने बताया कि यह आंदोलन 21 सितंबर 2025 को दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुआ था।
इसके बाद गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग को लेकर उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों में जनजागरूकता अभियान जारी है।
नगर पंचायत अध्यक्ष मोहन भंडारी ने कहा कि गैरसैंण की राजधानी का मुद्दा राजनीतिक दलों से ऊपर उठकर जनभावना के रूप में देखा जाना चाहिए।
यूकेडी के यूथ विंग के कमांडर आशीष नेगी ने कहा कि गैरसैंण राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों के विकास और पहाड़ की मूलभूत समस्याओं से जुड़े मुद्दों का केंद्र बन सकता है।
उन्होंने सरकार से स्थायी राजधानी के मुद्दे पर ठोस निर्णय लेने की मांग की।
इस दौरान रमेश थपलियाल, रामेश्वर प्रसाद, गोपाल दत्त कुमेड़ी, दान सिंह मिंगवाल, सुधीर गैरोला, डीपी थपलियाल, प्रभा राणा, बलबीर धरमाण, दान सिंह बिष्ट, रमेश दत्त नौटियाल, कमल किशोर डिमरी, भुवन कठायत, मंजू गड़िया, सोनी बोरा, पूजा शर्मा, सुरेंद्र बिष्ट, अशोक साह, वीरेंद्र लाल, पीसी तिवारी, प्रकाश जोशी और जगदीश ममगाई सहित कई लोग मौजूद रहे।

















Leave a Reply