श्रद्धांजलि कार्यक्रम में गरमाया माहौल
आशीष बडोनी के साथ मौन बैठने पर आंदोलनकारियों ने जताई आपत्ति, यूकेडी ने कहा- कोई राजनीतिक प्रदर्शन नहीं था
मसूरी गोलीकांड की 32वीं बरसी पर शहीदों को श्रद्धांजलि देने पहुंचे यूकेडी नेताओं को विरोध का सामना करना पड़ा।
उत्तराखंड क्रांति दल के केंद्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र कुकरेती अपनी टीम के साथ शहीद स्थल पहुंचे थे।
इसी दौरान वहां मौजूद कुछ राज्य आंदोलनकारियों ने आपत्ति जताई।
यूकेडी नेता इंद्रमणि बडोनी के भतीजे आशीष बडोनी कुछ कार्यकर्ताओं के साथ मौन पर बैठे थे।
इसको लेकर आयोजनकर्ताओं और आंदोलनकारियों ने सवाल उठाए।
उनका कहना था कि शहीद स्थल श्रद्धांजलि का स्थान है।
यहां विरोध या राजनीतिक गतिविधि करना उचित नहीं है। विरोध के चलते कार्यक्रम के दौरान माहौल कुछ देर के लिए गरमा गया।
यूकेडी ने दी पूरे मामले पर सफाई
विरोध के बाद यूकेडी नेताओं ने कहा कि शहीद स्थल पर किसी तरह का प्रदर्शन नहीं किया जा रहा था।
सुरेंद्र कुकरेती के अनुसार, बैठने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण वे आशीष बडोनी और अन्य लोगों के साथ मौन में बैठ गए थे।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और कुछ अन्य नेताओं की ओर से घटना को लेकर गलत धारणा बनाई जा रही है।
कुकरेती ने कहा कि उत्तराखंड आंदोलन में यूकेडी और आंदोलनकारियों की अहम भूमिका रही है।
राज्य बनने के बाद भी आंदोलन से जुड़े कई सवाल पूरी तरह हल नहीं हुए हैं।
गैरसैंण समेत पुराने मुद्दों पर सरकार को घेरा
यूकेडी अध्यक्ष ने गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने के मुद्दे पर भी सरकारों को घेरा।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में खनन, शराब और अन्य गतिविधियों से जुड़े माफिया का प्रभाव बढ़ा है।
साथ ही भ्रष्टाचार को लेकर भी उन्होंने सरकार पर निशाना साधा।
कुकरेती ने कहा कि शहीदों के नाम पर राजनीति करने के बजाय उनके सपनों के उत्तराखंड को बनाने की जरूरत है।
70 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी
यूकेडी महामंत्री केन्द्रपाल सिंह तोपवाल और नेता प्रमिला रावत ने भी शहीद स्थल पर राजनीतिक गतिविधियों को लेकर नाराजगी जताई।
उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलन से जुड़े सवालों और पहाड़ की समस्याओं को यूकेडी लगातार उठाती रही है।
नेताओं ने बताया कि पार्टी वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रही है। यूकेडी सभी 70 विधानसभा सीटों पर प्रत्याशी उतारने की योजना बना रही है।
उन्होंने दावा किया कि जनता इस बार राष्ट्रीय दलों के बजाय क्षेत्रीय विकल्प को मौका दे सकती है।
यूकेडी नेताओं ने कहा कि सत्ता में आने पर गैरसैंण राजधानी, रोजगार, पलायन और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दी जाएगी।
श्रद्धांजलि के बीच सियासत भी हुई तेज
मसूरी शहीद स्थल पर हुई नोकझोंक ने 32वीं बरसी के कार्यक्रम में राजनीतिक रंग भी ला दिया।
एक तरफ शहीदों को श्रद्धांजलि देकर उनके सपनों का उत्तराखंड बनाने की बात हुई।
दूसरी तरफ यूकेडी ने मौजूदा सरकारों की नीतियों पर सवाल खड़े किए।
इस घटनाक्रम ने राज्य आंदोलन से जुड़े संगठनों और राजनीतिक दलों के बीच मतभेद को भी सामने ला दिया।
















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