नौ शिक्षकों के प्रमाणपत्र कूटरचित
प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक बनने के लिए लगाए गए यूटीईटी प्रमाणपत्रों की जांच में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है।
दस्तावेज सत्यापन के दौरान चार और शिक्षकों के यूटीईटी प्रमाणपत्र कूटरचित पाए गए हैं।
उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद, रामनगर के मूल अभिलेखों से मिलान के बाद प्रमाणपत्रों में हेरफेर की पुष्टि हुई है।
चार नए मामले सामने आने के बाद जिले में कूटरचित यूटीईटी प्रमाणपत्र वाले शिक्षकों की संख्या नौ पहुंच गई है।
इनमें सात शिक्षक कपकोट विकासखंड और दो शिक्षक बागेश्वर विकासखंड के हैं।
दो बागेश्वर और दो कपकोट के शिक्षक
ताजा जांच में बागेश्वर विकासखंड के दो और कपकोट विकासखंड के दो शिक्षकों के प्रमाणपत्र संदिग्ध पाए गए।
इससे पहले कपकोट विकासखंड में पांच शिक्षकों के यूटीईटी प्रमाणपत्र कूटरचित पाए जा चुके हैं।
अब तक सामने आए नौ मामलों में सात मामले अकेले कपकोट विकासखंड से हैं।
मूल अभिलेखों से खुला फर्जीवाड़ा
मामले का खुलासा उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद की ओर से कराए गए प्रमाणपत्र सत्यापन में हुआ।
परिषद ने संबंधित शिक्षकों के प्रमाणपत्र-सह-अंकपत्रों का मूल सारणियन पंजिका से मिलान किया।
जांच में प्रमाणपत्रों पर दर्ज अंक और अन्य विवरण मूल अभिलेखों से अलग मिले।
कुछ मामलों में प्रमाणपत्रों पर दर्ज अनुक्रमांक भी परिषद के रिकॉर्ड में मौजूद नहीं मिले।
परिषद ने ऐसे प्रमाणपत्रों का सत्यापन संभव नहीं माना और उन्हें कूटरचित बताया।
पंकज कुमार के प्रमाणपत्र में अनुक्रमांक नहीं मिला
बागेश्वर विकासखंड के शिक्षक पंकज कुमार के यूटीईटी प्रथम-2024 प्रमाणपत्र की जांच में गंभीर अंतर मिला।
प्रमाणपत्र पर दर्ज अनुक्रमांक और संबंधित विवरण परिषद की मूल सारणियन पंजिका में नहीं मिले।
परिषद के अनुसार संबंधित अनुक्रमांक उसकी ओर से जारी ही नहीं किया गया था।
इसके आधार पर प्रस्तुत प्रमाणपत्र को पूरी तरह कूटरचित बताया गया।
नेहा के प्रमाणपत्र में अंकों का अंतर
बागेश्वर विकासखंड की शिक्षिका नेहा के यूटीईटी प्रमाणपत्र में भी अंकों में अंतर मिला।
परिषद की मूल सारणियन पंजिका में पांच विषयों के वास्तविक अंक 11, 09, 13, 10 और 10 दर्ज हैं।
वहीं, प्रस्तुत प्रमाणपत्र में इनसे अलग अंक दर्ज पाए गए।
मूल रिकॉर्ड और प्रमाणपत्र के बीच अंतर मिलने पर परिषद ने प्रमाणपत्र को कूटरचित माना।
चंद्रप्रकाश आर्य के अंकों में भी अंतर
कपकोट विकासखंड के शिक्षक चंद्रप्रकाश आर्य के प्रमाणपत्र की जांच में भी अंकों में अंतर सामने आया।
परिषद की मूल सारणियन पंजिका के अनुसार उनके कुल अंक 61/150 हैं।
वहीं, प्रस्तुत अंकपत्र में अलग अंक दर्ज पाए गए।
मूल अभिलेख और प्रमाणपत्र के बीच अंतर को जांच में महत्वपूर्ण माना गया।
प्रियंका का प्रमाणपत्र भी नहीं मिला सही
कपकोट विकासखंड की शिक्षिका प्रियंका के यूटीईटी प्रमाणपत्र का भी सत्यापन कराया गया।
परिषद के मूल अभिलेखों से प्रमाणपत्र का मिलान नहीं हुआ।
सत्यापन के बाद परिषद ने प्रमाणपत्र को कूटरचित माना है।
नोटिस के बाद होगी विभागीय कार्रवाई
जिला शिक्षा अधिकारी आसाराम चौधरी ने बताया कि अब तक नौ शिक्षकों के यूटीईटी प्रमाणपत्र कूटरचित पाए गए हैं।
इनमें दो शिक्षक बागेश्वर और सात शिक्षक कपकोट विकासखंड से हैं।
सभी संबंधित शिक्षकों को नोटिस जारी कर पक्ष रखने का अवसर दिया जा रहा है।
अधिकारी के अनुसार दो मामलों में सुनवाई भी पूरी हो चुकी है।
नोटिस और सुनवाई की प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
विभाग के अनुसार संबंधित शिक्षकों को सेवा से बर्खास्त करने की प्रक्रिया नियमानुसार पूरी की जाएगी।
भर्ती प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
यूटीईटी प्रमाणपत्रों में सामने आई गड़बड़ी ने शिक्षक भर्ती प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
मूल अभिलेखों से प्रमाणपत्रों का सत्यापन फर्जीवाड़े की पहचान में अहम साबित हुआ है।
अब विभागीय सुनवाई पूरी होने और संबंधित शिक्षकों पर कार्रवाई का इंतजार है।
















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