रीजनल रिपोर्टर

सरोकारों से साक्षात्कार

गढ़वाल विश्वविद्यालय में नामांकन के दौरान बवाल, ABVP प्रत्याशी का फॉर्म फाड़ने का आरोप

श्रीनगर: हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में आगामी 11 सितंबर को होने वाले छात्र संघ चुनाव के लिए आज,

3 सितंबर, नामांकन का आखिरी दिन रहा। नामांकन के अंतिम दिन विभिन्न पदों के प्रत्याशी अपना-अपना नामांकन दाखिल

करने पहुंचे। इसी दौरान ABVP के कोषाध्यक्ष पद के प्रत्याशी आलोक यादव से जुड़ा एक मामला सामने आया।

फोटोकॉपी कराने जा रहे थे आलोक यादव

बताया जा रहा है कि नामांकन प्रक्रिया के दौरान आलोक यादव को किसी दस्तावेज की फोटोकॉपी कराने की जरूरत पड़ी।

वह अपना नामांकन फॉर्म लेकर फोटोकॉपी कराने जा रहे थे। इसी दौरान, उनके आरोप के मुताबिक, एक छात्र ने उनके हाथ

से नामांकन फॉर्म छीन लिया और उसे फाड़ दिया।

ABVP प्रत्याशी ने लगाया गंभीर आरोप

आलोक यादव ने आरोप लगाया कि उनके नामांकन फॉर्म को जानबूझकर फाड़ा गया। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र

रूप से अभी पुष्टि नहीं हो पाई है। घटना को लेकर ABVP से जुड़े छात्र नेताओं में नाराजगी देखने को मिल रही है।

कड़ी सुरक्षा के बावजूद घटना पर सवाल

ABVP छात्र नेताओं का कहना है कि नामांकन स्थल पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। बिना आईडी कार्ड के किसी भी

छात्र के प्रवेश पर रोक थी। इसके अलावा कैंपस में बैरिकेडिंग के साथ पुलिस प्रशासन की तैनाती भी की गई थी।

ऐसे में इतनी सुरक्षा व्यवस्था के बीच किसी प्रत्याशी के नामांकन दस्तावेज के साथ इस तरह की घटना होने पर सवाल उठ रहे हैं।

प्रशासन और चुनाव आयोग पर उठाए सवाल

घटना के बाद ABVP से जुड़े छात्र नेताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ-साथ छात्र संघ चुनाव की निगरानी कर रहे चुनाव

आयोग की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि अगर एक प्रत्याशी के नामांकन दस्तावेज ही

सुरक्षित नहीं हैं, तो चुनाव के दौरान आम छात्रों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा होती है।

निष्पक्ष जांच की मांग

ABVP नेताओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर घटना की सच्चाई सामने लाने की मांग की है। उनका कहना है कि

विश्वविद्यालय प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि नामांकन स्थल पर इतनी सुरक्षा के बावजूद यह घटना कैसे हुई और

इसके लिए जिम्मेदार कौन है।

आधिकारिक पुष्टि का इंतजार

फिलहाल नामांकन फॉर्म फाड़े जाने के आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। विश्वविद्यालय प्रशासन या चुनाव आयोग की ओर से

इस मामले में आधिकारिक बयान सामने आने के बाद ही घटनाक्रम की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

Website |  + posts

Leave a Reply

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *