कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता करेंगे दौरे
उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं।
सितंबर में कांग्रेस का राष्ट्रीय नेतृत्व राज्य में सक्रिय नजर आएगा।
कांग्रेस कैंपेन कमेटी के अध्यक्ष प्रीतम सिंह के अनुसार, राहुल गांधी,
प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे समेत कई बड़े नेता सितंबर में उत्तराखंड का दौरा करेंगे।
सितंबर में उत्तराखंड पर कांग्रेस का फोकस
अगस्त के बाद सितंबर में भी बारिश का दौर जारी है।
हालांकि, कांग्रेस की चुनावी तैयारियों पर इसका असर पड़ने की संभावना नहीं है।
पार्टी के प्रदेश स्तर के नेताओं के साथ राष्ट्रीय नेतृत्व भी उत्तराखंड में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की तैयारी में है।
एक ही महीने में कई बड़े नेताओं के दौरे को चुनावी रणनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
राहुल, प्रियंका और खड़गे के दौरे पर नजर
प्रीतम सिंह ने बताया कि सितंबर में राहुल गांधी के अलावा प्रियंका गांधी और राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के उत्तराखंड आने की योजना है।
उन्होंने कहा कि यदि प्रियंका गांधी प्रदेश के अलग-अलग जिलों का दौरा करती हैं, तो इससे कांग्रेस के चुनावी अभियान को मजबूती मिल सकती है।
कांग्रेस नेताओं की सक्रियता ऐसे समय बढ़ रही है, जब वर्ष 2027 में उत्तराखंड समेत कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं।
पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व उत्तराखंड में जिस तरह सक्रिय हो रहा है, उसे चुनावी तैयारियों का संकेत माना जा रहा है।
भाजपा ने कांग्रेस के दावे पर उठाए सवाल
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता मथुरा दत्त जोशी ने कांग्रेस के राष्ट्रीय नेताओं के दौरों को लेकर अलग राय रखी।
उन्होंने कहा कि केवल बड़े नेताओं के आने से चुनावी परिणाम पर खास असर नहीं पड़ेगा।
“राज्य में चाहे राहुल गांधी आएं या मल्लिकार्जुन खड़गे या प्रियंका गांधी, इसका चुनाव पर कुछ खास असर नहीं दिखाई देगा। कांग्रेस का उत्तराखंड में संगठन ही नहीं है और जब कांग्रेस के पास सेना ही नहीं है तो सेनापति कैसे चुनाव जीतवा सकता है।”
–मथुरा दत्त जोशी, प्रदेश प्रवक्ता, भाजपा
मुद्दों को लेकर भी बढ़ेगी राजनीतिक जंग
उत्तराखंड में पिछले कुछ समय से धार्मिक और सामाजिक मुद्दों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हुई है।
हिंदू-मुस्लिम मुद्दों के साथ दलित और अल्पसंख्यक राजनीति भी चर्चा में रही है।
अब कांग्रेस के राष्ट्रीय नेताओं के दौरों और भाजपा की सक्रियता के बीच प्रदेश में राजनीतिक बयानबाजी बढ़ने के आसार हैं।
सितंबर में होने वाली गतिविधियां आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को नई दिशा दे सकती हैं।















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