नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ के बाद हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं।
हर दिन के साथ मृतकों और लापता लोगों की संख्या बढ़ रही है।
नेपाल की राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, बाढ़ में अब तक कम से कम 1,259 लोगों की मौत हो चुकी है।
वहीं, करीब 5,083 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। अब तक 12 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बचाया जा चुका है।
भारत ने भेजी राहत सामग्री की नई खेप
भारत ने नेपाल की मदद के लिए राहत सामग्री की नई खेप भेजी है। भारतीय वायुसेना के दो सी-130जे विमान 21.5 टन राहत सामग्री लेकर काठमांडो पहुंचे।
इस खेप में मेडिकल सप्लाई, जरूरी राहत सामग्री और फोरेंसिक किट शामिल हैं।
यह सामग्री राहत अभियान के साथ-साथ अज्ञात शवों की पहचान में भी मदद करेगी।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत अब तक नेपाल को कुल 74 टन राहत सामग्री भेज चुका है। इसमें दवाइयां, टेंट, स्लीपिंग बैग, भोजन और बचाव उपकरण शामिल हैं।

लापता भारतीयों की पहचान के लिए भारत में होगी डीएनए जांच
नेपाल में मिले अज्ञात शवों की पहचान के लिए भारत ने डीएनए प्रोफाइलिंग की सुविधा देने का फैसला किया है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, लापता लोगों के प्रथम श्रेणी के जैविक रिश्तेदारों के नमूने लिए जाएंगे।
इनमें माता-पिता, बेटा, बेटी और भाई-बहन शामिल हैं।
डीएनए प्रोफाइलिंग केंद्रीय और राज्य फोरेंसिक प्रयोगशालाओं के अलावा राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय तथा मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में कराई जा सकेगी।
नेपाल पुलिस की सलाह के अनुसार ऑटोसोमल एसटीआर डीएनए प्रोफाइलिंग कराई जाएगी।
इसके लिए नेपाल पुलिस ने हेल्पलाइन नंबर +977 9841 6160 95 जारी किया है।
संबंधित जानकारी और डीएनए प्रोफाइल dnacodis@nepalpolice.gov.np पर भेजी जा सकती है।
इसकी एक प्रति भारतीय दूतावास के ईमेल eoikathmandufloodsupport@gmail.com पर भी भेजी जा सकती है।
सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश जारी
बाढ़ के बाद नेपाल के कई जलविद्युत प्रोजेक्टों की सुरंगों में सैकड़ों मजदूरों के फंसे होने की आशंका है।
राहत दल मलबे और कीचड़ के बीच सुरंगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।
शुक्रवार को त्रिशूली-3ए जलविद्युत परियोजना की सुरंग से दो मजदूरों को जिंदा बाहर निकाला गया।
दोनों मजदूर करीब नौ दिन से सुरंग में फंसे थे। इस बचाव अभियान से अन्य सुरंगों में फंसे लोगों के सुरक्षित मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
अधिकारियों के अनुसार, नेपाल के 12 जलविद्युत प्रोजेक्टों में करीब 900 मजदूर लापता हैं।
इनमें लगभग 500 लोगों के सुरंगों में फंसे होने की आशंका जताई जा रही है।
भारी मलबा, कमजोर रास्ते और लगातार भूस्खलन बचाव अभियान में बड़ी चुनौती बने हुए हैं।

कई जिलों में तबाही, सड़क और पुल बहे
बाढ़ ने नेपाल के कई जिलों में सड़क, पुल, बिजली और संचार व्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचाया है।
स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, 35 मोटर योग्य पुल, 45 झूला पुल और करीब 40 किलोमीटर पक्की सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं।
कई गांवों का संपर्क मुख्य शहरों से टूट गया है। राहत सामग्री पहुंचाने में भी बचाव दल को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
नेपाल में बाढ़ की वजह से हजारों लोग विस्थापित हुए हैं।
कई परिवार अस्थायी शिविरों और धार्मिक स्थलों में शरण लेने को मजबूर हैं। वहीं, लापता लोगों के परिजन अब भी अपनों की तलाश में जुटे हैं।
मानसिक पीड़ा से जूझ रहे बाढ़ पीड़ित
बाढ़ से प्रभावित लोगों में अब मानसिक तनाव और डर बढ़ रहा है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक कई लोग हादसे के बाद सदमे में हैं।
कई परिवारों ने अपने परिजनों को खो दिया है, जबकि हजारों लोग अब भी अपनों के लौटने का इंतजार कर रहे हैं।
राहत एजेंसियां भोजन, दवाइयों और सुरक्षित आश्रय के साथ मानसिक स्वास्थ्य सहायता की जरूरत पर भी जोर दे रही हैं।
भारत और अन्य देशों की मदद जारी
भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया ने भी नेपाल में खोज और बचाव अभियान के लिए ड्रोन विशेषज्ञों की टीम भेजी है।
ऑस्ट्रेलियाई टीम कठिन इलाकों और सुरंगों में फंसे लोगों का पता लगाने में मदद करेगी।
नेपाल सरकार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तकनीकी सहायता की अपील की है।
कई देशों की टीमें राहत, शवों की पहचान और बचाव अभियान में सहयोग कर रही हैं।
नेपाल में राहत और बचाव अभियान अभी भी युद्धस्तर पर चल रहा है।
हालांकि, लगातार बढ़ती मौतों और लापता लोगों की संख्या ने त्रासदी को और गंभीर बना दिया है।
अधिकारियों का कहना है कि जब तक सभी प्रभावित इलाकों में तलाशी पूरी नहीं हो जाती, तब तक अंतिम आंकड़ा सामने नहीं आ सकेगा।
















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