UKD नेता आशीष नेगी भी पहुंचे
कर्णप्रयाग विकासखंड के सकंड गांव में सड़क की मांग को लेकर चल रहा ग्रामीणों का संघर्ष अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है।
वर्षों से सड़क का इंतजार कर रहे ग्रामीणों ने हाल में खुद सड़क कटिंग शुरू कर दी थी।
ग्रामीणों के इस कदम के बाद प्रशासन हरकत में आया। डीएफओ, एसडीएम और लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता गांव पहुंचे।
अधिकारियों ने सड़क निर्माण की दिशा में कार्रवाई का लिखित आश्वासन दिया।
ग्रामीणों को तीन महीने की समयसीमा दी गई है। इसके बाद ग्रामीणों ने फिलहाल अपना संघर्ष रोक दिया है।
हालांकि उन्होंने साफ कर दिया कि यह विराम स्थायी नहीं है।

40 साल से सड़क का इंतजार
सकंड गांव को सड़क से जोड़ने की मांग करीब चार दशक पुरानी बताई जाती है।
ग्रामीणों को आज भी जरूरी सामान और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए लंबी दूरी पैदल तय करनी पड़ती है।
जनवरी 2026 में भी ग्रामीणों ने सड़क की मांग को लेकर धरना दिया था।
तब अधिकारियों ने एक सप्ताह में सर्वे शुरू करने का आश्वासन दिया था। इसके बाद लोनिवि ने प्रारंभिक सर्वे भी किया था।
जनवरी में हुए सर्वे के दौरान मुख्य मार्ग से सकंड तक करीब नौ किलोमीटर सड़क का एलाइनमेंट प्रस्तावित बताया गया था।
सर्वे में कई मोड़ों के साथ सड़क की लंबाई का आकलन किया गया था।
आश्वासन के बाद भी काम नहीं बढ़ा तो ग्रामीणों ने उठाए औजार
लगातार आश्वासनों के बावजूद निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ने पर ग्रामीणों ने खुद सड़क बनाने का फैसला लिया।
ग्रामीण गेती, फावड़े और बेलचे लेकर सड़क कटिंग में जुट गए।
ग्राम प्रधान शिवानी चौधरी के नेतृत्व में ग्रामीणों ने श्रमदान से सड़क बनाने की शुरुआत की।
ग्रामीणों का कहना था कि उनका मकसद प्रशासन का ध्यान वर्षों पुरानी समस्या की ओर खींचना है।
31 अगस्त को ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी भी दी थी।
उन्होंने कहा था कि 10 सितंबर तक काम शुरू नहीं हुआ तो 11 सितंबर से वे खुद सड़क कटिंग शुरू करेंगे।
UKD नेता आशीष नेगी भी ग्रामीणों के साथ उतरे
ग्रामीणों के सड़क निर्माण अभियान के दौरान उत्तराखंड क्रांति दल के नेता आशीष नेगी भी सकंड गांव पहुंचे।
उपलब्ध सोशल मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, वे समर्थकों के साथ ग्रामीणों के बीच पहुंचे और सड़क निर्माण में उनके साथ हाथ बंटाया।
इस दौरान ग्रामीणों के साथ सड़क की समस्या और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर बातचीत भी हुई।
इस घटनाक्रम ने ग्रामीणों के आंदोलन को राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा में ला दिया है।

वन भूमि बनी बड़ी अड़चन
सकंड में ग्रामीणों द्वारा खुद सड़क बनाने की जानकारी प्रशासन तक पहुंचने के बाद एसडीएम कर्णप्रयाग अल्केश नौटियाल ने भी स्थिति स्पष्ट की थी।
उनके अनुसार जिस स्थान पर ग्रामीण सड़क बना रहे थे, वह वन भूमि के अंतर्गत आता है।
मामले की जानकारी संबंधित विभागों को दी गई थी।
यही वजह है कि अब सड़क निर्माण के लिए वन संबंधी प्रक्रिया, स्वीकृति और विभागीय कार्रवाई अहम होगी।
तीन महीने की समयसीमा पर टिकी ग्रामीणों की उम्मीद
अब डीएफओ, एसडीएम और लोनिवि के अधिशासी अभियंता के गांव पहुंचने के बाद ग्रामीणों को तीन महीने का लिखित आश्वासन मिला है।
ग्राम प्रधान शिवानी चौधरी ने कहा कि अधिकारियों ने गांव पहुंचकर तीन महीने में कार्रवाई का भरोसा दिया है।
उन्होंने कहा कि तय अवधि में काम शुरू नहीं हुआ तो ग्रामीण फिर सड़क निर्माण खुद शुरू करेंगे।
यानी ग्रामीणों ने अपना संघर्ष खत्म नहीं किया है। उन्होंने प्रशासन को सिर्फ तीन महीने का समय दिया है।
अब देखना होगा कि इस अवधि में सर्वे, वन भूमि की प्रक्रिया और अन्य जरूरी स्वीकृतियां कितनी तेजी से पूरी होती हैं। इसके बाद सड़क निर्माण की वास्तविक स्थिति साफ होगी।
सकंड के ग्रामीणों ने फिलहाल औजार नीचे रख दिए हैं। अब तीन महीने का लिखित आश्वासन प्रशासन की अग्निपरीक्षा है।















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