जेल में बंद यूट्यूबर अनुराग डोभाल को अदालत से राहत नहीं मिली है।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रवि प्रकाश की अदालत ने अनुराग डोभाल समेत चार आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी।
मामला मारपीट, गंभीर चोट पहुंचाने और अपहरण के आरोपों से जुड़ा है।
अदालत ने अपराधों की गंभीरता और विवेचना के शुरुआती चरण में होने के आधार पर जमानत देने से इनकार किया।
मामला 5 अक्टूबर 2026 को देहरादून में हरिद्वार बाईपास के पास नेक्सा शोरूम के नजदीक हुई घटना का है।
इस मामले में अनुराग डोभाल के अलावा अभय चौधरी, अभिषेक टाइगर और कुर्बान उर्फ गुरु भाई आरोपी हैं।
चारों की ओर से अदालत में जमानत के लिए प्रार्थना पत्र दाखिल किए गए थे।
बचाव पक्ष ने लगाए झूठा फंसाने के आरोप
सुनवाई के दौरान अनुराग डोभाल की ओर से बचाव पक्ष ने दलील दी कि उनकी पत्नी उन्हें ब्लैकमेल कर रही थी।
बचाव पक्ष के अनुसार, उनकी पत्नी के भाई राज सिंह चौहान ने सुलह के लिए उन्हें घटनास्थल पर बुलाया था, जहां विवाद हुआ और उन्हें झूठे मामले में फंसा दिया गया।
बचाव पक्ष ने अदालत में तर्क दिया कि आरोपियों के खिलाफ अपहरण का अपराध नहीं बनता और उन्हें पर्याप्त आधार के बिना गिरफ्तार किया गया।
अपने पक्ष के समर्थन में व्हाट्सएप चैट के स्क्रीनशॉट भी पेश किए गए।
अभियोजन पक्ष ने जमानत का किया विरोध
लोक अभियोजक और वादी के अधिवक्ता ने जमानत याचिका का विरोध किया।
अभियोजन पक्ष का आरोप था कि आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से वादी को घटनास्थल पर बुलाया, उसके साथ मारपीट की और जबरन कार में डालकर भी पीटा।
वादी के अधिवक्ता ने बचाव पक्ष की ओर से पेश किए गए व्हाट्सएप चैट के स्क्रीनशॉट की प्रमाणिकता पर भी सवाल उठाए।
इस तरह सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष ने अपने-अपने तर्क अदालत के सामने रखे।
विवेचना शुरुआती चरण में, अदालत ने खारिज की याचिका
अदालत ने पुलिस रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजों का अवलोकन किया। मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 117(2), 191(2), 351(3), 140(1) और 3(5) के तहत आरोप दर्ज हैं।
अदालत ने कहा कि मामले की विवेचना अभी प्रारंभिक स्तर पर है। ऐसे में इस चरण पर साक्ष्यों का विस्तृत विश्लेषण करना उचित नहीं होगा।
अपराधों की गंभीरता और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने अनुराग डोभाल समेत चारों आरोपियों की जमानत याचिकाएं निरस्त कर दीं।
जमानत याचिका खारिज होने के बाद फिलहाल चारों आरोपियों को इस मामले में अदालत से राहत नहीं मिली है।
मामले में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।















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