दिवाली के बाद क्या होगी CJP की रणनीति?
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख चेहरे सौरव दास और आशुतोष रांका सात दिन की न्यायिक हिरासत के बाद जेल से बाहर आ गए हैं।
21 अक्टूबर को दिल्ली की विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट अदालत ने दोनों की रिहाई का आदेश दिया।
इसके बाद आंदोलन को लेकर सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया।
सौरव दास ने रिहाई के बाद एक्स पर ‘Gyanu Has To Go’ लिखकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपना रुख दोहराया।
वहीं, अभिजीत दीपके और ध्रुव राठी ने भी दोनों की रिहाई पर प्रतिक्रिया दी।
₹50 हजार के मुचलके और लिखित आश्वासन पर रिहाई
अदालत ने सौरव दास और आशुतोष रांका को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके और जमानती बॉन्ड जमा करने के निर्देश दिए।
दोनों ने लिखित आश्वासन दिया कि वे शांति भंग नहीं करेंगे और कानून-व्यवस्था बनाए रखेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि जब तक जंतर-मंतर को कानूनी रूप से दोबारा अधिसूचित प्रदर्शन स्थल का दर्जा नहीं मिलता, तब तक वे वहां प्रदर्शन का आह्वान नहीं करेंगे।
उन्होंने भविष्य के प्रदर्शनों को संविधान के दायरे में रखने की प्रतिबद्धता भी जताई।
दिल्ली पुलिस ने दोनों की हिरासत तीन दिन और बढ़ाने की मांग की थी।
हालांकि, अदालत ने लिखित आश्वासन और मुचलकों को पर्याप्त मानते हुए आगे न्यायिक हिरासत को जरूरी नहीं माना।
मामले की जांच जारी है और अगली सुनवाई 23 अक्टूबर को दोपहर तीन बजे निर्धारित है।
रिहाई के बाद फिर उठाया ‘Gyanu Has To Go’ का नारा
जेल से बाहर आने के बाद सौरव दास ने एक्स पर लिखा, ‘Gyanu Has To Go’। इसके बाद सीजेपी की
ओर से साझा किए गए एक वीडियो में सौरव दास और आशुतोष रांका तिरंगा लेकर ‘इंकलाब जिंदाबाद’,
‘भारत माता की जय’ और ‘Gyanu Must Go’ के नारे लगाते दिखाई दिए।
यह नारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से जुड़ा है।
सीजेपी और उससे जुड़े प्रदर्शनकारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते रहे हैं।
हालांकि, निर्वाचन आयोग का कहना है कि मतदाता सूची से हटाए गए नामों के मामले में पात्र मतदाता दोबारा पंजीकरण करा सकते हैं।
ऐसे में मतदाता सूची को लेकर उठाए गए आरोप और आयोग का पक्ष इस विवाद के अहम पहलू हैं।
अभिजीत दीपके बोले- दोनों मुझसे बड़े नेता
सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके ने सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई पर खुशी जताई।
उन्होंने एक्स पर लिखा कि सौरव और आशुतोष उनसे कहीं बड़े नेता हैं और वे उनके निर्देशों का पालन करने को तैयार हैं।
दीपके ने अपने पोस्ट में लिखा, ‘जान हाजिर है।’ इसके साथ उन्होंने मजाकिया अंदाज में यह भी कहा कि अब उनके बिना बगीचे में कोई अकेले नहीं घूमेगा।
दीपके पहले भी कह चुके हैं कि दोनों नेताओं की रिहाई के बाद संगठन के सदस्य फिर जुटेंगे, आगे की रणनीति तय करेंगे और आंदोलन को आगे बढ़ाएंगे।
ध्रुव राठी ने बताया ‘मॉडर्न डे फ्रीडम फाइटर्स’
यूट्यूबर ध्रुव राठी ने भी दोनों नेताओं की रिहाई पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘Welcome back Saurav & Ashutosh! Our modern day freedom fighters।’
उनकी इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर सीजेपी नेताओं की रिहाई को लेकर चर्चा और तेज हो गई।
आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी दोनों की रिहाई पर बधाई देते हुए उनके संघर्ष के प्रति समर्थन जताया।
सीजेपी की कानूनी प्रमुख रत्ना सिंह ने अदालत के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय पहले ही आ जाना चाहिए था।
दिवाली के बाद क्या होगी आंदोलन की रणनीति?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई के बाद सीजेपी आंदोलन को किस दिशा में ले जाएगी।
संगठन की प्रमुख मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की है। इसके लिए सीजेपी पहले भी दिल्ली में प्रदर्शन कर चुकी है।
हालांकि, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के संबंध में अदालत में दिए गए लिखित आश्वासन के चलते संगठन के सामने रणनीति तय करने की चुनौती होगी।
दोनों नेताओं ने वहां प्रदर्शन का आह्वान न करने की प्रतिबद्धता जताई है,
जब तक स्थल को कानूनी रूप से फिर प्रदर्शन स्थल का दर्जा नहीं मिलता।
अभिजीत दीपके के पहले के बयान के मुताबिक, दोनों नेताओं की रिहाई के बाद संगठन फिर जुटकर आगे की रणनीति तय करेगा।
ऐसे में दिवाली के बाद आंदोलन का स्वरूप, प्रदर्शन की जगह और अगली कार्रवाई पर सबकी नजर रहेगी।
फिलहाल, रिहाई के बाद सौरव दास का ‘Gyanu Has To Go’ संदेश बताता है कि मुख्य चुनाव आयुक्त के
इस्तीफे की मांग पर सीजेपी ने अपना सार्वजनिक रुख बरकरार रखा है।















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