बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले आम चुनाव से पहले देश की कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आई हैं। कई अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्टों में बताया गया है
कि बीते डेढ़ साल के दौरान बांग्लादेश में हिंसा और अनिश्चितता अपने चरम पर रही है।
मॉब लिंचिंग की घटनाओं में तेज़ इजाफा
मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल और ATS-SS की रिपोर्ट के अनुसार, देश में मॉब लिंचिंग और भीड़ द्वारा की जा रही हिंसा की घटनाओं में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि चरमपंथी तत्वों को कथित तौर पर खुली छूट मिल रही है, जिससे अराजक घटनाएं बढ़ी हैं।
17 महीनों में सैकड़ों घटनाएं, सैकड़ों मौतें
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 17 महीनों में बांग्लादेश में 413 मॉब वायलेंस की घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 259 लोगों की मौत हुई।
वहीं, एक अन्य मानवाधिकार संगठन अधिकार का दावा है कि मॉब लिंचिंग में 181 लोगों की जान गई है।
पीट-पीटकर और जिंदा जलाने की घटनाएं
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि हिंसा के शिकार अधिकांश लोगों को या तो पीट-पीटकर मार डाला गया या फिर जिंदा जला दिया गया।
इन घटनाओं ने चुनाव से पहले देश में सुरक्षा और मानवाधिकारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ा दी है।

















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